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Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग, 04 मार्च 2026, बुधवार
जंग के बीच ईरान में फंसा उत्तराखंड का परिवार: पिता बोले- 2 दिन से बेटे का फोन बंद, सरकार कैसे भी हमारे बच्चों को वापस लाए – Dehradun News
अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान में जारी युद्ध ने हजारों किलोमीटर दूर उत्तराखंड के विकासनगर में एक घर की धड़कनें रोक दी हैं। मिसाइलों और फाइटर जेट की गूंज के बीच ईरान के कुम शहर में रह रहे अली हैदर (23) और उनकी पत्नी नूरजहां (21) से पिछले दो दिनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। फोन की घंटी न बजना अब इस परिवार के लिए सबसे बड़ा डर बन चुका है। दैनिक भास्कर एप की टीम जब ग्राम पंचायत अंबाडी, विकासनगर स्थित उनके घर पहुंची तो वहां बेचैनी, इंतजार और दुआओं का माहौल था। तेहरान से 150 KM दूर कुम में रहते हैं अली-नूरजहां अली हैदर 2022 से ईरान के एक इस्लामिक विश्वविद्यालय में फारसी और उर्दू की पढ़ाई कर रहे हैं। सितंबर में उनका निकाह कारगिल की रहने वाली नूरजहां से हुआ था और शादी के बाद पत्नी भी उनके साथ ईरान चली गईं। परिवार के मुताबिक, वे तेहरान से करीब 150 किलोमीटर दूर कुम शहर में रह रहे हैं। आसमान में फाइटर जेट और मिसाइलों की आवाज अली के पिता शेर अली खान (57), जो पेशे से स्कूल बस ड्राइवर हैं, अभी भी ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन चेहरे पर साफ चिंता झलकती है। वे बताते हैं कि 1 मार्च को बड़े बेटे के फोन पर अली से करीब पांच मिनट की अंतरराष्ट्रीय कॉल पर बात हुई थी। उसने कहा कि हालात बहुत खराब हैं। आसमान में फाइटर जेट और मिसाइलों की आवाज साफ सुनाई दे रही है। उसके बाद से कोई कॉल नहीं आया। दो दिन से फोन बंद है। हर बार मोबाइल की स्क्रीन जलती है तो उम्मीद जगती है, लेकिन कॉल नहीं आता। मां रुखसाना की आंखों में डर, दिल में दुआ अली की मां रुखसाना (48) ने कहा कि जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से दिल घबराया हुआ है। दो दिन से बेटे से कोई संपर्क नहीं है। बस यही सोचते हैं कि वहां कैसे होंगे। वे बताती हैं कि बेटे का निकाह सितंबर में हुआ था। जून में भी एक बार एडवाइजरी जारी होने पर वह अचानक भारत आया था, लेकिन इस बार हालात बिगड़ने से पहले वह नहीं आ सका। हमें क्या पता था कि जंग छिड़ जाएगी… सब सामान्य था, मां की आवाज कांप जाती है। एलआईयू ने मांगे दस्तावेज अली 3 भाइयों में सबसे छोटा है और उससे छोटी एक बहन भी है। सबसे बड़े भाई शेखर अली, जो विकासनगर में लॉजिस्टिक का काम करते हैं, बताते हैं कि 1 मार्च को रात 11:30 बजे आखिरी बार भाई से बात हुई थी। बड़े भाई शेखर अली कहते हैं कि उसके बाद से कोई संपर्क नहीं है। 2 मार्च को विकासनगर एलआईयू ने हमसे संपर्क किया और पासपोर्ट नंबर, ईरान में पता जैसी जानकारी मांगी है। परिवार को उम्मीद है कि प्रशासनिक स्तर पर कोई मदद मिल सकेगी। मोदी सरकार हमारे बच्चों को सुरक्षित लाए-पिता की गुहार
बेबस पिता शेर अली खान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाते हैं कि बस किसी तरह हमारे बच्चों को सही-सलामत भारत ले आइए। हम और कुछ नहीं चाहते। उनकी यह अपील सिर्फ उनके घर तक सीमित नहीं है। ईरान के अलग-अलग शहरों में रह रहे भारतीय छात्रों और कामगारों के परिवारों की चिंता भी कुछ ऐसी ही है। हर घर में एक ही सवाल है क्या वे सुरक्षित हैं। हर बीतता मिनट भारी
