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Trade: अमेरिकी उपविदेश सचिव बोले- भारत-US व्यापार समझौता लगभग तैयार, ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में करेंगे मदद


नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के दौरान अमेरिका के उपविदेश सचिव क्रिस्टोफर लैंडाउ ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है और इसमें ‘लगभग असीमित संभावनाएं’ हैं।

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‘पश्चिम एशिया में युद्ध से प्रभावित हुई सप्लाई’

क्रिस्टोफर लैंडाउ ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करेगा ताकि उसकी कम समय और लंबे समय की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकें। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऊर्जा संसाधनों से भरपूर देश है और भारत के लिए एक बड़ा वैकल्पिक स्रोत बन सकता है।

‘भारत का भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है अमेरिका’

क्रिस्टोफर लैंडाउ ने भारत को सलाह दी कि वह ऊर्जा के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान दे और अमेरिका इस दिशा में भारत का भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भविष्य में और मजबूत हो सकता है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीदता रहेगा ताकि सप्लाई स्थिर बनी रहे।

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उपविदेश सचिव ने बताया ‘अमेरिका फर्स्ट’ का मतलब

क्रिस्टोफर लैंडाउ ने यह भी कहा कि इस सदी में भारत के तेजी से उभरने की संभावना है और अमेरिका चाहता है कि दोनों देश मिलकर काम करें। उनके मुताबिक ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका दूसरे देशों के हितों की अनदेखी करेगा, बल्कि वह ऐसे सहयोग चाहता है जिससे दोनों देशों को फायदा हो। रायसीना डायलॉग के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी क्रिस्टोफर लैंडाउ से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।





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इनविजिबल क्रिएटर्स के लिए फ्रेंड्स स्टूडियोज ने लॉन्च किए किफायती पैकेज


Friends Media PR की वीडियो प्रोडक्शन ब्रांच Friends Studios ने “इनविज़िबल क्रिएटर्स” को एम्पावर करने के लिए स्पेशल और किफायती पैकेज लॉन्च किए हैं। यह स्टूडियो नोएडा के प्रीमियम लोकेशन Wave One Building की 25वीं मंज़िल पर स्थित है, जो इसकी सबसे बड़ी यूएसपी मानी जा रही है।

 

100 से अधिक नेशनल और रीजनल न्यूज़ चैनलों के साथ पार्टनरशिप रखने वाली फ्रेंड्स मीडिया ने अपने मल्टीमीडिया विंग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस स्टूडियो की शुरुआत की है।

 

“हम सब में एक कंटेंट क्रिएटर है”

एजेंसी के को-फाउंडर और जर्नलिस्ट अमन द्विवेदी कहते हैं: “आज हर कोई कंटेंट क्रिएटर है — मैं, आप, कोई स्टार्टअप फाउंडर या एक नॉर्मल ऑफिस गोअर। व्लॉगिंग अब लाइफस्टाइल बन चुकी है। हम वीडियो और कंटेंट क्रिएशन को इंटेलिजेंट इंडियन के जीवन का एक अहम हिस्सा मानते हैं। हमने प्राइसिंग बहुत ही किफायती रखी है ताकि बिज़नेस लीडर्स, चेंजमेकर्स और पॉलिसी मेकर्स जैसे सोचने-समझने वाले लोग हमारे साथ जुड़ सकें। हमारा फोकस सिर्फ वायरलिटी के पीछे भागने वाले टिपिकल क्रिएटर्स पर नहीं है। हम उस ‘इनविज़िबल क्रिएटर’ को ढूंढ रहे हैं जिसके पास बिना फिल्टर के बहुत कुछ कहने को है।”

 

