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Namo Bharat Train: नमो भारत ट्रेन से आसान होगा दिल्ली से हरिद्वार का सफर, 3 घंटे में पूरी होगी यात्रा!


Uttarakhand

oi-Smita Mugdha

Namo Bharat Train: उत्तराखंड की कनेक्टिविटी और पर्यटन ढांचे को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार से नमो भारत आरआरटीएस (Namo Bharat RRTS) कॉरिडोर को मेरठ से हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तारित करने का प्रस्ताव दिया है। इसकी मंजूरी मिलती है, तो लोगों के लिए दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेष का सफर काफी आसान हो जाएगा।

इस प्रस्ताव के साथ ही देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो कॉरिडोर की भी मांग रखी गई है। अगर इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली से ऋषिकेश तक की यात्रा महज ढाई से तीन घंटे में पूरी हो सकेगी, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

Namo Bharat Train

Namo Bharat Train: रुड़की-ऋषिकेष तक कॉरिडोर बढ़ाने की मांग

– मुख्यमंत्री धामी ने इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ बैठक कर परियोजना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। वर्तमान में नमो भारत ट्रेन दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक संचालित हो रही है।

– प्रस्तावित विस्तार के तहत यह कॉरिडोर मोदीपुरम से आगे बढ़ते हुए हरिद्वार, रुड़की और ऋषिकेश जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा।

– राज्य सरकार का मानना है कि इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि पर्यटन, होटल, होमस्टे और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश के अवसर भी पैदा होंगे।

– हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

Delhi to Haridwar Journey: दिल्ली से हरिद्वार पहुंचना होगा आसान

इसके अलावा, रुड़की में छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए आवासीय सुविधाओं की मांग बढ़ने की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी। मोदीपुरम इस कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण जंक्शन बन सकता है, जहां से विभिन्न क्षेत्रों के लिए कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। राजाजी नेशनल पार्क के आसपास पर्यावरण मंजूरी, NH-58 के किनारे भूमि अधिग्रहण और पहाड़ी इलाकों में एलिवेटेड ट्रैक या सुरंग निर्माण जैसी बाधाएं परियोजना की लागत और समयसीमा को प्रभावित कर सकती हैं।

इन चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार इस परियोजना को उत्तराखंड के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए गेमचेंजर मान रही है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह क्षेत्र देश के प्रमुख हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जुड़ जाएगा और विकास को नई दिशा मिलेगी।



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