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Flight Ticket Prices: ईरान संकट के बीच क्‍या बढ़ने वाले हैं एयर टिकट के दाम? एयरलाइंस का आया बड़ा बयान


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oi-Bhavna Pandey

Flight Ticket Prices:भारत में हवाई यात्रा करने वाले लोगों जल्द ही हवाई टिकटों की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और चेतावनी दी है कि एयरलाइंस इस बढ़ते बोझ से निपटने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

बता दें वैश्विक तेल के दाम सोमवार को लगभग $120 प्रति बैरल तक पहुँचने के बाद, $93 के आसपास आने के बावजूद, विमानन उद्योग एक कठिन दौर से गुजर रहा है।

Flight Ticket Prices

महंगे हो सकते हैं हवाई टिकट

स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती हैं तो भारतीय एयरलाइंस के लिए संचालन करना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि एयरलाइंस के खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा ईंधन का होता है और मौजूदा कीमतों पर इसे संभालना कंपनियों के लिए “असहनीय” हो गया है। ऐसे में साफ संकेत है कि आने वाले महीनों में हवाई टिकट महंगे हो सकते हैं, क्योंकि एयरलाइंस बढ़ती लागत को लंबे समय तक खुद वहन नहीं कर सकतीं।

पहले ही बढ़ चुके है हवाई टिकट के दाम

एयरलाइंस ने लंबी दूरी की उड़ानों के किराए में करीब 15% तक बढ़ोतरी भी कर दी है और आगे और बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा। छुट्टियां मनाने वाले परिवारों, तीर्थ यात्रा की योजना बनाने वालों और बिजनेस ट्रैवल करने वालों को पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। कई कंपनियां लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की यात्राओं में कटौती भी कर सकती हैं।

एयरलाइंस की योजनाओं पर असर

बढ़ती ईंधन कीमतों का असर एयरलाइंस की भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ सकता है। नई उड़ानें शुरू करने, नए विमान खरीदने या नए रूट जोड़ने की योजनाएं धीमी पड़ सकती हैं। महामारी के बाद जिस तेजी से विमानन क्षेत्र उबरने की कोशिश कर रहा था, उस पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

सिर्फ भारत ही नहीं, एशिया भी दबाव में

यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। एशिया की कई एयरलाइंस भी ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रही हैं। यूरोप और अमेरिका की तुलना में एशियाई कंपनियों की ईंधन हेजिंग रणनीतियां कमजोर मानी जाती हैं, इसलिए अचानक कीमत बढ़ने का असर यहां ज्यादा महसूस होता है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को भी तेल की कीमतों में उछाल की बड़ी वजह माना जा रहा है।

आम यात्रियों की टूटेगी कमर

बढ़ती तेल कीमतों का असर सिर्फ एयरलाइंस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बस किराए से लेकर रोजमर्रा के सामान तक सब महंगा हो सकता है। लेकिन विमानन क्षेत्र में इसका असर सबसे पहले और सबसे साफ दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर, जो टिकट पिछले साल करीब ₹5,000 में मिल जाता था, वह जल्द ही ₹6,000 या उससे ज्यादा का हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को आने वाले समय में महंगे टिकट, कम छूट और कुछ रूटों के विस्तार में धीमापन देखने के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।



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Love Story: IFS की ट्रेनिंग के दौरान हिंदू लड़की को दिल दे बैठे थे Hardeep Puri, शादी लिए मिली थी धमकी


India

oi-Ankur Sharma

Hardeep Singh Puri Love Story: मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत में एलपीजी संकट का मामला गर्मा गया है, देश के कई शहरों में इसका असर देखने को मिल रहा है तो वहीं कई नेताओं ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस बारे में लेटर भी लिखा है। तो वहीं पीएम मोदी से भी पुरी की मुलाकात हुई है, हालांकि दो दिन पहले ही केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा था कि ‘हालात पर नजर है लेकिन अभी स्थिति कंट्रोल में हैं।’

फिलहाल इस वजह को लेकर हरदीप सिंह पुरी लगातार चर्चा में बने हुए हैं और सोशल मीडिया पर ट्रेंड भी कर रहे हैं। आपको बता दें कि देखने में कड़क मिजाज और बेबाकी से अपनी राय रखने वाले हरदीप सिंह पुरी असल जिंदगी में भी बेहद ही नरम दिल के इंसान हैं।

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लेकिन बचपन से ही वो काफी जिद्दी और शरारती रहे हैं। अपने जीवन के मजेदार लम्हों के बारे में खुद हरदीप सिंह ने ही इंडिया टीवी के मशहूर शो ‘आप की अदालत’ में बताया था, जहां उन्होंने अपनी लव लाइफ के भी बारे में खुलकर बातें की थी।

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Hardeep Singh Puri की पत्नी का नाम लक्ष्मी मुर्देश्वर

आपको बता दें कि 15 फरवरी 1952 को दिल्ली के दरियागंज में जन्में हरदीप भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त राजनयिक हैं। उनकी पत्नी का नाम लक्ष्मी मुर्देश्वर है, जो कि संयुक्त राष्ट्र में पूर्व सहायक महासचिव और यूएन महिला की पूर्व उप कार्यकारी निदेशक रह चुकी हैं। देखने में बेहद हसीन लक्ष्मी से हरदीप सिंह की पहली मुलाकात मसूरी अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान हुई थी।

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मंसूरी में ट्रेनिंग के दौरान लक्ष्मी से हुई थी Hardeep Singh Puri की मुलाकात

उस वक्त हरदीप सिंह की उम्र मात्र 21 साल थी और वो आईएफएस पास करके ट्रेनिंग के लिए वहां गए थे वहां पहले से ही लक्ष्मी भी ट्रेनिंग ले रही थीं। कहते हैं हरदीप ने उन्हें देखते ही दिल दे दिया था। अपनी मोहब्बत के बारे में बताते हुए हरदीप सिंह ने शो में कहा था कि ‘ अजी मोहब्बत तो फिल्मों में होती है, असल लाइफ में तो कुछ और ही होता है, हां ये सच है कि हम मसूरी में मिले थे या यूं कह लीजिए जब वी मेट हुए थे लेकिन सच बताएं तो आगे का रास्ता आसान नहीं था।’

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Love Story: ‘दोनों लोग नौकरी करोगे तो घर कौन संभालेगा’

‘एक सिख और एक हिंदू ( महाराष्ट्र) की शादी तब ईजी नहीं थी, मेरी मां ने कहा था कि ‘दोनों लोग नौकरी करोगे तो घर कौन संभालेगा? क्योंकि वो तो हाउस वाइफ थीं , फिर उन्हे समझाया गया,हालांकि वो बाद में समझ गईं थीं लेकिन इसके बाद मेरे पापा को भी लगा था कि ये रिश्ता कैसे आगे चलेगा? एक दिन वो बहुत ज्यादा इमोशनल हो गए थे तो मेरे तीनों मामा से कहा कि वो लोग मुझे समझाएं। सबसे पहले मेरे पास बड़े मामा आए और उन्होंने कहा कि ‘वो लोग दाल में चीनी मिलाकर खाते हैं, ऐसे कैसे रिश्ता चलेगा?’