10 स्लॉट्स के लिए ₹25,000

 फ्रेंड्स मीडिया के मल्टीमीडिया विंग के हेड प्रशांत सिंह के अनुसार: “हमने 10 स्लॉट्स के लिए ₹25,000 का सपोर्ट अमाउंट रखा है। 10 स्लॉट्स इसलिए ताकि मेंबरशिप लेने वाले लोग अपनी कमिटमेंट दिखाएं। हमारे लिए पैसे से ज़्यादा आइडिया मायने रखते हैं। हम चाहते हैं कि बुद्धिजीवी लोग हमारे पास आएं, बैठें, कॉफी पिएं, सोचें और खुद को एक्सप्रेस करें।” उनके मुताबिक, पॉडकास्ट करना, कैमरे के सामने आना और अपने विचार शेयर करना पर्सनैलिटी डेवलपमेंट में मदद करता है। यह जिम जाने जैसा है — दिमाग और विचारों को रिफ्रेश करने का तरीका। जब आप 10 एपिसोड शूट करेंगे, तो आपको खुद फर्क महसूस होगा। लोग आपको नए नजरिए से देखने लगेंगे।”

 

“बहुत मज़ा आ रहा है”

 फ्रेंड्स मीडिया की बिज़नेस हेड अनुष्का शर्मा कहती हैं: “पूरा स्टूडियो इनिशिएटिव बहुत एक्साइटिंग रहा है। हमें अंदाजा नहीं था कि लोग व्लॉगिंग को इतना एंजॉय करते हैं। ज़्यादातर लोग सिर्फ अपने दिल की बात कहकर ही फुलफिल्ड महसूस करते हैं। इसका एक इंडायरेक्ट आरओआई भी है। यह पूरा प्रोसेस लोगों के पर्सनल और प्रोफेशनल प्रोफाइल को मजबूत बनाता है। कई लोग वायरल भी हो रहे हैं। लेकिन असली आरओआई है — खुद से बात करना, दुनिया से पहले।”

 

क्वालिटी बनाए रखने के लिए लिमिटेड ऑनबोर्डिंग

 एवीपी, बिज़नेस डेवलपमेंट, एवांशा गोयल के अनुसार: “हमने क्वालिटी को प्राथमिकता देने के लिए सिर्फ 100 क्रिएटर्स को ऑनबोर्ड करने का फैसला किया है। हमारी टीम की बैंडविड्थ फिलहाल उतनी ही है। हम लाइटिंग, एडिटिंग, साउंड और पोस्ट-प्रोडक्शन एक्सपीरियंस जैसी छोटी-छोटी चीज़ों पर खास ध्यान देते हैं। हमारा पीआर विंग वर्ड ऑफ माउथ से ग्रो हुआ क्योंकि हमने सही प्राइस पर बेस्ट वैल्यू दी। हम वही मॉडल यहां भी फॉलो करना चाहते हैं।”

 

फ्रेंड्स मीडिया के बारे में

 2023 में स्थापित Friends Media PR आज भारत की तेजी से बढ़ती बी2बी पीआर एजेंसियों में से एक है। कंपनी की पार्टनरशिप Zee Media, Times Network, Amar Ujala Group, News 24, TV9 Group, Deccan Herald, Express Group और Outlook Media जैसे बड़े मीडिया नेटवर्क्स के साथ है। 50 सदस्यीय टीम स्टार्टअप्स, एफएमसीजी, रियल एस्टेट और टेक कंपनियों सहित कई सेक्टर्स में क्लाइंट्स को सर्विस दे रही है।



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The Bonus Market Update: पश्चिम एशिया में तनाव से बाजार धड़ाम; सेंसेक्स 1097 अंक टूटा, जानें निफ्टी का हाल


पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के सातवें दिन में पहुंच जाने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके चलते शुक्रवार को एक दिन की राहत के बाद शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजारों में कमजोरी, यूरोपीय बाजारों में सुस्त रुझान और विदेशी निधियों की निरंतर निकासी ने भी बाजार की भावनाओं को प्रभावित किया।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,097 अंक या 1.37 प्रतिशत गिरकर 78,918.90 पर बंद हुआ। दिन के दौरान यह 1,203.72 अंक या 1.50 प्रतिशत गिरकर 78,812.18 पर आ गया था। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 315.45 अंक या 1.27 प्रतिशत गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और टॉप लूजर्स शेयर कौन?

