BCCI का बड़ा फैसला, अचानक बदल गया IPL 2026 का शेड्यूल, अब कब और कहां होंगे मुकाबले?
इस साल मानसून कमजोर रहेगा, अल नीनो का असर: करीब 80 सेमी बारिश का अनुमान, सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है
नई दिल्ली2 मिनट पहले
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इस साल बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून सीजन के दौरान देश में करीब 80 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है, जबकि 1971-2020 के आधार पर औसत बारिश करीब 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।
IMD ने पिछले आठ साल में पहली बार मानसून के सामान्य से कम रहने की बात कही है। लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के मध्य हिस्सों, दक्षिण ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु को छोड़कर देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस साल देश में कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का करीब 92% रहने का अनुमान है, जिसे सामान्य से कम कैटेगरी में रखा गया है।
वहीं, दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल तट पर पहुंच सकता है। इसके बाद यह आगे बढ़ते हुए भोपाल सहित मध्य भारत में 15 से 20 जून के बीच दस्तक देगा।

अल नीनो से मानसून में हल्की देरी संभव
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून के आसपास अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। यह आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करता है, जिससे बारिश में कमी और ब्रेक की स्थिति बन सकती है।
1951 के बाद से अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है। इनमें से 10 बार देश में सामान्य से कम या कमजोर बारिश दर्ज की गई, जबकि सिर्फ 6 मौकों पर यह पैटर्न अलग रहा।
हालांकि, सीजन के आखिर (सितंबर) में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के पॉजिटिव फेज में आने की संभावना है। यह स्थिति आमतौर पर बारिश को बढ़ाती है, जिससे अल नीनो के असर की कुछ भरपाई हो सकती है।
अल नीनो और ला नीना क्लाइमेट (जलवायु) के दो पैटर्न होते हैं-
अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है।
ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है।

पिछले साल 8 दिन पहले आया था मानसून
पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।
इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। अल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है।
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरल पहुंचा था।
आम आदमी के लिए 9 बड़ी बातें…
- देश में कुल बारिश का करीब 75% हिस्सा मानसून के दौरान होता है, जो सिंचाई, पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है।
- करीब 64% आबादी कृषि पर निर्भर है। सिर्फ 55% खेती योग्य जमीन ही सिंचाई से कवर है।
- कम बारिश का असर खरीफ सीजन की बुवाई, फसल उत्पादन और कुल कृषि गतिविधियों पर पड़ेगा, जिससे किसानों की लागत और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं।
- बारिश कम होने से उत्पादन घट सकता है, जिसका असर सप्लाई पर पड़ेगा और इससे सब्जियों, दालों सहित खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- खेती कमजोर रहने पर गांवों में आय कम हो सकती है, जिससे ग्रामीण बाजार में खर्च और मांग दोनों प्रभावित होंगे।
- ग्रामीण मांग में कमी आने पर ट्रैक्टर और टू-व्हीलर जैसे वाहनों की बिक्री पर भी असर पड़ने की संभावना है।
- अगर बारिश कम रहती है तो डैम और जलाशयों का जलस्तर सामान्य से नीचे रह सकता है, जिससे आगे चलकर पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
- कम बारिश और ज्यादा गर्मी की स्थिति में बिजली की खपत बढ़ेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तापमान ज्यादा रहता है।
- IMD मानसून को लेकर मई के आखिरी सप्ताह में दूसरा और ज्यादा विस्तृत पूर्वानुमान जारी करेगा, जिससे स्थिति और साफ होगी।
इस साल मानसून कमजोर रहेगा, एल नीनो का असर: करीब 80 सेमी बारिश का अनुमान, सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है
नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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भारत मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। वहीं दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल तट पर पहुंच सकता है। इसके बाद यह आगे बढ़ते हुए भोपाल सहित मध्य भारत में 15 से 20 जून के बीच दस्तक देगा।
पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।
इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। एल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है।