Love Story

Hardeep Singh Puri ki Prem Kahani: ‘शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत होगी’

‘तो इस पर मैंने कहा था कि ‘ दाल में चीनी गुजराती खाते हैं, फिर एक ने कहा ‘लड़की तो समझदार लगती है,पढ़ी लिखी है ,घर संभाल लेगी।’ तो इस तरह की बातें तब हुई थीं। केवल मेरे साइड नहीं बल्कि लक्ष्मी की तरफ भी, इनके पिता जो कि ‘लॉ सेक्रेटरी’ थे, ने कहा था कि ‘ये शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत होगी, जिससे आगे चलकर दिक्कत ना आए।’

साल 1975 में हुई Hardeep Singh Puri की लक्ष्मी से शादी

लेकिन तमाम रूकावटों और बाधाओं के बावजूद दोनों ने साल 1975 में शादी की और इनका वैवाहिक जीवन सफल है, इन्हें शादी से दो बेटियां हैं। शो में पुरी ने ये भी बताया था कि ‘लक्ष्मी पूरी तरह से हमारे घर में रच-बस गईं और आपको जानकर हैरत होगी उन्हें गुरुमुखी आती है लेकिन मैं नहीं पढ़ पाता, उन्होंने ये सब मेरी मां से सीखा, दोनों की एक खास ट्यूनिंग थी। आज की तारीख में वो मुझसे ज्यादा सिख हैं। वो मेरी लाइफ में हैं ये ऊपरवाले की मेहर है।’



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T20 World Cup: कब और कहां होगा अगला टी20 विश्व कप? किन 8 टीमों को मिली डायरेक्ट एंट्री


Cricket

oi-Naveen Sharma

Next T20 World Cup in Which Country: टी20 वर्ल्ड कप 2026 की ऐतिहासिक जीत के बाद अब क्रिकेट प्रेमियों की नजरें भविष्य के मुकाबलों पर टिक गई हैं। टीम इंडिया की खिताबी हैट्रिक की उम्मीदों और अगले महाकुंभ की तैयारियों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर खेल गलियारों तक बस एक ही चर्चा है कि आखिर अगला टी20 वर्ल्ड कप कब और कहां होगा।

क्रिकेट प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि टी20 वर्ल्ड कप 2028 की मेजबानी इस बार संयुक्त रूप से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को सौंपी गई है। 2028 टी20 वर्ल्ड कप के शेड्यूल के मुताबिक यह टूर्नामेंट 21 अक्टूबर 2028 से शुरू होकर 19 नवंबर 2028 तक चलेगा।

t20 world cup

मैच के समय की बात करें तो भारतीय दर्शकों को सुबह जल्दी उठने या दोपहर की शिफ्ट में मैचों का आनंद लेने के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और भारत के समय में काफी अंतर रहता है। हालांकि फ़िलहाल टूर्नामेंट में दो सालों का समय बाकी है।

कुल कितनी और कौनसी टीमों को एंट्री

2028 टी20 वर्ल्ड कप की टीमों की बात करें तो इस बार भी 20 टीमें हिस्सा लेने वाली हैं। इसमें से 12 टीमों ने पहले ही अपनी जगह पक्की कर ली है। मेजबान होने के नाते ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को सीधा प्रवेश मिला है, जबकि 2026 के विश्व कप में सुपर-8 तक पहुंचने वाली भारत, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका जैसी दिग्गज टीमें पहले ही ही क्वालीफाई कर चुकी हैं।

भारत के लिए काफी खास है टूर्नामेंट

बाकी बची 8 टीमों के लिए 2028 टी20 वर्ल्ड कप क्वालीफायर मुकाबले खेले जाएंगे, जहां एसोसिएट देशों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिलेगी। भारत के लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी खास है क्योंकि उसी साल क्रिकेट ओलंपिक में भी वापसी कर रहा है और भारतीय टीम वर्ल्ड कप के साथ-साथ ओलंपिक गोल्ड पर भी निशाना साधना चाहेगी। क्रिकेट के दीवानों के लिए अगले चार-पांच साल काफी रोमांचक होने वाले हैं क्योंकि हर दो साल में दुनिया को एक नया टी20 चैंपियन मिलेगा।



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Iran-Israel War के बीच बिगड़ी Putin की तबीयत? सांस लेने में तकलीफ वाले VIDEO पर रूस का क्या सच?


International

oi-Divyansh Rastogi

Russian President Putin Health Video Leak: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (73) की सेहत को लेकर फिर से अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है। ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच, जहां मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और रूस की भूमिका चर्चा में है, क्रेमलिन के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर 8 मार्च (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस) के लिए पुतिन का एक अनएडिटेड वीडियो पोस्ट हुआ, जिसमें वे बार-बार खांसते, गला साफ करते और सांस लेने में तकलीफ महसूस करते दिखे।

वीडियो कुछ मिनटों में ही हटा दिया गया, और क्रेमलिन ने इसे ‘गलती’ बताकर खारिज कर दिया। लेकिन इस घटना ने दुनिया भर में सवाल खड़े कर दिए-क्या पुतिन की तबीयत वाकई बिगड़ रही है, या यह महज एक छोटी सी खांसी है? आइए इस पूरी घटना को डिटेल में समझते हैं-वीडियो क्या दिखाता है, क्रेमलिन का जवाब क्या है, और पुरानी स्वास्थ्य अफवाहों से इसका क्या कनेक्शन है…