सेंसेक्स के शेयरों में इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फिनसर्व और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख रूप से पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सन फार्मा, एनटीपीसी, इंफोसिस और एचसीएल टेक को लाभ हुआ। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 2.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 87.57 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा, “अमेरिकी-ईरान तनाव बढ़ने से मध्य पूर्व के प्रमुख तेल और गैस स्रोतों की आपूर्ति बाधित हुई, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। इसके चलते भारतीय शेयर बाजारों में पिछली सत्र की राहत रैली के बाद गिरावट जारी रही। तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से निवेशकों की भावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और भारत के दोहरे घाटे, मुद्रास्फीति की स्थिति और आरबीआई की मौद्रिक नीति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।” 

वैश्विक बाजार का क्या हाल?

एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट इंडेक्स और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोप के बाजारों में गिरावट देखी गई। गुरुवार को अमेरिकी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ।



एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 3,752.52 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,153.37 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को सेंसेक्स 899.71 अंक या 1.14 प्रतिशत बढ़कर 80,015.90 पर बंद हुआ, जिससे चार दिन की गिरावट का सिलसिला समाप्त हो गया। वहीं निफ्टी 285.40 अंक या 1.17 प्रतिशत चढ़कर 24,765.90 पर बंद हुआ, जिससे तीन दिन की गिरावट का सिलसिला भी समाप्त हो गया।





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Exporters: ‘निर्यातकों को राहत देने के लिए सभी नीतिगत विकल्प अपनाएगी सरकार’, बोले उद्योग मंत्री पीयूष गोयल


पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत सरकार घरेलू निर्यातकों को राहत देने के लिए सभी नीतिगत उपाय और समर्थन तंत्र का इस्तेमाल करेगी। उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को यह भरोसा दिलाया।

उन्होंने बताया कि निर्यात से जुड़ी समस्याओं की रोजाना समीक्षा के लिए सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया है। यह समूह निर्यातकों से नियमित रूप से बातचीत कर उनकी समस्याओं और फीडबैक को समझ रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर क्या बोले गोयल?

मंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही ऐसे उपायों को औपचारिक रूप देगी, जिससे निर्यातकों को राहत और भरोसा मिल सके। पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं और अमेरिका व इस्राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद उस क्षेत्र में माल भेजने में निर्यातकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

गोयल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय इस मुद्दे पर शिपिंग मंत्रालय और शिपिंग कंपनियों के साथ भी लगातार बातचीत कर रहा है, ताकि निर्यातकों की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। बढ़ते फ्रेट चार्ज के मुद्दे पर भी सरकार विकल्प तलाश रही है, जिससे निर्यातकों पर पड़ने वाला बोझ कम किया जा सके।

फ्रेट चार्ज क्या है?

दरअसल फ्रेट चार्ज वह शुल्क होता है, जो माल या सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए लिया जाता है। यह भुगतान परिवहन सेवा देने वाली कंपनी जैसे शिपिंग कंपनी, ट्रक ऑपरेटर, रेल या एयर कार्गो को किया जाता है।



उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपने विदेशी खरीदारों के साथ किए गए सभी वादों को पूरा करता रहेगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारत ने अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को निभाया था, जिससे देश की पहचान एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में बनी।







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बंगाल,बिहार समेत 9 राज्‍यों के बदले राज्‍यपाल, दिल्‍ली को मिला नया LG, किसे कहां की और क्‍यों मिली जिम्‍मेदारी


India

oi-Bhavna Pandey

States got new Governor and lG: केंद्र सरकार ने देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े संवैधानिक बदलावों की घोषणा की है। इस फेरबदल के तहत दिल्ली, लद्दाख, बिहार, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, नागालैंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में नए उपराज्यपाल और राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों की नियुक्तियों तथा स्थानांतरण से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है।

इस फेरबदल के तहत कुछ राज्यपालों के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं, जबकि कुछ को नए राज्यों में स्थानांतरित किया गया है और कुछ नई नियुक्तियां की गई हैं। इन नियुक्तियों में कई वरिष्ठ राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और अनुभवी राजनेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जानिए किसे कहां की कमान मिली और क्यों?

9 states got new Governor

पश्चिम बंगाल में बोस का अचानक इस्‍तीफा, आर एन रवि बने राज्‍यपाल

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने राष्‍ट्रपति को अचानक इस्‍तीफा सौंपा। सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद ही R. N. Ravi को नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। तमिलनाडु में राज्‍यपाल पद संभाल रहे R. N. Ravi की नियुक्ति पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले की गई है।

चुनाव से पहले रवि को क्‍यों सौंपी गई बंगाल की कमान?