घर के आंगन में खामोशी पसरी है। मोबाइल फोन चार्ज पर लगा है, नेटवर्क बार-बार चेक हो रहा है। भाभी यास्मीन बताती हैं कि अली सितंबर में भारत आया था। हमें अंदेशा भी नहीं था कि हालात इतने बिगड़ जाएंगे। अब बस एक कॉल का इंतजार है। जंग की खबरें लगातार सोशल मीडिया पर चल रही हैं, लेकिन इस घर में सबसे बड़ी खबर वही होगी। जब फोन बजेगा और उधर से अली की आवाज आएगी कि ‘अब्बू, हम ठीक हैं।’
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PM Kisan Yojana: बटाईदारों को भी मिलेंगे पीएम किसान के 2000 रुपये? 22वीं किस्त से पहले समझ लें नियम
India
oi-Kumari Sunidhi Raj
PM Kisan Yojana: देश के करोड़ों अन्नदाता हर चार महीने में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की अगली किस्त का बेसब्री से इंतजार करते हैं। खेती की बढ़ती लागत, महंगे बीज और खाद के खर्च के बीच सरकार द्वारा दी जाने वाली 2-2 हजार रुपये की यह मदद छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी बड़े संबल से कम नहीं है।
हालांकि, ग्रामीण इलाकों में अक्सर एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना रहता है कि क्या वे किसान भी इस योजना के पात्र हैं, जो अपनी जमीन के बजाय दूसरों के खेतों को ‘बटाई’ या पट्टे पर लेकर खेती करते हैं? चूंकि गांवों में भूमिहीन किसानों की एक बड़ी आबादी बटाई पर ही निर्भर है, इसलिए इसे लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि केंद्र सरकार के मौजूदा दिशा-निर्देश इस बारे में क्या कहते हैं और किन शर्तों को पूरा करने पर ही यह राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।

PM Kisan: क्या है पीएम किसान योजना का मुख्य उद्देश्य?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत पात्र किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजी जाती है। अब तक सरकार सफलतापूर्वक 21 किस्तें जारी कर चुकी है, जिससे देशभर के करोड़ों किसानों को अपनी कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है।
ये भी पढ़ें: PM Kisan Yojana: होली के बाद मिलेगी पीएम किसान की 22वीं किस्त, खाते में आएंगे सीधे 3000 रुपये?
PM Kisan: पात्रता के लिए सबसे बड़ी शर्त, ‘लैंड होल्डिंग’
इस योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ कड़े और स्पष्ट नियम तय किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त जमीन का मालिकाना हक (Land Ownership) है।
राजस्व रिकॉर्ड: योजना के लाभार्थियों की पहचान उनके आधिकारिक भू-राजस्व रिकॉर्ड (Land Records) के आधार पर की जाती है।
नाम दर्ज होना अनिवार्य: केवल वही किसान इस योजना का लाभ पाने के हकदार हैं, जिनके नाम पर राज्य के राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में खेती योग्य भूमि दर्ज है।
अन्य औपचारिकताएं: पात्र होने के लिए किसान का बैंक खाता आधार से लिंक होना, ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूर्ण होना और भूमि का नामांतरण (Mutation) अपडेट होना अनिवार्य है।
PM Kisan Yojana: बटाईदार किसानों के लिए क्या है कानूनी स्थिति?