Vladimir Putin Health Video Leak

घटना क्या हुई: महिला दिवस का ‘रॉ’ वीडियो लीक

8 मार्च 2026 को, क्रेमलिन ने पुतिन का पूर्व-रिकॉर्डेड संदेश (pre-recorded greeting) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के लिए जारी किया। लेकिन गलती से अनएडिटेड (raw) वर्जन पोस्ट हो गया, जो लगभग 6 मिनट लंबा था। इसमें पुतिन पहले प्रयास में बोलते-बोलते रुक जाते हैं, गले की तरफ इशारा करते हैं, और बार-बार खांसते हुए दिखते हैं।

वीडियो में पुतिन कहते हैं (मॉस्को टाइम्स और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार) कि आप जानते हैं, मैं यह बात फिर से दोहराता हूं, क्योंकि… मेरा गला थोड़ा खराब है। जी हां, थोड़ा खराब है। मुझे लगभग खांसी आने लगी थी। मैंने आज बहुत बातें की हैं।’

वे लगभग 30 सेकंड तक खांसते रहते हैं, गला साफ करते हैं, और फिर रिकॉर्डिंग दोबारा शुरू करने का इशारा करते हैं। यह वीडियो क्रेमलिन के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर कुछ मिनट (रिपोर्ट्स में 4 मिनट तक) लाइव रहा, फिर हटा दिया गया। इसके बाद एक छोटा, एडिटेड वर्जन (बिना खांसी के) अपलोड किया गया, जिसमें सांस की तकलीफ या खांसी के कोई लक्षण नहीं हैं।

क्रेमलिन का आधिकारिक जवाब: ‘सिर्फ गलती थी’

क्रेमलिन ने इस वीडियो को ‘सप्ताहांत की गलती’ (weekend mistake) बताया है। क्रेमलिन प्रेस पूल के रिपोर्टर अलेक्जेंडर युनाशेव ने टेलीग्राम पर लिखा: ‘राष्ट्रपति प्रशासन इस पर कोई असाधारण जांच नहीं कर रहा। कोई सजा नहीं दी जाएगी।’ प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ‘यह एक तकनीकी चूक थी। हम भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाएंगे।’

क्रेमलिन समर्थक ब्लॉगर लेव वर्शिनिन ने इसे ‘विद्रोह जैसा’ बताते हुए कहा कि क्रेमलिन की सख्त प्रक्रिया में ऐसी गलती असंभव है-शायद जानबूझकर लीक किया गया ताकि पुतिन की इमेज कमजोर हो। लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे ‘एक्सीडेंट’ ही माना गया है।

Looks like someone is getting fired… Several outlets say the Kremlin accidentally published this unedited video of Vladimir Putin coughing and asking to re-record his 8 March address: “I’ve been talking too much,” he says. (Nothing new tbh – he often coughs during speeches.) pic.twitter.com/jkr2galvy6

— Ben Tavener (@BBCBenTavener) March 8, 2026 “>

स्वास्थ्य अफवाहों का पुराना सिलसिला: क्या यह सिर्फ खांसी है?

पुतिन की सेहत पर अफवाहें सालों से चल रही हैं। क्रेमलिन हमेशा इन्हें ‘झूठ’ बताकर खारिज करता रहा है। लेकिन हाल की घटनाएं सवाल बढ़ाती हैं:-

  • नवंबर 2025: पुतिन एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे, जहां उनके हाथ सूजे हुए, नसें उभरी हुईं और कांपते हुए लग रहे थे। कई रिपोर्ट्स में इसे ‘दर्दनाक’ और ‘श्रिवेल्ड’ (सिकुड़ा हुआ) बताया गया। यूक्रेनी मीडिया पर्सनैलिटी Dmytro Gordon ने कहा कि ‘पुतिन के हाथों में कुछ गड़बड़ है-नसें फूली हुईं हैं।’
  • पिछली अफवाहें: कैंसर, पार्किंसंस रोग, या अन्य गंभीर बीमारियां-सभी को क्रेमलिन ने बार-बार नकारा है।
  • तुलना: 79 साल के डोनाल्ड ट्रंप की तरह, पुतिन भी अपनी ‘मजबूत’ इमेज बनाए रखना पसंद करते हैं। इसलिए कोई भी कमजोरी दिखना उनकी छवि के लिए बड़ा झटका है।

यह खांसी वाला वीडियो ईरान-इजरायल युद्ध के बीच आया है, जहां रूस की भूमिका (ईरान को सपोर्ट) पर दुनिया की नजर है। कुछ विश्लेषक कहते हैं कि अगर पुतिन की तबीयत कमजोर है, तो रूस की विदेश नीति पर असर पड़ सकता है। लेकिन कोई ठोस मेडिकल प्रूफ नहीं है-सिर्फ अफवाहें और यह वीडियो।

सच क्या है?

फिलहाल, क्रेमलिन इसे ‘सिर्फ गले में खराश’ और ‘बहुत बोलने’ की वजह से बता रहा है-कोई गंभीर बीमारी नहीं। वीडियो हटाना डैमेज कंट्रोल था, ताकि पुतिन की ‘सुपरमैन’ इमेज बनी रहे। लेकिन ईरान-इजरायल टेंशन के बीच यह घटना सवाल उठाती है-क्या रूसी नेता की तबीयत वाकई ठीक है?

क्रेमलिन ने हमेशा कहा है कि पुतिन पूरी तरह स्वस्थ हैं। अगले कुछ दिनों में कोई नया वीडियो या पब्लिक अपीयरेंस आएगा, तो स्थिति साफ होगी। अभी तक, यह सिर्फ एक ‘गले की खराश’ का मामला लगता है-लेकिन अफवाहों का बाजार गर्म है!





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IndiGo CEO Salary: इस्‍तीफा देने वाले Pieter Elbers को कितनी मिलती थी सैलरी? Net Worth उड़ा देगी होश


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oi-Bhavna Pandey

IndiGo CEO Salary: इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीटर एल्बर्स ने 10 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पीटर एल्‍बर्स के इस फैसले के बाद, कंपनी के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया अस्थायी रूप से एयरलाइन के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे जब तक नए सीईओ का चयन नहीं हो जाता है।

एल्बर्स पीटर का इंडिगो के सीईओ पद से इस्तीफा दिसंबर में एयरलाइन द्वारा झेले गए एक गंभीर परिचालन संकट के बाद हुआ है। उस अवधि में, बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द या बाधित हुईं, जिससे देश भर के विभिन्न हवाई अड्डों पर लगभग तीन लाख यात्री फंस गए थे।

IndiGo CEO Salary

सूत्रों के अनुसार व्यवधान से एयरलाइन को लगभग ₹2,000 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ, साथ ही इंडिगो एयरलाइंस की प्रतिष्ठा को भी गहरा धक्का लगा। DGCA ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को नोटिस भेजकर बड़े पैमाने पर उड़ानों के रद्द होने और यात्रियों को सही जानकारी न देने का कारण पूछा था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीटर एल्बर्स ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। जानिए इंडिगो के सीईओ पद से इस्‍तीफा देने वाले पीटर एल्‍बर्स को कितनी सैलरी मिलती थी और कितनी संपत्ति के मालिक हैं?

