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oi-Divyansh Rastogi
News Labour Codes India 2026: भारत में श्रम कानूनों (Labour Laws) को लेकर बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है। सरकार ने पुराने 29 कानूनों को मिलाकर 4 नए श्रम संहिताएं (Labour Codes) लागू करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 से लागू कर दी हैं। इसका मकसद सिस्टम को आसान और पारदर्शी बनाना है, लेकिन इसके साथ ही कंपनियों के लिए नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
ये संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गई हैं, लेकिन केंद्रीय और राज्य स्तर के विस्तृत नियम (Rules) अभी पूरी तरह अधिसूचित नहीं हुए हैं। दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट नियम जारी किए गए थे, जिन पर सुझाव मांगे गए थे। कई प्रावधान अभी भी ट्रांजिशन पीरियड में हैं, और पुराने नियम तब तक लागू रहेंगे, जब तक नए नियम फाइनल नहीं हो जाते। अगर आप नौकरी करते हैं या ह्यूमन रिसोर्स (HR), Payroll या व्यापार (Business) से जुड़े हैं, तो यह बदलाव सीधे तौर पर आपको प्रभावित कर सकता है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि ये नए नियम क्या हैं और इनका असर किस तरह पड़ेगा?

क्या हैं 4 नए श्रम संहिताएं ?
सरकार ने श्रम सिस्टम (Labour System) को मॉर्डन बनाने के लिए चार बड़े संहिताएं (Codes) तैयार किए हैं। इनमें Wage Code, Industrial Relations Code, Social Security Code और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code शामिल हैं। इनका मकसद पूरे देश में एक समान नियम लागू करना, भ्रम कम करना और अनुपालन प्रक्रिया (Compliance Process) को आसान बनाना है।
एक नजर में-
- वेतन संहिता, 2019 (Wage Code)
- औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code)
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code)
- व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code)
वेतन की परिभाषा में क्या बदलाव हुआ?
सबसे बड़ा बदलाव सैलरी स्ट्रक्चर में देखने को मिलेगा। नए नियमों में ‘सैलरी’ की परिभाषा बदली गई है, जिससे बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ सकता है। हालांकि, सरकार ने FAQ में यह संकेत दिया है कि वेतन कुल सैलरी का करीब 50% होना चाहिए, लेकिन इसे अभी कानून में साफ तौर पर नहीं लिखा गया है। यही बात कंपनियों के लिए भ्रम पैदा कर रही है।
PF और in-hand Salary पर क्या असर पड़ेगा?
नई सैलरी की परिभाषा का सीधा असर भविष्य निधि अंशदान (Provident Fund Contribution) पर पड़ेगा। अगर बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो PF भी ज्यादा कटेगा। इसका मतलब है कि कुछ कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी कम हो सकती है। लेकिन ड्राफ्ट रूल के मुताबिक, काम देनेवाले यानी Employer को यह ध्यान रखना होगा कि कर्मचारी की नेट सैलरी यानी शुद्ध वेतन पर ज्यादा नकारात्मक असर न पड़े। यही वजह है कि कई कंपनियां अभी क्लियर गाइडलाइन्स का इंतजार कर रही हैं और तुरंत बदलाव करने से बच रही हैं।
ग्रेच्युटी और अन्य खर्च क्यों बढ़ेंगे
नई वेतन की परिभाषा के कारण ग्रेच्युटी (Gratuity) की गणना भी बढ़ सकती है। इससे कंपनियों की दीर्घकालिक दायित्व (Long-term Liability) बढ़ेगी। खास बात यह है कि अब निश्चित अवधि के कर्मचारी (Fixed-Term Employees) को भी एक साल काम करने के बाद ग्रेच्युटी का हक मिलेगा। इससे कंपनियों की लागत और बढ़ सकती है।
Leave, Overtime- Working Hours Changes: छुट्टी, ओवरटाइम और काम के घंटों में बदलाव
नए नियमों के तहत छुट्टी नीति और ओवरटाइम नियम (Leave Policy और Overtime Rules) भी बदले हैं। अगर कोई कर्मचारी साल में 180 दिन काम करता है, तो वह वेतन सहित छुट्टी (Paid Leave) का हकदार होगा।
30 दिन से ज्यादा छुट्टी होने पर उसे भुनाना जरूरी होगा। वहीं ओवरटाइम के लिए नॉर्मल सैलरी से दोगुना पेमेंट देना होगा, लेकिन इसकी भी एक अवधि तय की गई है। इन नियमों के कारण कंपनियों को अपने कर्मचारियों की संख्या को रोल्स के हिसाब से वर्गीकृत करना पड़ेगा, ताकि सही तरीके से अनुपालन किया जा सके।
ESIC और bonus पर असर
वेतन संरचना बदलने से Employees’ State Insurance Corporation (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) और बोनस पात्रता पर भी असर पड़ेगा। पहले ESIC सकल वेतन पर आधारित था, लेकिन अब वेतन के आधार पर गणना होगी। इससे कुछ कंपनियों में ESIC कवरेज बढ़ सकता है, जबकि कुछ मामलों में बदलाव अलग-अलग हो सकता है।
HR सिस्टम और अनुपालन में बड़े बदलाव
नए Labour Codes सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव संसाधन नीतियां (HR Policies) में भी बड़े बदलाव की जरूरत होगी। कंपनी को कार्य के घंटे, छुट्टी के नियम, सुरक्षा मानक और दूरस्थ कार्य नीतियां (Remote Work Policies) अपडेट करनी होंगी। इसके अलावा डिजिटल अनुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमेंऑनलाइन रजिस्टर और वास्तविक समय की निगरानी शामिल है। 300 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों को स्थायी आदेश तैयार करने होंगे या सरकार के मॉडल नियम अपनाने होंगे।
कुल मिलाकर क्या बदलेगा?
ये नए श्रम संहिता प्रणाली अधिक संरचित और पारदर्शी है बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। इससे वर्कर्स की सुरक्षा बढ़ेगी और नियम ज्यादा साफ होंगे। लेकिन दूसरी तरफ, कंपनियों के लिए अनुपाल का बोझ बढ़ेगा और लागत भी बढ़ सकती है। जो कंपनियां समय रहते अपने HR सिस्टम, पेरोल स्ट्रक्चर (Payroll Structure) और अनुपालन प्रक्रिया को अपडेट कर लेंगी, उनके लिए इन बदलावों को प्रबंधित करना आसान रहेगा।
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