गांवों में एक बड़ी संख्या ऐसे किसानों की है जो ‘बटाई’ पर खेती करते हैं। ये किसान मेहनत तो पूरी करते हैं और फसल का एक तय हिस्सा या किराया जमीन मालिक को देते हैं, लेकिन कानूनी रूप से उस जमीन के मालिक नहीं होते।
जमीन के बिना लाभ नहीं: मौजूदा सरकारी नियमों के मुताबिक, जिन किसानों के पास अपनी कोई खेती योग्य जमीन नहीं है और वे पूरी तरह बटाई पर निर्भर हैं, उन्हें पीएम किसान योजना का लाभ नहीं मिलता है।
अपवाद की स्थिति: यदि कोई किसान किसी दूसरे की जमीन बटाई पर जोत रहा है, लेकिन उसके पास खुद के नाम पर भी थोड़ी-बहुत खेती योग्य जमीन दर्ज है, तो वह अपनी उस निजी जमीन के आधार पर योजना के लिए आवेदन कर सकता है।
जमीन मालिक को लाभ: बटाई की स्थिति में योजना का लाभ उस व्यक्ति को मिलता है जिसके नाम पर जमीन का कागज (खतौनी) है, न कि उसे जो उस पर वास्तव में हल चला रहा है।
भ्रामक खबरों और अफवाहों से रहें सावधान
अक्सर सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर ऐसी खबरें वायरल होती हैं कि सरकार अब बटाईदार किसानों या भूमिहीन मजदूरों को भी इस योजना में शामिल करने जा रही है। आधिकारिक तौर पर अभी तक सरकार ने ऐसा कोई बदलाव नहीं किया है। बिना वैध भूमि दस्तावेजों के योजना का लाभ लेने का दावा करने वाली सभी खबरें निराधार हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें।
With AI Inputs
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देशभर में होली पर रंगों की धूम, PHOTOs: राजस्थान में विदेशी मेहमानों ने उड़ाया रंग-गुलाल; अखिलेश यादव ने मनोज तिवारी पर वीडियो सॉन्ग बनाया
01:45 AM4 मार्च 2026
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होली से जुड़ी 5 मान्यताएं…
वसंतोत्सव: ऋतु बदलने का उत्सव होली पहले वसंतोत्सव के तौर पर मनाई जाती थी, क्योंकि फाल्गुन-पूर्णिमा के आसपास ठंड विदा होती है और वसंत का रंग दिखने लगते हैं। 7वीं सदी में सम्राट हर्ष के नाटक रत्नावली में इसका जिक्र है वसंत के मौके पर दरबारी उत्सव, संगीत और सांस्कृतिक आयोजन करते थे। वसंतोत्सव मनाने की ये परंपरा तब से चली आ रही है। अब ये उत्सव लोकजीवन में उतरकर अबीर-गुलाल और रंगों की होली में बदल गया।
दोलयात्रा: राधा-कृष्ण को झूले पर विराजित करने की परंपरा पूर्वी भारत और वैष्णव परंपराओं में होली का बड़ा रूप दोलयात्रा या दोल पूर्णिमा है। इस परंपरा में राधा-कृष्ण की मूर्तियों को सजाकर झूले या पालकी पर निकाला जाता है। उन पर अबीर-गुलाल चढ़ाया जाता है और कीर्तन-उत्सव होता है। ओडिशा की सरकारी जानकारी के मुताबिक यह उत्सव फाल्गुन महीने की दशमी से दोल पूर्णिमा तक चलता है। बंगाल-ओडिशा क्षेत्र में, यही दिन चैतन्य महाप्रभु की जयंती से भी जुड़ गया। ये पहले वैष्णव झूला-उत्सव था। बाद में रंगों वाली होली से जुड़ गया।
राधा-कृष्ण फाग: प्रेम, रंग और लीला की होली ब्रज क्षेत्र में होली की सबसे बड़ी दूसरी मान्यता राधा-कृष्ण की फाग-लीला है। वैष्णव ग्रंथ गर्ग संहिता में होलिकोत्सव के बारे में लिखा गया है। जिसमें राधा और सखियों के साथ उत्सव का जिक्र है। इसी वजह से मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि कृष्ण-भक्ति, फाग-गायन और लीलाओं को याद करने का उत्सव मानी जाती है। बाद में यही परंपरा लोकहोली में बदल गई। जहां मंदिर की रंग-सेवा से आगे बढ़कर गांव-शहर की सामूहिक होली बनी।
किसानों का त्योहार: नई फसल और रबी सीजन का उल्लास होली को लंबे समय से फसल और खेती से भी जोड़ा जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार होली वसंत और फसल का उत्सव है। पहले इस त्योहार का रूप खेती पर आधारित था। इसमें किसान होलिका दहन में गेहूं की बालियां, नई उपज चढ़ाते थे और पूरा गांव नई फसल का उत्सव मनाता था। बाद में इसमें रंग, गुलाल और दूसरे धार्मिक-सांस्कृतिक रूप भी जुड़ते गए।