IndiGo CEO Salary

पीटर एल्‍बर्स ने 2022 में इंडिगो सीईओ पद संभाला था

एल्बर्स ने सितंबर 2022 में सीईओ का पद संभाला था और उन्होंने एयरलाइन की विस्तार योजनाओं में एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। एल्बर्स ने अपने इस्तीफे पत्र में कहा है कि वह “व्यक्तिगत कारणों से” पद छोड़ रहे हैं और उन्होंने अपनी नोटिस अवधि माफ करने का अनुरोध किया है। उन्होंने इंडिगो में अपने कार्यकाल को “एक सम्मान” बताया और कहा कि उन्हें एयरलाइन की विकास यात्रा में योगदान करने पर “गर्व है”।

पीटर एल्‍बर्ट का करियर क्‍या की है पढ़ाई?

विमानन क्षेत्र का 33 वर्षों का अनुभव रखने वाले पीटर का जन्‍म 11 मई 1970 को नीदरलैंड्स के शीडम शहर में हुआ था, शुरुआती पढ़ाई उन्होंने अपने शहर के डी सिंगेल-प्रिमो शीडम स्कूल से की। 1 जनवरी 1992 को केएलएम एयरलाइन में एयरक्राफ्ट लोडिंग सुपरवाइजर के तौर पर काम शुरू किया। तेजी से प्रमोशन बाद में वे जापान, ग्रीस और इटली में केएलएम के जनरल मैनेजर बने। इंडिगो से पहले पीटर ने दुनिया की शीर्ष एयरलाइन केएलएम (KLM) में काम किया। साल 2014 में उन्हें केएलएम का प्रेसिडेंट और सीईओ नियुक्त किया गया।

Peter Albert Salary इंडिगो सीईओ को कितनी मिलती है सैलरी?

इंडिगो जॉइन करने के बाद 2023 में उन्हें 67,150 परफॉरमेंस स्टॉक यूनिट्स (PSUs) प्राप्त हुए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹12.52 करोड़ थी। कंपनी में पीटर एल्‍बर्ट का सालाना वेतन करीब ₹5 करोड़ था वेतन, बोनस और PSUs मिलाकर, इंडिगो से उनकी कुल वार्षिक कमाई लगभग ₹17 करोड़ होती है।

Peter Albert Net Worth पीटर एलबर्ट की नेटवर्थ

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीटर एल्बर्स की कुल नेटवर्थ करीब $5 मिलियन (लगभग ₹45 करोड़) है। केएलएम में रहते हुए उन्हें लगभग €1.4 मिलियन सालाना मुआवजा मिलता था। केएलएम छोड़ने पर एल्बर्स को करीब ₹11.9 करोड़ मिले थे।



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वर्ल्ड कप जीत का जश्न या मजहब की जंग? हरभजन सिंह ने कीर्ति आजाद के बयान की उड़ाई धज्जियां


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oi-Naveen Sharma

Harbhajan Singh: वर्ल्ड कप की सुनहरी ट्रॉफी जब तिरंगे के साथ भारत आई, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा था। लेकिन इस गौरवशाली पल पर तब विवाद का साया पड़ गया जब पूर्व क्रिकेटर और नेता कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी को हनुमान मंदिर ले जाने पर सवाल खड़े कर दिए।

अब इस मामले में टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है। भज्जी ने कीर्ति आजाद के बयान को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया, बल्कि उन्हें यह तक याद दिला दिया कि एक खिलाड़ी का धर्म सिर्फ खेल होता है।

Harbhajan Singh

हरभजन सिंह ने सिखाया कीर्ति आजाद को पाठ

हरभजन सिंह ने एएनआई के एक इंटरव्यू में कीर्ति आजाद की क्लास लगाते हुए कहा कि बेहद दुख की बात है कि हमें अपने ही साथी क्रिकेटरों से ऐसी बातें सुननी पड़ रही हैं। ऐसा लग रहा है कि उनके लिए खेल से बढ़कर अब राजनीति हो गई है। इससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि वह खुद एक खिलाड़ी रह चुके हैं। पूरा देश वर्ल्ड कप की जीत मना रहा है, जश्न मना रहा है और आप राजनीति करने में व्यस्त हैं।

मजहब के नाम पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए हरभजन ने आगे कहा कि हमारे धर्म में सिखाया जाता है कि सभी धर्म एक समान हैं। भगवान अलग हो सकते हैं, लेकिन रास्ता एक ही है। अगर टीम के कुछ सदस्य मंदिर गए, या कोई मस्जिद या चर्च जाता है, तो इसमें गलत क्या है? यह उनकी अपनी आस्था और विश्वास है। आपको उनकी आस्था पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है।

इशान किशन ने भी दिया करारा जवाब

इससे पहले युवा विकेटकीपर बल्लेबाज इशान किशन ने भी कीर्ति आजाद की प्रतिक्रिया पर पूछे गए सवालों को बेवकूफी भरा करार दिया था। इशान ने साफ़ कहा था कि वर्ल्ड कप जीतने के बाद ऐसे निगेटिव सवालों का कोई मतलब नहीं रह जाता।





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IndiGo CEO Pieter Elbers Resigns: वो 5 गलतियां, जिसके कारण एल्बर्स ने दिया इस्तीफा? राहुल भाटिया की वापसी


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oi-Divyansh Rastogi

IndiGo CEO Pieter Elbers Resigns Reason: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने मंगलवार (10 मार्च 2026) को अचानक इस्तीफा दे दिया। कंपनी ने आधिकारिक बयान में कहा कि एल्बर्स ने ‘व्यक्तिगत कारणों’ से इस्तीफा दिया है और तत्काल प्रभाव से यह लागू हो गया। इंडिगो के सह-संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया अब अंतरिम रूप से कंपनी के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे, जब तक नया सीईओ नियुक्त नहीं हो जाता।

एल्बर्स का इस्तीफा तीन महीने पहले दिसंबर 2025 में हुए बड़े पैमाने पर परिचालन संकट के बाद आया है, जिसने इंडिगो की छवि को गहरा झटका दिया। हजारों उड़ानें रद्द हुईं, लाखों यात्री प्रभावित हुए, और DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने रिकॉर्ड जुर्माना लगाया। आइए, इस समझते हैं कि आखिर कौन सी 5 प्रमुख गलतियां थीं, जिन्होंने एल्बर्स को इस्तीफे तक पहुंचाया, और राहुल भाटिया की वापसी का क्या मतलब है?