इस साल कम बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जबकि 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर लॉन्ग पीरियड एवरेज 87 सेंटीमीटर है।
IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस साल देश में कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरे का करीब 92% रहने का अनुमान है, जिसे सामान्य से कम कैटेगरी में रखा गया है।
क्या होता है लॉन्ग पीरियड एवरेज
मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) को 87 सेमी (870 मिमी) निर्धारित किया है। इसका मतलब है कि अगर किसी साल की बारिश 87 सेमी से ज्यादा होती है, तो उसे सामान्य से अधिक माना जाता है। अगर कम हो तो कमजोर मानसून माना जाता है।
एल नीनो से मानसून में हल्की देरी संभव
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून के आसपास एल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। यह आमतौर पर भारत में मानसून को कमजोर करता है, जिससे बारिश में कमी और ब्रेक की स्थिति बन सकती है।
हालांकि, सीजन के आखिर (सितंबर) में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के पॉजिटिव फेज में आने की संभावना है। यह स्थिति आमतौर पर बारिश को बढ़ाती है, जिससे एल नीनो के असर की कुछ भरपाई हो सकती है।
अल नीनो और ला नीना क्लाइमेट (जलवायु) के दो पैटर्न होते हैं-
अल नीनो: इसमें समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ जाता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है।
ला नीना: इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है।
1972 में सबसे देरी से केरल पहुंचा था मानसून
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरल पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरल पहुंचा था।
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नोएडा में फैक्ट्री कर्मचारियों ने क्यों बवाल मचाया?: 4 दिन पहले हरियाणा में 35% सैलरी बढ़ी, UP के वर्कर्स की डिमांड क्या है? – Uttar Pradesh News
यूपी में नोएडा और ग्रेटर नोएडा का इंडस्ट्रियल इलाका सोमवार को अचानक उबल उठा। 9 अप्रैल से जारी फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए।
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गुस्साए कर्मचारियों ने 13 इलाकों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की। पुलिस के कई वाहनों में आग लगा दी और पत्थरबाजी की। बवाल की वजह से नेशनल हाईवे-9 पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे दफ्तर जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे। सीएम योगी तक को शांति की अपील करनी पड़ी।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर हिंसा क्यों भड़की, हरियाणा कनेक्शन क्या है और कहां चूक हुई? पढ़िए रिपोर्ट…
सबसे पहले नोएडा में हिंसा भड़कने की वजह समझिए…
नोएडा के फैक्ट्री कर्मचारियों में गुस्से की मुख्य वजह पड़ोसी राज्य हरियाणा का एक फैसला है। 9 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैक्ट्री कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में 35% बढ़ोतरी करने का फैसला लिया। 10 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी किया। जैसे ही ये खबर नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में फैली, यहां के कर्मचारी भी सैलरी बढ़ाने की मांग करने लगे।

हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाए जाने की सूचना दी थी।
हरियाणा और यूपी में कर्मचारियों की सैलरी में कितना अंतर?
हरियाणा- अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,275 से बढ़ाकर 15,220 रुपए, अर्द्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12,430 से बढ़ कर 16,780 रुपए और कुशल श्रमिकों का वेतन 13,704 से बढ़ कर 18,500 रुपए किया गया। उच्च कुशल का वेतन 14,389 से 19,425 रुपए किया । यह बढ़ोतरी लगभग 35 प्रतिशत है।
उत्तर प्रदेश (नोएडा)- यहां अनस्किल्ड वर्करों को लगभग 11,313 रुपए की सैलरी ही मिल रही है।
दैनिक मजदूरी- हरियाणा में रोजाना मजदूरी 580 से 750 रुपए तक पहुंच गई है, जबकि नोएडा में केवल 435 से 535 रुपए के बीच है।