रिश्ते सुधारने का पर्व: बुरा न मानो होली है अमेरीका, ऑस्ट्रेलिया और स्कॉटलेंड के एंथ्रोपॉलॉजिस्ट ने अपनी स्टडी और रिसर्च में बताया कि भारत में होली ऐसा त्योहार है, जिसमें लोग पुराने विवाद और मनमुटाव को भूलकर त्योहार मनाते हैं। हालांकि बाद में रिश्तों और समाज कर कड़वाहट और तनाव फिर से वैसा ही हो जाता है। अमेरिकी एंथ्रोपॉलॉजिस्ट मैककिम मैरियट, ऑस्ट्रेलिया के डी. बी. मिलर और स्कॉटलेंड के विक्टर टर्नर के अनुसार भारत में होली पुरानी कड़वाहट कम करने, लोगों को करीब लाने और रिश्तों में नई शुरुआत करने का पर्व है।
MP-राजस्थान में गर्मी का असर तेज: कई जिलों में पारा 35°C के पार; हिमाचल के 4 शहरों में तापमान 30°C हुआ
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भोपाल/लखनऊ/शिमला/देहरादून7 घंटे पहले
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देशभर में मौसम दो अलग-अलग रंग दिखा रहा है। पहाड़ी राज्यों में जहां एक बार फिर बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार बन रहे हैं, वहीं मध्य और उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में गर्मी ने रफ्तार पकड़ ली है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी तेज धूप के कारण दिन के तापमान में उछाल आया है। कई शहरों में पारा 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मार्च के पहले पखवाड़े में तापमान में और इजाफा देखने को मिल सकता है, हालांकि पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के असर से बीच-बीच में मौसम में बदलाव बना रहेगा।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में दिन के साथ-साथ अब रात का तापमान भी बढ़ने लगा है। राजस्थान के पश्चिमी जिलों में गर्म हवाएं चलने लगी हैं और न्यूनतम तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर दर्ज हो रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम विभाग ने हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है।
उत्तराखंड के गंगोत्री में न्यूनतम तापमान -13°C, बद्रीनाथ में -11°C, हेमकुंड -12°C और हर्षिल -10°C दर्ज किया जा रहा है, जबकि मुनस्यारी में पारा -21°C तक गिर गया है। मौसम विभाग ने सिक्किम, गुजरात और गोवा में कोहरे की संभावना जताई है।

अगले 2 दिन मौसम का हाल…
5-6 मार्च- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश में बारिश-बर्फबारी की संभावना।
मध्य प्रदेश: MP के 25 जिलों में तापमान 33°C के पार, मालवा-निमाड़ सबसे गर्म; होली पर गर्म रहेंगे भोपाल-इंदौर

मार्च की शुरुआत में ही मध्य प्रदेश में गर्मी असर दिखाने लगी है। खासकर मालवा-निमाड़ यानी, इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में दिन का टेम्पेरेचर बढ़ रहा है। मंगलवार को प्रदेश के 35 जिलों में अधिकतम तापमान 33 डिग्री के पार पहुंच गया। इनमें धार, नर्मदापुरम, खरगोन, खंडवा और रतलाम सबसे गर्म रहे। पूरी खबर पढ़े…
राजस्थान: टेम्परेचर 38°C से ऊपर पहुंचा, दिन-रात में सामान्य से ज्यादा तापमान

राजस्थान में गर्मी बढ़ती जा रही है। मंगलवार को राज्य के कई शहरों का अधिकतम तापमान 35°C से ऊपर दर्ज हुआ। पश्चिमी जिलों में तो दिन में झुलसाने वाली गर्मी रही। बाड़मेर में अधिकतम तापमान 38°C के पार चला गया। न्यूनतम तापमान में मामूली गिरावट होने से मंगलवार रात में कुछ शहरों में हल्की ठंडक रही, लेकिन तापमान सामान्य से ज्यादा रहा। पूरी खबर पढ़ें…

MP-राजस्थान में गर्मी का असर तेज: कई जिलों में पारा 35°C के पार; हिमाचल के 4 शहरों में तापमान 30°C हुआ