Indigo CEO Pieter Elbers Resigns Reason

1. नए FDTL नियमों (पायलट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) के लिए अपर्याप्त तैयारी

दिसंबर 2025 में DGCA के नए नियम लागू हुए, जिनमें पायलटों के लिए रात की लैंडिंग सीमित की गई (6 से घटाकर 2 प्रति सप्ताह) और रेस्ट पीरियड बढ़ाया गया। यह सुरक्षा के लिए था, लेकिन इंडिगो ने पायलटों की भर्ती, ट्रेनिंग और रोस्टरिंग में पर्याप्त बदलाव नहीं किए। नतीजा:- पायलटों की कमी से उड़ानें रद्द हुईं।

  • प्रभाव: 3-5 दिसंबर 2025 में 2,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द, 1,800 से ज्यादा डिले। ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 20% से नीचे गिरा।
  • एल्बर्स की गलती: नियमों की जानकारी होने के बावजूद, महीनों पहले बैकअप प्लान नहीं बनाया। DGCA ने इसे ‘प्लानिंग, ओवरसाइट और रिसोर्स मैनेजमेंट में बड़ी चूक’ बताया और शो-कॉज नोटिस जारी किया।

2. प्रैट एंड व्हिटनी इंजन समस्या का असर नहीं संभाला

2015 से चल रही प्रैट एंड व्हिटनी (PW) इंजन की खराबी ने 70 से ज्यादा A320neo विमानों को ग्राउंडेड कर दिया। स्पेयर पार्ट्स की कमी और इंस्पेक्शन से डिलीवरी 2027 तक टली। एल्बर्स के कार्यकाल में यह समस्या और गंभीर हुई, लेकिन कंपनी ने बेड़े के उपयोग को ऑप्टिमाइज नहीं किया।

  • प्रभाव: पहले से ही बेड़ा कम, नए नियमों के साथ मिलकर कैस्केडिंग इफेक्ट हुआ।
  • एल्बर्स की गलती: अंतरराष्ट्रीय विस्तार (30से ज्यादा नए गंतव्य) पर फोकस करते हुए घरेलू नेटवर्क की स्थिरता पर कम ध्यान। 2023 में दिए 500 विमानों के ऑर्डर (50 अरब डॉलर) का फायदा अभी नहीं मिला।

3. मौसमी और तकनीकी चुनौतियों का गलत आकलन

दिसंबर में कोहरा, एयरपोर्ट कंजेशन, टेक्नोलॉजी ग्लिच (A320 सॉफ्टवेयर अपडेट) और विंटर शेड्यूल चेंजेस को कंपनी ने कम आंका। एल्बर्स ने इनको ‘माइनर’ बताया, लेकिन ये मिलकर बड़े संकट में बदल गए।

  • प्रभाव: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे हब पर हजारों यात्री फंसे। सोशल मीडिया पर IndiGoCrisis ट्रेंड किया।
  • एल्बर्स की गलती: स्टाफ को लिखे पत्र में माना कि ‘हम ग्राहकों के वादे पर खरे नहीं उतरे’, लेकिन पहले से प्रोएक्टिव कैंसिलेशन या अल्टरनेटिव नहीं दिए। DGCA ने 17 जनवरी 2026 को 22.20 करोड़ का जुर्माना लगाया।

4. संकट के दौरान कम्युनिकेशन और क्राइसिस मैनेजमेंट में कमी

एल्बर्स ने संकट के दौरान मीडिया से कम बात की। जनवरी 2026 में Wings India इवेंट पर कहा कि ‘3 दिनों की गड़बड़ी 20 साल की इंडिगो को परिभाषित नहीं कर सकती’, लेकिन यात्री इसे 3 दिन से ज्यादा मानते थे।

  • प्रभाव: कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल। प्रतिद्वंद्वी एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर को फायदा हुआ।
  • एल्बर्स की गलती: पब्लिक अपोलॉजी देर से आई। बोर्ड ने शुरुआत में उनका बचाव किया, लेकिन दबाव बढ़ने पर इस्तीफा आया।

5. आक्रामक विस्तार के बीच परिचालन उत्कृष्टता पर कम फोकस

एल्बर्स सितंबर 2023 में KLएम से आए थे। उनके कार्यकाल में इंडिगो ने 28 अंतरराष्ट्रीय मार्ग जोड़े, रोज 4,500से ज्यादा उड़ानें, 15 करोड़ यात्री सालाना। लेकिन घरेलू बाजार (60% शेयर) में पायलट शॉर्टेज, ATF कीमतें (ईरान संघर्ष से प्रभावित), और सप्लाई चेन इश्यूज पर नियंत्रण कमजोर रहा।

  • प्रभाव: प्रतिस्पर्धा बढ़ी, लेकिन इंडिगो की OTP (ऑन-टाइम परफॉर्मेंस) गिरा।
  • एल्बर्स की गलती: ग्रोथ पर ज्यादा जोर, लेकिन बेसिक ऑपरेशनल रेजिलिएंस (लचीलापन) पर कम।

राहुल भाटिया की वापसी: क्या मतलब?