रवि 1976 केरल कैडर के IPS अधिकारी हैं। CBI और IB जैसी संवेदनशील एजेंसियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां है। निभा चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी R. N. Ravi ने खुफिया तंत्र और केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर कार्य किया है।पूर्व आईपीएस अधिकारी रवि का करियर उग्रवाद विरोधी अभियानों और पूर्वोत्तर भारत में नागा शांति वार्ता जैसी महत्वपूर्ण शांति वार्ताओं के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है।

वर्ष 2021 से ये Tamil Nadu के राज्यपाल के रूप में कार्यरत रहे हैं। पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले एक पूर्व आईपीएस अधिकारी को यह अंतरिम प्रभार सौंपना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी नियुक्ति पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति और राजनीतिक उठापटक को देखते हुए काफी अहम मानी जा रही है।

कड़े प्रशासनिक निर्णयों और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति उनकी गहरी निष्ठा अक्सर चर्चा में रहती है। ऐसे में बंगाल में केंद्र और राज्य के बीच संबंधों तथा स्थानीय प्रशासन के लिए उनका कार्यकाल बेहद महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।

सैयद अता हसनैन को क्‍यों बनाया गया बिहार का राज्‍यपाल?

लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है। भारतीय सेना के एक सम्मानित अधिकारी, जनरल हसनैन को रणनीति मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उनके पास कश्मीर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम करने का लंबा अनुभव है। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। बिहार जैसे राज्य में उनकी नियुक्ति से प्रशासन में अनुशासन और सुरक्षा पर मजबूत दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

तरनजीत सिंह संधू को क्‍यों बनाया गया दिल्‍ली का राज्‍यपाल?

अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। संधू, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के व्यापक अनुभव वाले एक मंझे हुए राजनयिक हैं, जिन्होंने वाशिंगटन डीसी और श्रीलंका में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। दिल्ली जैसे संवेदनशील केंद्र शासित प्रदेश में उनकी नियुक्ति को केंद्र और राज्य प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उनकी पहचान एक शांत और प्रभावी प्रशासक के रूप में है।

विनय कुमार सक्‍सेना को क्‍यों बनाया लद्दाख LG?

दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का नया उपराज्यपाल बनाया गया है, जहां उन्होंने कविंदर गुप्ता का स्थान लिया है। सक्सेना दिल्ली में अपने सक्रिय और विकास-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए मशहूर थे। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और दुर्गम लद्दाख क्षेत्र में उनकी नियुक्ति से बुनियादी ढांचे के विकास और सीमावर्ती सुरक्षा चिंताओं को सुलझाने में सहायता मिलेगी। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष के तौर पर उनके अनुभव से लद्दाख के स्थानीय उद्योगों और पर्यटन को भी नई दिशा मिलने की संभावना है। यह पहाड़ी क्षेत्र के आर्थिक विकास को तेज़ी देगा।

जिष्‍णु देव वर्मा को क्‍यों बनाया गया महाराष्‍ट्र राज्‍यपाल?

तेलंगाना के राज्यपाल रहे जिष्णु देव वर्मा को अब महाराष्ट्र का कार्यभार सौंपा गया है। वर्मा त्रिपुरा के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और वे राज्य के शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पास लंबा राजनीतिक अनुभव है और उन्हें पूर्वोत्तर में भाजपा के आधार को मजबूत करने वाले प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है। महाराष्ट्र जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक केंद्र में उनकी नियुक्ति का उद्देश्य राज्य की स्थिरता और केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।

नंद किशोर यादव को क्‍यों बनाया गया नागालैंड का राज्यपाल?

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। यादव बिहार विधानसभा में कई बार विधायक रह चुके हैं और उन्होंने सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है। संगठन और प्रशासन में उनकी गहरी पकड़ उन्हें नागालैंड जैसे राज्य के लिए उपयुक्त बनाती है, जहाँ शांति प्रक्रियाओं और विकास को संतुलित करना एक प्रमुख चुनौती है।

शिव प्रताप शुक्ला को क्‍यों बनाया तेलंगाना का राज्‍यपाल?