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भोपाल/लखनऊ/शिमला/देहरादून16 मिनट पहले
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देशभर में मौसम दो अलग-अलग रंग दिखा रहा है। पहाड़ी राज्यों में जहां एक बार फिर बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार बन रहे हैं, वहीं मध्य और उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में गर्मी ने रफ्तार पकड़ ली है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी तेज धूप के कारण दिन के तापमान में उछाल आया है। कई शहरों में पारा 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मार्च के पहले पखवाड़े में तापमान में और इजाफा देखने को मिल सकता है, हालांकि पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के असर से बीच-बीच में मौसम में बदलाव बना रहेगा।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में दिन के साथ-साथ अब रात का तापमान भी बढ़ने लगा है। राजस्थान के पश्चिमी जिलों में गर्म हवाएं चलने लगी हैं और न्यूनतम तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर दर्ज हो रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम विभाग ने हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है।
उत्तराखंड के गंगोत्री में न्यूनतम तापमान -13°C, बद्रीनाथ में -11°C, हेमकुंड -12°C और हर्षिल -10°C दर्ज किया जा रहा है, जबकि मुनस्यारी में पारा -21°C तक गिर गया है। मौसम विभाग ने सिक्किम, गुजरात और गोवा में कोहरे की संभावना जताई है।

अगले 2 दिन मौसम का हाल…
5-6 मार्च- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश में बारिश-बर्फबारी की संभावना।

हरियाणा में नौल्था की डाट होली: कढ़ाहों में पकाया रंग, महिलाओं ने छतों से फेंका, पूरा दिन चली टोलियों की मस्ती; धूमधाम से निकाली झांकी – Panipat News
पानीपत4 घंटे पहलेलेखक: अमन वर्मा
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पानीपत के नौल्था गांव में बुधवार को होली खेलते फाग कमेटी के सदस्य।
हरियाणा के पानीपत में 909वीं ऐतिहासिक डाट होली मनाई गई। नौल्था की होली साल 1288 से चली आ रही एक अनूठी परंपरा है। इसके लिए कई दिन से तैयारी शुरू हो जाती है। बड़े-बड़े कढ़ाहों में रंग पका लिया गया था।
आज बुधवार को फाग के दिन युवाओं की टोली जैसे ही गलियों से निकली, उन पर महिलाओं ने छतों से रंग फेंका। पूरा दिन इसी तरह मस्ती चली। इस दौरान गांव में झांकी भी निकाली गई।
बता दें कि युवकों की टोलियां हाथ ऊपर कर अपने सीने से एक दूसरे को पीछे धकेलती हैं। इस जोर आजमाइश में जो गिर जाता है या पीछे हट जाता है, उसे हार माननी पड़ती है। 15 दिन पहले ही 6 मोहल्लों के युवक इसकी प्रैक्टिस करना शुरू कर देते हैं। यह प्रैक्टिस भी मोहल्ला बदल-बदलकर की जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, अंग्रेजों के शासनकाल में होली के समय गांव के एक युवक की मौत हो गई थी। इस पुरानी परंपरा को टूटने से बचाने के लिए युवक के पिता ने बाल्टी में रंग भरकर अपनी बेटी की अर्थी पर डाल दिया था।

ढोल की थाप पर डांस करते नौल्था फाग कमेटी के सदस्य
11 बजे के बाद शुरू हुई डाट होली
नौल्था फाग कमेटी के मेंबर कैलाश चंद ने बताया कि नौल्थ की होली पूरे देश में मशहूर है। 3 मार्च को गांव में फ्लैग मार्च निकाला गया था, ताकि भाईचारा बना रहे। ग्रामीणों को कहा गया है कि वह सुबह 11 बजे से पहले अपने काम निपटा लें, इसके बाद गांव की गलियों में डाट होली खेली जाएगी। आज तय समय पर होली शुरू हुई।

गांव में झांकी निकालते नौल्था फाग कमेटी के सदस्य।
अब जानिए क्या है डाट होली, इसकी कैसे शुरुआत हुई….