राहुल भाटिया इंडिगो के सह-संस्थापक हैं। 2006-2019 तक वे सीईओ रहे, जब कंपनी स्टार्टअप से 350 से ज्यादा विमानों वाली मार्केट लीडर बनी। अब अंतरिम में वे वापस आए हैं। चेयरमैन वीएस मेहता ने कहा, ‘राहुल कंपनी की संस्कृति मजबूत करेंगे, परिचालन उत्कृष्टता लाएंगे, और ग्राहकों को बेहतर सेवा देंगे।’

  • संकेत: कंपनी अब ग्रोथ से ज्यादा स्थिरता और सुधार पर फोकस करेगी। मार्च तिमाही के रिजल्ट्स से पहले OTP, बेड़े उपयोग और ग्राहक सेवा सुधार प्राथमिकता।
  • भविष्य क्या?: भाटिया की वापसी से इंडिगो को पुरानी ताकत मिल सकती है, खासकर जब एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा से चुनौती है। नया सीईओ जल्द नियुक्त होने की उम्मीद।

इंडिगो आज भी भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है। 100 से ज्यादा घरेलू, 28 अंतरराष्ट्रीय गंतव्य, 440 से ज्यादा विमान। लेकिन दिसंबर 2025 का संकट साबित करता है कि तेज ग्रोथ के साथ परिचालन मजबूती जरूरी है। एल्बर्स के इस्तीफे के बाद कंपनी नए चैप्टर की शुरुआत कर रही है, जहां राहुल भाटिया जैसे फाउंडर की अनुभव वाली लीडरशिप से रिकवरी तेज हो सकती है।



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Ganga Expressway: भारत का सबसे बड़ा ‘धार्मिक गलियारा’, 594KM कॉरिडोर में UP के 12 जिलों-7 धामों का संगम


Uttar Pradesh

oi-Divyansh Rastogi

Ganga Expressway Road Map: गंगा नदी, जो सदियों से भारतीय सभ्यता की जीवनरेखा रही है, अब एक क्रांतिकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छूने वाली है। उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ न केवल भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनेगा, बल्कि यह एक अनूठा ‘धार्मिक गलियारा’ (रिलिजियस कॉरिडोर) भी स्थापित करेगा। 594 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन कॉरिडोर मेरठ से प्रयागराज तक फैलेगा, 12 जिलों और 519 गांवों को जोड़ेगा। साथ ही करीब 8 करोड़ लोगों की जिंदगी को नई गति देगा। यह महज एक सड़क नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि, आध्यात्मिक पर्यटन और पर्यावरणीय स्थिरता का प्रतीक है।

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) की सहायक कंपनी अडानी रोड्स एंड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड द्वारा डेवलप किया जा रहा यह प्रोजेक्ट, भारत की लॉजिस्टिक्स क्रांति का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। रिकॉर्ड 3 साल और 3 महीनों में पूरा होने वाला यह एक्सप्रेसवे, मेरठ से प्रयागराज की यात्रा को 11 घंटे से घटाकर मात्र 6 घंटे कर देगा। ईंधन की बचत 30% तक होगी, और साथ ही यह औद्योगिक कॉरिडोरों और धार्मिक स्थलों को जोड़कर उत्तर प्रदेश को एक नई पहचान देगा। आइए, इस हम इस प्रोजेक्ट की गहराई में उतरें, इसकी नींव से लेकर आर्थिक प्रभाव, तकनीकी विशेषताओं और भविष्य की संभावनाओं को जानें…

Ganga Expressway Uttar Pradesh

Ganga Valley Connectivity Revolution: गंगा घाटी की कनेक्टिविटी क्रांति

गंगा एक्सप्रेसवे की अवधारणा उत्तर प्रदेश सरकार की ‘उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी’ (UPEIDA) से निकली है। 2018 में प्रस्तावित यह प्रोजेक्ट, गंगा नदी के किनारे बसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया। भारत जैसे विकासशील देश में जहां लॉजिस्टिक्स लागत GDP का 14% तक खा जाती है, यह एक्सप्रेसवे इसे घटाकर 8-9% तक लाने का प्रयास है, जो अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसे विकसित राष्ट्रों के स्तर के बराबर है।

अडानी ग्रुप, जो पहले से बंदरगाहों और हवाई अड्डों में अपनी मजबूत पकड़ रखता है, ने इस प्रोजेक्ट को BOT (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल पर लिया है। यह भारत का सबसे बड़ा BOT प्रोजेक्ट है, जिसमें 30 साल की रियायत अवधि है। अडानी रोड्स ने 464 किमी (करीब 80%) का हिस्सा संभाला है, जबकि IRB इंफ्रास्ट्रक्चर ने शेष 130 किमी विकसित किया। कुल लागत 36,000 करोड़ रुपये से अधिक है। अडानी का यह निवेश उनके एकीकृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें 17 सड़क परियोजनाएं शामिल हैं, जो 5,300 लेन किलोमीटर से अधिक क्षेत्र कवर करती हैं।

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) का परिवहन और लॉजिस्टिक्स वर्टिकल इसी दिशा में काम कर रहा है। ग्रुप ने पहले अडानी पोर्ट्स एंड SEZ को इंक्यूबेट किया, जो अब भारत के बंदरगाह कार्गो का 27% संभालता है। इसी तरह, अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स लिमिटेड आठ प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन कर रही है, जो घरेलू यात्री ट्रैफिक का 25% और कार्गो का 31% हैंडल करते हैं। गंगा एक्सप्रेसवे इस नेटवर्क का एक स्तंभ है, जो ‘लास्ट माइल’ कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। ग्रुप का मानना है कि इससे न केवल उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि लाखों नौकरियां भी सृजित होंगी।

Uttar Pradesh 12 Districts-519 Villages Connectivity: UP के 12 जिलों और 519 गांवों का नेटवर्क

मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह 594 किमी लंबा कॉरिडोर, 3,564 लेन किलोमीटर (6 लेन) का विशाल नेटवर्क बनेगा। भविष्य में इसे 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। रास्ते में यह 12 प्रमुख जिलों को जोड़ेगा। इसमें मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज शामिल हैं। इन जिलों में 519 गांवों से गुजरते हुए, यह करीब 8 करोड़ आबादी को प्रभावित करेगा।

Ganga Expressway Uttar Pradesh

मैप पर देखें तो, यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर से प्रयागराज तक की यात्रा और सहज हो जाएगी। डिजाइन स्पीड 120 किमी/घंटा रखी गई है, जो इसे भारत के सबसे तेज एक्सप्रेसवेज में शुमार करेगी। राइट ऑफ वे (सड़क का अधिकार क्षेत्र) 120 मीटर चौड़ा होगा, जो पर्याप्त स्थान देगा विस्तार और सहायक सुविधाओं के लिए।