वर्करों की 5 मांगें जिससे कंपनियां बच रहीं
फैक्ट्री कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते दामों के बीच मौजूदा सैलरी में गुजारा करना नामुमकिन है। ऐसे में वर्करों ने 5 मांगें उठाई हैं।
1. सैलरी बढ़ोतरी- हरियाणा की तरह पर यूपी में भी न्यूनतम सैलरी में कम से कम 35% बढ़ाई जाए।
2. ओवरटाइम का डबल पैसा- नए श्रम नियमों के हिसाब से अगर कर्मचारी एक्स्ट्रा काम करता है, तो उसे दोगुनी दर से पेमेंट हो।
3. सैलरी स्लिप और टाइम पर भुगतान- हर महीने की 10 तारीख तक सैलरी बैंक खाते में आए। सैलरी स्लिप अनिवार्य रूप से दी जाए।
4. साप्ताहिक छुट्टी- सप्ताह में एक दिन की छुट्टी मिले। अगर छुट्टी के दिन काम लिया जाए, तो उसका भी डबल पैसा मिले।
5. बोनस का सीधा पेमेंट- बोनस सीधे बैंक खाते में जमा हो, न कि बिचौलियों या ठेकेदारों के जरिए वर्कर को मिले।

गुस्साए फैक्ट्री वर्करों ने इलाके में आम लोगों की गाड़ियो को भी निशाना बनाया है।
अब जानिए क्या कहते हैं श्रम कानून?
वर्कस्पेस पर सिक्योरिटी- वर्कर को काम करने के लिए सुरक्षित और साफ माहौल मिले।
काम के तय घंटे- एक निश्चित समय से ज्यादा काम कराने पर ‘ओवरटाइम’ देना जरूरी है।
PF और ESI- सैलरी से कटने वाले प्रॉविडेंट फंड (PF) और बीमा (ESI) का लाभ सही समय पर मिले।
मनमानी कटौती पर रोक- बिना किसी ठोस वजह से सैलरी काटना गैर-कानूनी है।

हिंसा काबू करने के लिए नोएडा के कई इलाकों में रैफिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है।
प्रशासन ने सहमति दी, इंडस्ट्री मालिक तैयार नहीं थे
- हरियाणा में 7 अप्रैल को फैक्ट्री कर्मचारियों ने सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। नोएडा में भी फैक्ट्री कर्मचारी 9 अप्रैल से प्रदर्शन करने लगे। प्रशासन की ओर से समझौता और मांगों सहमति बनने की बात कही गई थी, लेकिन इसमें इंडस्ट्री के मालिकों की सहमति नहीं थी।
- जब तक इडस्ट्री के मालिक न्यूनतम मजदूरी देने, आठ घंटे तक काम कराने, ओवरटाइम देने, नाइट ड्यूटी अलाउंस नियमानुसार देने जैसी मांगों पर सहमत नहीं होंगे, तब तक प्रशासन, श्रम और इंडस्ट्री डिपार्टमेंट से समझौते का कोई औचित्य नहीं था। स्थानीय श्रमिकों ने करीब तीन चार महीने पहले स्थानीय श्रम उपायुक्त से भी इस मुद्दे पर बात की थी, श्रम उपायुक्त ने भी मांगों को पूरी कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन बात नहीं बनी। श्रम उपायुक्त की ओर से इस संबंध में जिलाधिकारी को भी अवगत कराया गया था।
- प्रदर्शन में अभी तक कोई बड़ा संगठन सामने नहीं आया। लेकिन शासन को सूचना है कि सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस के कुछ पदाधिकारी इसे आंदोलन को पर्दे के पीछे से समर्थन कर रहे हैं। आंदोलन का अभी तक कोई राजनीतिक कनेक्शन सामने नहीं आया है।
अब पिछले 3 दिन का पूरा घटनाक्रम समझिए…
10 और 11 अप्रैल- होजरी कॉम्प्लेक्स और सूरजपुर-दादरी रोड पर करीब एक हजार फैक्ट्री वर्करों ने प्रदर्शन शुरू किया। पुलिस के लाठीचार्ज से तनाव बढ़ गया। मामला लखनऊ तक पहुंचा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 24 घंटे में मामला सुलझाने के निर्देश दिए।
12 अप्रैल- नोएडा की DM मेधा रूपम और श्रम विभाग के अधिकारियों ने इंडस्ट्री मालिकों के साथ बैठक की। प्रशासन ने कंपनियों को सख्त निर्देश दिए कि वे श्रम कानूनों का पालन करें और समय पर सैलरी दें। कंट्रोल रूम भी बनाया गया।
13 अप्रैल- आश्वासनों से फैक्ट्री वर्कर संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि मुख्य मांग यानी सैलरी बढ़ाने को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। सोमवार सुबह हजारों वर्कर सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन हिंसक हो गया।
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नोएडा में सोमवार सुबह सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन कवरेज कर रहे पत्रकारों पर पुलिस ने लाठियां चला दीं। भास्कर रिपोर्टर साकेत आनंद से भी पुलिस ने मारपीट की है। पूरी खबर पढ़ें…
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नोएडा पुलिस ने भास्कर रिपोर्टर से मारपीट की: कर्मचारियों का प्रदर्शन कवर कर रहे थे, DCP ने एक्शन नहीं लिया, पुलिसवाले का बचाव करती दिखीं
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नोएडा38 मिनट पहले
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नोएडा में सोमवार सुबह सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन कवरेज कर रहे पत्रकारों पर पुलिस ने लाठियां चला दीं। भास्कर रिपोर्टर साकेत आनंद से भी पुलिस ने मारपीट की है। पत्रकारों ने DCP नोएडा सेंट्रल सव्या गोयल से घटना पर नाराजगी जताई और आरोपी पुलिसकर्मी जितेंद्र सिंह के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।
DCP गोयल पत्रकारों ने पत्रकारों की बात तो पूरी सुनी, लेकिन कुछ भी एक्शन नहीं लिया। वह पुलिसवालों का बचाव करती नजर आईं। इस पर नाराज पत्रकारों ने कहा- आप एक्शन नहीं लेती हैं तो हम पुलिस वाले के खिलाफ FIR दर्ज कराएंगे।