लाठे वाले बाबा ने शुरू की थी परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार, बाबा लाठे वाले 909 साल पहले फाग के दौरान मथुरा के दाऊजी गांव गए थे। वहां फाग (धुलंडी) उत्सव में लोगों का आपसी प्रेम और भाईचारा देख कर प्रभावित हुए। उन्होंने गांव आकर उत्सव को मनाने का फैसला लिया और तभी से नौल्था में हर साल डाट होली उत्सव मनाया जा रहा है। गांव के लोग इस ऐतिहासिक परंपरा के लिए अंग्रेजों तक से लोहा ले चुके हैं। नौल्था गांव की आबादी करीब 15 हजार है और पूरा गांव जहां रंगों में सराबोर होकर होली खेलता है, यहां की ऐतिहासिक होली को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और इसमें भाग लेते हैं।
गांव में झांकियां निकलती हैं
सुबह सबसे पहले देवर-भाभी के बीच होली खेली जाती है। इसके बाद गांव में विभिन्न तरह की झांकियां निकलती हैं। इसमें बाबा लाठे वाली की झांकी सबसे पहले निकलती है। दूसरे नंबर पर गौमाता की झांकी होती है। एक के बाद एक कुल 12 से 15 धार्मिक झांकियां निकाली जाती हैं।

नौल्था गांव में एक दूसरे को धकेलने की प्रैक्टिस करते युवक। यह रिहर्सल 15 दिन पहले ही शुरू हो जाती है।
जो टीम गिर गई, वो हारी
झांकियां निकालने के बाद दोपहर को गांव की सभी 6 चौपालों में बड़े-बड़े कढ़ाहों में बाजारों से लाया रंग पकाया जाता है। ये कढ़ाहे गांवों के ही होते हैं। रंगों को पकाने के लिए गर्म किया जाता है। कुछ ही देर बाद रंग पक जाते हैं और फिर गांव में डाट होली का उत्सव शुरू होता है। दो टोलियां एक-दूसरे के सामने हो जाती हैं। महिलाएं छतों गर्म रंग डालती हैं। जो टोली, दूसरी टोली को पीछे धकेल देती है, वो जीत जाती है।
बेटे की मौत पर भी टूटने नहीं दी थी परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार अंग्रेजों के समय में गांव में एक धूमन जैलदार होता था, जिसका एक बेटा सरदारा था। गांव में होली की पूरी तैयारी थी, लेकिन उसी समय धूमन के बेटे की मौत हो गई। गांव में शोक था और किसी ने होली नहीं खेली। धूमन ने गांव की परंपरा टूटती देखी तो चौपाल से एक बाल्टी रंग की भरी और बेटे की अर्थी पर डाल दी। सभी गांव वालों को कहा कि भगवान की मर्जी से आना-जाना होता है। त्योहार भुलाए नहीं जा सकते।
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भिवानी के बड़वा गांव में डेढ़ महीने चलती है होली, बसंत पंचमी से गणगौर तक चलती है परंपरा, होती है डफ प्रतियोगिता

हरियाणा के भिवानी जिले का बड़वा गांव अपनी अनूठी और डेढ़ महीने तक चलने वाली होली परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां बसंत पंचमी से शुरू होकर गणगौर तक होली का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें भव्य डफ प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण होती है। पढ़ें पूरी खबर…
विश्व कप 2026 की उलटी गिनती: ईरान युद्ध और मैक्सिको में हिंसा से उत्पन्न चुनौतियाँ
Sports
-Oneindia Staff
विश्व कप में 100 दिन शेष रहने के साथ, ईरान से जुड़ा मौजूदा संघर्ष, संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित टूर्नामेंट के लिए अतिरिक्त चुनौतियाँ लेकर आया है। आयोजक पहले से ही मैक्सिको में कार्टेल हिंसा, अमेरिका में कम हुए प्रशंसक उत्सव योजनाओं और उच्च टिकट कीमतों को लेकर आलोचना से जूझ रहे हैं। योग्य टीमों के अधिकारी इस सप्ताह अटलांटा में फीफा प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रहे हैं। टूर्नामेंट 11 जून को मैक्सिको सिटी में मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुकाबले के साथ शुरू होने वाला है। यह विश्व कप अब तक का सबसे बड़ा होगा, जिसमें 48 टीमें हिस्सा लेंगी, जो कतर में भाग लेने वाली 32 टीमों से अधिक है।