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे शिव प्रताप शुक्ला को अब तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। शुक्ला केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री रह चुके हैं और उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति का लंबा अनुभव है। वे अपनी सादगी और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। तेलंगाना जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य में उनकी नियुक्ति संवैधानिक मर्यादाओं के पालन और कई विकास परियोजनाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को क्‍यों सौंपी तमिलनाडु राज्‍यपाल की जिम्‍मेदारी?

केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को अब तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अर्लेकर गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं। उन्हें एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और संसदीय प्रक्रियाओं के गहरे जानकार माना जाता है। तमिलनाडु में आर.एन. रवि के जाने के बाद, अर्लेकर वहां राजभवन और राज्य सरकार के बीच संवैधानिक संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करेंगे। उनका उद्देश्य सुचारु संवैधानिक कामकाज सुनिश्चित करना होगा।

कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्‍यपाल क्‍यों बनाया गया?

लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को अब हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। उन्होंने शिव प्रताप शुक्ला का स्थान लिया है, जिन्हें तेलंगाना भेजा गया है। गुप्ता जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनके पास लंबा राजनीतिक व प्रशासनिक अनुभव है।

हिमाचल जैसे खूबसूरत पहाड़ी और पर्यटन प्रधान राज्य में उनका शांत स्वभाव और जमीनी पकड़ प्रशासन के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। वे राज्य के विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र के साथ प्रभावी सेतु का काम करेंगे।



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Biz Updates: पश्चिम एशिया में जारी तनाव से वैश्विक बाजारों पर जोखिम, भारत को लेकर रिपोर्ट में क्या? जानें


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति, वैश्विक बाजारों के लिए निकट अवधि में जोखिम पैदा कर सकती है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

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रिपोर्ट के अनुसार तनाव बढ़ने के बाद ऊर्जा बाजारों में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 13% और यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतों में 55% तक उछाल दर्ज किया गया। जेफरीज ने कहा कि यह बढ़ोतरी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संभावित बंद होने की आशंका से जुड़ी है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है। ऐसे किसी व्यवधान से भारत जैसे तेल आयातक देशों की आयात लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।



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राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा किए गए बड़े राज्यपाल फेरबदल के बाद आरएन रवि ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया।


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-Oneindia Staff

राज्यपाल पदों में एक महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया है, जो सी. वी. आनंद बोस की जगह लेंगे, जिन्होंने अप्रत्याशित रूप से इस्तीफा दे दिया था। इस कदम ने पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा और उसके विरोधियों के बीच राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देर रात गुरुवार को इसकी घोषणा की।

 आरएन रवि पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल बने

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लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) को बिहार का नया राज्यपाल नामित किया गया है, जो 2 जनवरी पिछले साल पदभार संभालने वाले आरिफ मोहम्मद खान की जगह लेंगे। इस बीच, लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल, कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। बोस का पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इस्तीफा राज्य में विधानसभा चुनावों से कुछ हफ्ते पहले आया है, जिससे राजनीतिक परिदृश्य में एक रहस्य का तत्व जुड़ गया है।

राष्ट्रपति भवन से जारी एक बयान में, राष्ट्रपति मुर्मू ने बोस का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। बोस ने दिल्ली से एक फोन कॉल पर अपने फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उनका साढ़े तीन साल का कार्यकाल पर्याप्त था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुझाव दिया कि बोस को चुनावों से पहले कुछ राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दबाव का सामना करना पड़ा हो।

रवि का परिवर्तन और राजनीतिक निहितार्थ

पश्चिम बंगाल में रवि का जाना तमिलनाडु में विभिन्न मुद्दों पर एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार के साथ बार-बार सार्वजनिक विवादों से चिह्नित कार्यकाल के बाद हुआ है। तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, इस परिवर्तन को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तमिलनाडु में रवि के प्रदर्शन की आलोचना की और पश्चिम बंगाल में उनकी नई भूमिका पर संदेह व्यक्त किया।