Ganga Expressway Economic Impact: आर्थिक प्रभाव- औद्योगिक क्रांति और रोजगार सृजन

गंगा एक्सप्रेसवे महज एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ बनेगा। उत्तर प्रदेश सरकार सभी 12 जिलों में 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित कर रही है। इनमें मेरठ-हापुड़ क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग, अमरोहा-संभल में टेक्सटाइल, और प्रयागराज के आसपास फार्मा और आईटी हब शामिल हैं। इससे लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी।

समय की बचत ही इसका सबसे बड़ा लाभ है। मेरठ से प्रयागराज का सफर 11 घंटे से घटकर 6 घंटे रह जाएगा, जो ट्रक ड्राइवर्स और व्यापारियों के लिए वरदान साबित होगा। ईंधन की 30% बचत से कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा। लॉजिस्टिक्स लागत घटने से निर्यात बढ़ेगा, खासकर गंगा बेसिन के कृषि उत्पादों का। विश्व बैंक के अनुसार, ऐसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं GDP ग्रोथ को 1-2% तक बूस्ट कर सकती हैं। उत्तर प्रदेश, जो पहले से भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, इस प्रोजेक्ट से ‘ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

Ganga Expressway Religious Sector: आध्यात्मिक आयाम- धार्मिक गलियारा, जो तीर्थयात्रियों का नया द्वार बनेगा

गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे अनूठा पहलू इसका ‘धार्मिक गलियारा’ रूप है। यह कॉरिडोर 7 प्रमुख तीर्थस्थलों को जोड़ेगा, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी। इनमें शामिल हैं:

Ganga Expressway Uttar Pradesh

  • गढ़मुक्तेश्वर (अमरोहा): गंगा के तट पर स्थित प्राचीन घाट, जहां कुम्भ मेले की यादें बसी हैं।
  • कल्कि धाम (संभल): भगवान विष्णु के कल्कि अवतार को समर्पित, जो आधुनिक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
  • बारादेवी मंदिर (हापुड़): शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र।
  • चंडिका देवी मंदिर (उन्नाव): देवी दुर्गा का प्राचीन मंदिर, जो तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध।
  • बेला देवी मंदिर (प्रतापगढ़): स्थानीय लोकदेवी का भव्य मंदिर।
  • संकट हरन मंदिर (हरदोई): भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने वाला स्थल।
  • त्रिवेणी संगम (प्रयागराज): गंगा-यमुना-सारस्वती का पवित्र संगम, जहां कुंभ मेला आयोजित होता है।

यह गलियारा श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को आसान बनाएगा। प्रयागराज कुंभ जैसे मेगा इवेंट्स के दौरान लाखों तीर्थयात्री इससे लाभान्वित होंगे। पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश का धार्मिक पर्यटन पहले से ही 20% राजस्व योगदान देता है; यह प्रोजेक्ट इसे दोगुना कर सकता है। साथ ही, स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक साहित्य और गंगा-थीम्ड टूरिज्म पैकेजेस से छोटे व्यवसाय फलेंगे-फूलेंगे।

तकनीकी विशेषताएं: पर्यावरण-अनुकूल और अत्याधुनिक डिजाइन

यह एक्सप्रेसवे पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है। सड़क को 6 मीटर ऊंचाई पर बनाया गया है, जो बाढ़ के उच्चतम स्तर से 1 मीटर ऊपर है। हर 860 मीटर पर क्रॉसिंग स्ट्रक्चर (437 अंडरपास, 21 फ्लाईओवर, 76 छोटे पुल) लगाए गए हैं, ताकि वन्यजीवों और ग्रामीणों की आवाजाही बाधित न हो।

Ganga Expressway Features: मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:-

  • सुरक्षा और निगरानी: 24×7 CCTV कवरेज, ट्रॉमा सेंटर और आपातकालीन एयरस्ट्रिप (4 स्थानों पर)।
  • ग्रीन इनिशिएटिव: अडानी के 464 किमी हिस्से में मीडियन में 9 लाख पौधे लगाए गए; वन विभाग ने एवेन्यू प्लांटेशन के तहत 4.5 लाख पौधे। कुल मिलाकर, प्रोजेक्ट में लाखों पेड़-पौधे लगे हैं।
  • आधुनिक सुविधाएं: 20+ EV चार्जिंग स्टेशन (दोनों तरफ 10-10), वर्ल्ड-क्लास वे-साइड एमेनिटीज (फूड कोर्ट, फ्यूल स्टेशन, मोटल, शॉपिंग प्लाजा, वाहन सर्विस सेंटर), 14 ट्रक ड्राइवर डॉरमेट्री और ढाबे।
  • तकनीकी उन्नयन: पूरी लंबाई में ‘डार्क फाइबर’ केबल नेटवर्क डेटा ट्रांसमिशन के लिए। सड़क की ऊपरी परत में पॉलिमर मॉडिफाइड बिटुमेन (PMB) का उपयोग, जो सड़क की आयु बढ़ाता है और सफर को सुगम बनाता है।
  • ट्रैफिक जोखिम अडानी ही उठाएगा, जो प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता को दर्शाता है।

चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं

किसी भी मेगा प्रोजेक्ट की तरह, यहां भी चुनौतियां रहीं- भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और बाढ़-प्रवण क्षेत्र। लेकिन UPEIDA और अडानी की टीम ने इन्हें कुशलता से संभाला। भविष्य में, यह एक्सप्रेसवे पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे रेल-सड़क इंटीग्रेशन मजबूत होगा।

गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। यह न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा, बल्कि गंगा की पवित्रता को आधुनिक विकास से जोड़ेगा। जब यह 2026 के अंत तक चालू होगा, तो यह साबित करेगा कि इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे आस्था, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को एक सूत्र में बांध सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विजन ‘एक जिला, एक उत्पाद’ इस कॉरिडोर से और मजबूत होगी, और गंगा घाटी एक नई समृद्धि की कहानी लिखेगी।



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सिर्फ एक समुदाय पर निशाना क्‍यों? उत्तम नगर कांड के बाद ज्‍वाइंट कमिश्‍नर से मिला जमीयत, रखी 5 डिमांड


नई दिल्‍ली. उत्तम नगर की गलियों में फैली नफरत की चिंगारी अब इंसाफ की चौखट तक जा पहुंची है. तरुण कुमार की मौत के बाद उपजा तनाव अब महज एक पुलिस केस नहीं बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द की अग्निपरीक्षा बन गया है. जमीयत उलमा-ए-हिंद का  प्रतिनिधिमंडल जॉइंट पुलिस कमिश्नर से मिला. उन्‍होंने बुलडोजर न्याय और भीड़तंत्र के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई. कमिश्नर जतीन नरवाल के सामने कुल 5 प्रमुख मांगें रखी गई.