पुलिसकर्मी जितेंद्र सिंह ने भास्कर रिपोर्टर साकेत आनंद से मारपीट की।

घटना के वक्त DCP नोएडा सेंट्रल सव्या गोयल वहां मौजूद थीं। पत्रकारों ने उनसे एक्शन लेने के लिए कहा, लेकिन वह पुलिसकर्मी का बचाव करती नजर आईं।
घटनाक्रम का पूरा वीडिया देखिए…
भास्कर रिपोर्टर उदय भटनागर ने बताया आंखों देखा हाल
मैं और मेरे साथ साकेत आनंद दैनिक भास्कर के लिए नोएडा में मजदूरों का जो प्रोटेस्ट चल रहा है उसे कवर करने आए थे। कई सेक्टर में ये प्रोटेस्ट चल रहा है। मैं सेक्टर 85 में पहुंचा। यहां निनजिन कंपनी है। उसके बाहर हम प्रोटेस्ट कवर कर रहे थे। यहां पुलिस आई और कंपनी के अंदर जो अधिकारी थे उन्हें बाहर निकालने आई। उसी समय पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। हम उसकी रिकार्डिंग कर रहे थे। उन्होंने मजदूरों को गाड़ी में भरा। साकेत आनंद के ऊपर भी लाठी चलाई गई।
साकेत आनंद ने बताया कि इस पूरे इलाके में सुबह से प्रोटेस्ट चल रहा है। लगातार 3-4 दिन से प्रोटेस्ट चल रहा है। आज ILGIN कंपनी के बाहर प्रोटेस्ट चल रहा है। इसके सामने प्रोटेस्ट हुआ। बाहर आगजनी और तोड़फोड़ हुआ। जब हम वहां खड़े थे तब पुलिस आई। पपुलिस के लिए गेट खोला गया। अधिकारी अंदर फंसे थे। पुलिस के बनाए सेफ पैसेज से उन्हें बाहर लाया गया।
पुलिस ने वर्कर्स से बात करने की कोशिश की और हम जब उसे रिकार्ड कर रहे थे तो मीडिया को रिकार्ड करने से रोकागया। यानी जो मजदूरों से बात वो कर रहे थे उसे रिकार्ड करने से रोका जा रहा था। वर्कर्स बोल रहे थे कि हम नहीं थे फिर भी उनके साथ धक्का-मुक्की हुई। लाठीचार्ज शुरू कर दिया गया। मैं भी वहीं था मेरे ऊपर भी जितेंद्र कुमार नाम के पुलिस कर्मी ने लाठी चला दी।
मैंने उनके बोला कि मेरे पास आई कार्ड है मैं मीडिया से हूं। उसके बावजूद वो खींचातानी करते रहे। हमारी साथी जिस्ट की पत्रकार थी उनके साथ भी खींचतान की गई। उसके बाद पुलिस ने लगातार जवाब मांगा गया कि आप माफी मांगिये ये जिस पुलिसकर्मी ने लाठी चलाई उसके खिलाफ एक्शन लीजिए, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ किया नहीं और लगातार वर्कर्स को वैन में ले जाया गया।
पता नहीं कहां ले जाया गया । हम सुबह से उसे कवर कर रहे थे जिस पुलिसकर्मी ने लाठी चलाई उसने भी हमें सुबह से देखा था कि हम मीडिया से हैं। हम कवर कर रहे हैं। पुलिसवाले भी हमसे बात कर रहे थे। लाठी चार्ज में भी हम दूर थे लेकिन फिर भी पुलिसकर्मी भागते हुए आया और सबसे पहले मीडियाकर्मी पर लाठी चलाई। लाठी चलाकर सबसे पहले गाड़ी की तरफ भागा।
लाठी चलाने के बाद बाकी पुलिसवाले इधर उधर मारपीट करते रहे,लेकिन जिस पुलिसवाले ने लाठी मारी वो गाड़ी में गया और वहां जो लोग थे मजदूरों से भी मारपीट करने लगा। हम मीडिया से हैं ये बताने के बावजूद वो कोशिश करते रहे कि हम कवरेज न करें। जो एक मैडम थी वो भी लगातार बोल रही थी कि आपलोग वीडियो बंद करें और यहां से जाइये।