अतिरिक्त नियुक्तियाँ

फेरबदल में अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया, जो विनय कुमार सक्सेना की जगह लेंगे। सक्सेना को लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में पुन: नियुक्त किया गया है, जो गुप्ता की जगह लेंगे। गुप्ता अब हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य करेंगे, जो शिव प्रताप शुक्ला की जगह लेंगे, जो तेलंगाना चले गए हैं।

सी. पी. राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने के बाद पिछले साल सितंबर से आचार्य देवव्रत के राज्य के अतिरिक्त प्रभार के बाद जिशु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। अनुभवी भाजपा नेता नंद किशोर यादव नागालैंड के राज्यपाल बनने वाले हैं, जो अतिरिक्त प्रभार संभालने वाले अजय कुमार भल्ला की जगह लेंगे।

कार्यान्वयन समय-सीमा

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, नियुक्तियाँ तब प्रभावी होंगी जब नियुक्त व्यक्ति अपने-अपने पद ग्रहण करेंगे।

With inputs from PTI

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ईरान-इजराइल संघर्ष में वृद्धि के बीच उत्तराखंड के परिवार फंसे हुए रिश्तेदारों को लेकर चिंतित हैं।


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-Oneindia Staff

उत्तराखंड राज्य सरकार ने {Iran} और खाड़ी देशों में फंसे निवासियों के बारे में जानकारी एकत्र करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, जो क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के बीच हैं। कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन से इन नागरिकों की वापसी की सुविधा के लिए आग्रह किया है, {Iran} में बिगड़ती स्थिति पर प्रकाश डालते हुए। निजामुद्दीन के पत्र में इस तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि हरिद्वार जिले के मंगलौर के कई लोग प्रभावित हैं।

 उत्तराखंड में फंसे रिश्तेदारों को लेकर परिवारों में चिंता

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फंसे हुए लोगों के परिवार गहरे चिंता व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि संचार लगातार मुश्किल होता जा रहा है। निजामुद्दीन ने मंगलौर के 32 व्यक्तियों की एक सूची संलग्न की है जो शैक्षिक उद्देश्यों के लिए {Iran} गए थे। तनावपूर्ण माहौल ने परिवारों को चिंतित कर दिया है, सीमित संपर्क उनकी परेशानी में और वृद्धि करता है। देहरादून जिले के अंबारी गांव के निवासी अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा के बारे में आश्वस्त होने के लिए संक्षिप्त फोन कॉल पर निर्भर हैं।

गांव के एक निवासी ज़ाकिर हुसैन ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद {Islamic} अध्ययन के लिए {Iran} में हैं, साथ ही परिवार के अन्य सदस्य भी। बिगड़ती स्थिति के कारण संचार अब अनियमित हो गया है। हुसैन ने अपनी बेटी का एक संक्षिप्त कॉल प्राप्त करने का उल्लेख किया, जिसने लाइन कटने से पहले उन्हें अपनी सुरक्षा का आश्वासन दिया। उनकी पत्नी की पहले से मौजूद चिंता की स्थिति परिवार की चिंताओं को बढ़ाती है।

एक अन्य निवासी, अयूब खान ने बताया कि उनका भतीजा और उनकी पत्नी पिछले चार साल से {Iran} में पढ़ाई कर रहे हैं। खान के भतीजे ने हाल ही में तेहरान से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित एक हॉस्टल में अपनी सुरक्षा की पुष्टि करने के लिए कॉल किया। वर्तमान सुरक्षा आश्वासनों के बावजूद, खान ने अस्थिर स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

स्थानीय परिवार इस बात पर दुखी हैं कि उनकी दुर्दशा केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय तक नहीं पहुंची है। हालाँकि स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) के अधिकारियों ने नाम और पासपोर्ट जानकारी जैसी जानकारी एकत्र की, लेकिन अधिकारियों की ओर से आगे कोई संचार नहीं हुआ। परिवार सरकार से अपने रिश्तेदारों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हैं।

हुसैन ने कहा, “हम बस यह जानना चाहते हैं कि वे सुरक्षित हैं। जब तक हम उन्हें सुरक्षित भारत लौटते हुए नहीं देखेंगे, तब तक हमारे दिल को चैन नहीं मिलेगा।” 28 फरवरी को {Iran} पर अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद, जिसमें ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनी की मृत्यु हो गई, संघर्ष तेज हो गया। जवाबी कार्रवाई में, {Iran} ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों में इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए।

पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक हमलों के साथ संघर्ष काफी बढ़ गया है। भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव को सुलझाने की वकालत करता है, सभी संबंधित पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान खोजने का आग्रह करता है।

With inputs from PTI

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केरल उच्च न्यायालय ने जमानत देने से पहले गिरफ्तारी पूर्व मानदंडों का अनुपालन अनिवार्य किया।


India

-Oneindia Staff

केरल उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि राज्य के सभी आपराधिक न्यायालय, रिमांड आवेदनों पर विचार करने से पहले, उच्चतम न्यायालय के निर्णयों में उल्लिखित पूर्व-गिरफ्तारी औपचारिकताओं का पालन करें। यह निर्देश उन घटनाओं के बाद आया है जहां जांच अधिकारियों द्वारा गैर-अनुपालन के कारण अभियुक्तों को जमानत दी गई थी। अदालत ने कार्यवाही में एक औपचारिक पृष्ठांकन की आवश्यकता पर जोर दिया, जो इन औपचारिकताओं के अनुपालन की पुष्टि करता है।

 केरल उच्च न्यायालय ने जमानत के लिए गिरफ्तारी पूर्व के मानदंडों को लागू किया

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न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने कहा कि मजिस्ट्रेट या न्यायाधीश यह सुनिश्चित करें कि इन प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। यदि गैर-अनुपालन का पता चलता है, तो उन्हें जांच अधिकारियों को रिमांड पर विचार करने से पहले इन आवश्यकताओं को पूरा करने का निर्देश देना चाहिए। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों द्वारा किसी भी जानबूझकर गैर-अनुपालन के परिणामस्वरूप अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जानी चाहिए।

यह निर्देश एक महिला सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी एक उप रेंज वन अधिकारी से जुड़े एक जमानत आवेदन की सुनवाई के दौरान जारी किया गया था। यह घटना कथित तौर पर 4 फरवरी को, उप रेंज कार्यालय में बिजली गुल होने के दौरान हुई, जब आरोपी ने कथित तौर पर पीड़िता को अनुचित तरीके से छुआ, जब वह खाना परोस रही थी।

अदालत ने प्रथम सूचना विवरण की समीक्षा की और आरोपों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त आरोप पाए। इसके बावजूद, इसने जमानत से इनकार करने के पिछले फैसले को पलट दिया, और इसे आरोपी की पहली बार अपराध करने वाले की स्थिति के कारण प्रदान किया। जमानत की शर्तों में 1,00,000 रुपये का बांड और समान राशि के दो सॉल्वेंट जमानतदार शामिल हैं।

जमानत की शर्तें

आरोपी को गवाहों को डराना या सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए और उसे जांच में सहयोग करना आवश्यक है। उसे पूछताछ के लिए उपलब्ध रहना चाहिए और मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करने से बचना चाहिए। शिकायतकर्ता को किसी भी प्रकार की परेशानी जमानत रद्द करने का कारण बन सकती है।

कार्यान्वयन और संचार

उच्च न्यायालय ने अपने रजिस्ट्री को इस फैसले की प्रतियां केरल के सभी आपराधिक न्यायालयों और पुलिस महानिदेशक को वितरित करने का निर्देश दिया है। यह सुनिश्चित करता है कि जांच अधिकारी और थाना प्रभारी पूर्व-गिरफ्तारी औपचारिकताओं का पालन करने की आवश्यकता से अवगत हैं और ऐसा करने में विफल रहने के परिणामों को समझते हैं।

With inputs from PTI



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Nishant Kumar Net Worth: नीतीश से 5 गुना ज्यादा अमीर हैं बेटे निशांत! कहां-कहां प्रॉपर्टी, कितने पढ़े-लिखे?