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति अक्सर विश्व कप जैसे वैश्विक खेल आयोजनों को धूमिल कर देती है, खासकर मैचों से पहले। 2022 में, कतर को प्रवासी श्रमिकों और LGBTQ+ अधिकारों के साथ इलाज को लेकर जांच का सामना करना पड़ा। रूस के 2018 के टूर्नामेंट को क्रीमिया के विलय और ब्रिटेन में जासूसी विषाक्तता जैसी घटनाओं ने चिह्नित किया। 2014 में ब्राजील और 2010 में दक्षिण अफ्रीका ने अपराध और सुरक्षा चिंताओं का सामना किया। 2026 का टूर्नामेंट अमेरिका और भाग लेने वाले देशों के बीच राजनीतिक तनाव के खिलाफ आयोजित किया गया है, जिनमें से कई टैरिफ या यात्रा प्रतिबंधों का सामना करते हैं।
विश्व कप में ईरान की स्थिति स्पष्ट नहीं है
ईरान को इंग्लेवुड, कैलिफ़ोर्निया में दो ग्रुप स्टेज मैच और सिएटल में एक मैच खेलने का कार्यक्रम है। हालाँकि, इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि ईरानी टीम भाग लेगी या नहीं, क्योंकि हाल ही में अमेरिकी और इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी और अन्य अधिकारियों की मौत हो गई। इन तनावों के बावजूद, ईरान ने टूर्नामेंट से हटने की घोषणा नहीं की है। ईरान को बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड के साथ ग्रुप में रखा गया है।
प्रशंसक उत्सवों को छोटा किया जा रहा है
पूरी दुनिया में प्रशंसक उत्सव दो दशकों से विश्व कप के अनुभव का अभिन्न अंग रहे हैं, जो टिकट के बिना प्रशंसकों को बड़ी स्क्रीन पर मैच का आनंद लेने की अनुमति देते हैं। हालाँकि, कुछ अमेरिकी योजनाओं को छोटा किया जा रहा है। न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी ने अपने फैन फेस्ट को रद्द कर दिया, जबकि हर टूर्नामेंट दिवस के लिए एक कार्यक्रम के लिए टिकट बेच रहा था। सिएटल ने अपने उत्सव के आकार को कम कर दिया और बोस्टन ने अपने कार्यक्रम को 16 दिनों तक छोटा कर दिया। मियामी की मेजबानी समिति अपना कार्यक्रम रद्द कर सकती है यदि जल्द ही संघीय धन सुरक्षित नहीं किया गया।
फॉक्सबोरो गेम्स को खतरा
मैसाचुसेट्स के फॉक्सबोरो में न्यू इंग्लैंड पैट्रियट्स स्टेडियम 13 जून को हैती-स्कॉटलैंड से शुरू होकर 9 जुलाई को क्वार्टर फाइनल के साथ समाप्त होने वाले सात विश्व कप मैचों की मेजबानी करने वाला है। हालाँकि, फॉक्सबोरो के सिलेक्ट बोर्ड ने 17 मार्च तक पुलिस और अन्य खर्चों के लिए USD 7.8 मिलियन का भुगतान करने तक परमिट जारी करने से इनकार कर दिया है। शहर का दावा है कि उसे बोस्टन के साथ फीफा के मेजबानी समझौते में शामिल नहीं किया गया था।
फीफा की टिकट कीमतों के खिलाफ विरोध
फीफा के पास विश्व कप मैचों के लिए लगभग 7 मिलियन सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन पिछले महीने 500 मिलियन टिकट अनुरोध प्राप्त हुए। फीफा अध्यक्ष गियानी इन्फेंटिनो द्वारा बिक जाने के दावों के बावजूद, कुछ प्रशंसकों को एक अतिरिक्त 48 घंटे की टिकट बिक्री विंडो की पेशकश करने वाले ईमेल मिले। दिसंबर में टिकट की कीमतें USD 8,680 तक पहुँच गईं। आलोचना के बाद, फीफा वफादार प्रशंसकों के बीच वितरण के लिए राष्ट्रीय संघों को प्रति गेम सीमित संख्या में USD 60 के टिकट प्रदान करेगा।
मैक्सिको में कार्टेल हिंसा
एक कार्टेल नेता को सेना द्वारा मारे जाने के बाद हाल ही में जालिस्को में हुई हिंसा के बाद एक सह-मेजबान के रूप में मैक्सिको की क्षमता की जांच की जा रही है। जालिस्को की राजधानी गुआडालाजारा, चार ग्रुप स्टेज मैचों की मेजबानी करने वाली है। इन चिंताओं के बावजूद, मैक्सिकन अधिकारी आश्वासन देते हैं कि विश्व कप बिना किसी समस्या के आगे बढ़ेगा। राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम ने कहा कि टूर्नामेंट में भाग लेने वाले प्रशंसकों के लिए कोई खतरा नहीं है। फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो ने मेजबान के रूप में मैक्सिको में विश्वास व्यक्त किया।
With inputs from PTI
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