प्रदर्शन कर रहे वर्कर्स को घसीटकर बस में डालकर हिरासत में लिया गया है। फैक्ट्री के लोगों को निकालने के लिए वर्कर्स से मारपीट भी की गई है।
हिंसक प्रदर्शन की तस्वीरें देखिए…

नोएडा में प्रदर्शनकारियों ने एक कार शोरूम में आग लगा दी।

नोएडा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने फ्लैग मार्च किया।

नोएडा के फेज-2 में मदरसन कंपनी के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी हिंसक हो गए।

गुस्साए कर्मचारियों ने पुलिस की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की। उसे पलट दिया।

कर्मचारियों ने पुलिस बल पर पत्थरबाजी की। काफी मशक्कत के बाद भीड़ को काबू किया जा सका।

गुस्साए लोगों को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

कर्मचारियों ने नोएडा सेक्टर 15 और 62 में सड़क जाम की। बीच सड़क पर बैठकर कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी की।

नोएडा सेक्टर-57 में कर्मचारियों ने कंपनियों के दफ्तर में तोड़फोड़ की।
नोएडा में हिंसक प्रदर्शन, 50 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़: कर्मचारियों ने 10 गाड़ियां फूंकी, पथराव नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन सोमवार सुबह हिंसक हो गया। अलग-अलग इलाकों में गुस्साए कर्मचारियों ने 50 से ज्यादा फैक्ट्रियों में पथराव किया। तोड़फोड़ की। हाथ में डंडे लेकर सैकड़ों पर कर्मचारी जुलूस निकाल रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, वो रुकेंगे नहीं।
सबसे पहले हालात फेज-2 इलाके में खराब हुए। सुनवाई न होने से कर्मचारी उग्र हो गए। पथराव कर दिया। कई गाड़ियों और बसों को आग लगा दी। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उनकी गाड़ी पलट दी। हालात बिगड़े तो कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने उन पर पथराव कर दिया। फिर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। पूरी खबर पढ़ें…