Bihar

oi-Kumari Sunidhi Raj

Nishant Kumar Net Worth – Education: बिहार की सियासत में इन दिनों एक नए नाम की गूंज सुनाई दे रही है, और वह नाम है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का। अब तक सत्ता के गलियारों और कैमरों की चकाचौंध से दूर रहने वाले निशांत को लेकर अचानक अटकलें तेज हो गई हैं कि वे जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं।

चर्चाएं तो यहां तक हैं कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का विकल्प चुना है, तो जदयू (JDU) में निशांत कुमार को कोई बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। 75 वर्षीय नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी को लेकर चल रही सियासी सुगबुगाहटों के बीच, निशांत का नाम सामने आने से बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

Nishant Kumar Net Worth - Education

राजनीति से अब तक बनाई दूरी

करीब 50 साल के हो चुके निशांत कुमार ने अब तक खुद को सक्रिय राजनीति से पूरी तरह अलग रखा है। वे केवल विशेष सार्वजनिक कार्यक्रमों या चुनाव के दौरान ही नजर आते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में अपने पिता के काम की सराहना की थी, लेकिन इसके अलावा वे कभी राजनीतिक बयानबाजी में शामिल नहीं हुए। निशांत अक्सर कहते रहे हैं कि उन्हें सत्ता की राजनीति में दिलचस्पी नहीं है और उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर अधिक है।

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Nishant Kumar Net Worth: करोड़ों की संपत्ति और सादगी भरा जीवन

अपनी सादगी के लिए पहचाने जाने वाले निशांत कुमार पटना में रहकर भी भीड़भाड़ से दूर रहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • कुल संपत्ति: लगभग 3.5 करोड़ रुपये।
  • चल संपत्ति: करीब 1.63 करोड़ रुपये।
  • अचल संपत्ति: करीब 1.98 करोड़ रुपये।

उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा उनकी दिवंगत मां मंजू सिन्हा (जो एक शिक्षिका थीं) से विरासत में मिला है।

पैतृक जमीन और निवेश

निशांत के पास विरासत में मिली कई संपत्तियां हैं:

  • कल्याण बीघा (नालंदा): यहां उनकी खेती योग्य और गैर-कृषि भूमि है।
  • बख्तियारपुर: हकीकतपुर इलाके में पैतृक घर और जमीन।
  • पटना: कंकड़बाग इलाके में भी एक प्लॉट होने की जानकारी सामने आती है।

Nitish Kumar Net Worth: नीतीश कुमार के पास कितनी संपत्ति?

बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की घोषित संपत्ति को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति करीब 1.64 करोड़ रुपये है। इसमें उनकी चल संपत्ति लगभग 16.97 लाख रुपये बताई गई है। चल संपत्ति में करीब 21,052 रुपये नकद और लगभग 60,811 रुपये बैंक खातों में जमा हैं, जबकि बाकी संपत्ति मुख्य रूप से जमीन और मकान के रूप में है।

उनकी अचल संपत्ति की कीमत करीब 1.48 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें नई दिल्ली के द्वारका इलाके की एक सहकारी हाउसिंग सोसाइटी में स्थित फ्लैट भी शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2023 में उनकी घोषित कुल संपत्ति करीब 1.65 करोड़ रुपये थी, यानी पिछले कुछ वर्षों में उनकी कुल संपत्ति में हल्की कमी दर्ज की गई है।

Nishant Kumar Education: बिट्स मेसरा से की है इंजीनियरिंग

निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत है:

  • प्रारंभिक शिक्षा: सेंट कैरेंस स्कूल (पटना) और मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल (मसूरी)।
  • उच्च शिक्षा: उन्होंने BIT मेसरा (Birla Institute of Technology) से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है।

पिता नीतीश कुमार भी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर रहे हैं, ऐसे में पिता और पुत्र दोनों ही तकनीकी पृष्ठभूमि से आते हैं।

निशांत का निजी जीवन

निशांत कुमार अविवाहित हैं और उन्होंने आज तक न तो कोई चुनाव लड़ा है और न ही किसी राजनीतिक पद को संभाला है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री और आध्यात्मिक स्वाभाव के बावजूद, बिहार की बदलती परिस्थितियों ने उन्हें केंद्र बिंदु में ला दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे अपनी ‘सादगी’ छोड़कर बिहार की कमान संभालने के लिए आगे आएंगे।

With AI Inputs

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