1.      दोषियों पर कार्रवाई: सांप्रदायिक नफरत फैलाने और हिंसा के लिए उकसाने वाले तत्वों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.

2.      सोशल मीडिया पर लगाम: इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे भड़काऊ और नफरत भरे संदेशों पर तुरंत रोक लगाई जाए.

3.      सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: जेजे कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस की प्रभावी तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो.

4.      निष्पक्ष जांच: घटना के बाद हुई तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दी जाए.

5.      धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा: रमजान और ईद के मद्देनजर मुसलमानों को दुकानें खोलने और मस्जिदों व ईदगाहों में नमाज अदा करने के लिए पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए.

सवाल-जवाब

जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात क्यों की?

उत्तम नगर में तरुण कुमार की मौत के बाद उपजे सांप्रदायिक तनाव और मुस्लिम समुदाय में व्याप्त असुरक्षा को लेकर यह मुलाकात की गई.

ज्ञापन में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर क्या कहा गया है?

ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी भी नागरिक के खिलाफ कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया (Due Process of Law) के तहत ही होनी चाहिए.

जॉइंट सीपी जतीन नरवाल ने प्रतिनिधिमंडल को क्या आश्वासन दिया?

उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्र में शांति बहाल की जा रही है, बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक है और मुस्लिम दुकानदारों को पूरी सुरक्षा दी जाएगी.



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Parliament Session: ‘आंख मारते हैं’, राहुल गांधी पर क्यों बरसे Kiren Rijiju? याद आया 2018


India

oi-Ankur Sharma

Parliament Session: लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार, 10 मार्च 2026 को हुई बहस में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का ‘गले मिलना’ और ‘आंख मारना’ मुख्य मुद्दा बन गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेता के आचरण को ‘गंभीर नहीं’ करार देते हुए अतीत की इन घटनाओं का जिक्र किया।

उन्होंने जमकर राहुल गांधी पर तंज कसा और कहा कि ‘मैंने ऐसा पहली बार देखा है। वह वहां से दौड़कर PM को गले लगाने आते हैं। क्या आपने ऐसा LoP देखा है, उन्होंने संसद को मजाक बना दिया है, कुछ भी कहते हैं और कुछ भी करते हैं, ना ही उन्हें पद का ख्याल है और ना ही संविधान का।’

Parliament Session

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को लोकसभा में स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव का जवाब देते हुए विपक्ष पर बेचैन होने और लोगों की इच्छा के खिलाफ जाने का आरोप लगाया, क्योंकि वे कथित तौर पर स्पीकर की पावर अपने लिए चुराना चाहते हैं।

Parliament Session: ‘खुद को स्पीकर से ऊपर समझने वाला का कुछ नहीं हो सकता’

नारेबाजी के बीच विपक्षी सांसदों पर निशाना साधते हुए, मंत्री रिजिजू ने राहुल गांधी के पिछले बयान का हवाला देते हुए कहा कि ‘अगर कोई खुद को सदन में स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसके पास कोई इलाज नहीं है।’ किरेन रिजिजू ने 2018 की उस घटना का हवाला दिया, जब राहुल गांधी ने कहा था कि वे ‘नफरत से आपके दिलों को साफ करना चाहते हैं और प्यार प्रज्वलित करना चाहते हैं।’

Parliament Session

Parliament Session Updates: प्रियंका गांधी ने किरेन रिजिजू को दिया करारा जवाब

रिजिजू के भाषण समाप्त होने के बाद, राहुल गांधी की बहन और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘वे (राहुल) जो कुछ भी कहते हैं, उसे पचा नहीं पा रहे हैं, क्योंकि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में पिछले 12 सालों में, वह (राहुल) अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने झुकने से इनकार किया है।’

Parliament Session 2018: क्या हुआ था साल 2018 में?

दरअसल साल 2018 में संसद में नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर बहस चल रही थी, उसी दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करने के बाद खुद को ‘पप्पू’ कहकर संबोधित किया था और बोला था कि ‘मैं नफरत को सिर्फ प्यार से जीतूंगा, हां हूं मैं पप्पू, मुझे बुरा नहीं लगता।’

इसके बाद फिर अचानक से वो PM मोदी के पास पहुंचे थे और उन्हें गले लगा लिया था। इसके बाद वो अपनी सीट पर वापस आए थे और अपने बगल में बैठे साथियों को ‘आंख मारकर’ मुस्कराए थे। इस घटना ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया था, जहां कांग्रेस इसे ‘नफरत के बदले प्रेम’ बताया था वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने इसकी कटु आलोचना की थी।

पीएम मोदी ने दिया था करारा जवाब

राहुल गांधी के इस व्यवहार का मजाक उड़ाते हुए पीएम मोदी ने अपने ही अंदाज में कहा था कि ‘वे हैरान हैं कि किसी को यहां मेरी जगह बैठने की कितनी जल्दी है? जब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा प्रारंभ ही हुई थी, मतदान भी नहीं हुआ था, जय या पराजय का फैसला भी नहीं हुआ था। जिन्हे यहां पहुंचने का उत्साह है कि उठो उठो उठो, लेकिन न यहां कोई किसी को उठा सकता है और न ही बिठा सकता है, ये सिर्फ जनता ही कर सकती है।’

Parliament Session

‘पूरा देश देख रहा है टीवी पर आंखों का खेल’

‘उनका एक ही मकसद है, मैं ही प्रधानमंत्री बनूंगा। पूरा देश देख रहा है टीवी पर आंखों का खेल, कैसे आंखे खोली जा रही हैं, कैसे बंद की जा रही है। हम चौकीदार भी हैं, भागीदार भी हैं लेकिन आपकी तरह सौदागर और ठेकेदार नहीं हैं। हम गरीबों, किसानों और नौजवानों के सपनों के भागीदार हैं। पीएम ने कहा कि, कांग्रेस तो डूबी हुई है, उनके साथ जाने वाले भी डूबेंगे।’



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