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No Eid At Al Aqsa: ईद के लिए बंद रही अल-अक्सा मस्जिद, नामाजी बोले- ‘हमसे छीन ली मस्जिद, तब हुआ तहस-नहस’


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oi-Siddharth Purohit

No Eid At Al Aqsa: यरूशलेम में इस बार की ईद वैसी नहीं रही जैसी हर साल होती है। 1967 के बाद यह पहला मौका है जब रमज़ान खत्म होने के बाद भी अल-अक्सा मस्जिद के दरवाजों पर ताला लटका मिला। इजरायली अधिकारियों के इस फैसले ने फिलिस्तीनियों बेहद दुखी कर दिया। आलम यह था कि लोग जिस मस्जिद के अंदर सजदा करना चाहते थे, उन्हें उसकी सीलों और बैरिकेड्स के बाहर सड़क पर ही नमाज़ अदा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पुराने शहर की गलियों में ‘No Entry’

ईद की सुबह होते ही इजरायली पुलिस ने यरूशलेम के ‘ओल्ड सिटी’ के सभी एंट्री पॉइंट्स पर भारी बैरिकेडिंग कर दी। सैकड़ों की तादाद में आए नमाजी जब वहां पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। नतीजा यह हुआ कि लोगों ने मस्जिद की दीवारों और पुलिस के घेरे के ठीक बाहर ही नमाज पढ़ी। धार्मिक आस्था और सुरक्षा पाबंदियों के बीच यह सीधा टकराव साफ नजर आ रहा था।

No Eid At Al Aqsa

सुरक्षा का बहाना या बड़ी साजिश?

इस पूरे मामले की जड़ 28 फरवरी से शुरू हुई, जब इजरायली अधिकारियों ने ईरान के साथ बढ़ते सुरक्षा खतरों का हवाला देते हुए मस्जिद परिसर को सील करना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि यह एक ‘सिक्योरिटी मेजर’ है ताकि ईरान के साथ चल रहे टकराव के बीच कोई अनहोनी न हो। लेकिन हजारों फिलिस्तीनियों के लिए यह उनके धार्मिक अधिकारों पर सीधा हमला है, जिन्हें अब पुराने शहर के गेट्स पर ही रुकना पड़ रहा है। स्थानीय मुस्लिमों ने इस ईद को उनके जीवन का सबसे दुखद दिन बताया।

ईद पर भी गिरफ्तारियां

तनाव तब और बढ़ गया जब सुबह 6 बजे इजरायली सेना ने हेरोड्स गेट से लोगों को अंदर जाने से रोका। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कथित तौर पर स्टन ग्रेनेड्स का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान कम से कम सात फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया। पूरे शहर में भारी सुरक्षा और चप्पे-चप्पे पर तलाशी अभियान की वजह से पुलिस और जनता के बीच झड़प का डर हर पल बना हुआ था।

ईद पर सिर्फ दवा और रोटी की दुकानें खुलीं

पुराने शहर के व्यापारियों के लिए यह ईद किसी बुरे सपने जैसी रही। इजरायली सेना ने ज्यादातर दुकानों को बंद रखने का आदेश दिया था। केवल फार्मेसी और जरूरी राशन की दुकानों को ही छूट मिली। स्थानीय दुकानदारों से लेकर आम आदमी तक सब बुरी तरह परेशान हैं और आम चीजों के लिए तरस रहे हैं।

अल-अक्सा के करीब गिरी ईरानी मिसाइल

ईद से पहले जो पुराना शहर रौनक से गुलजार रहता था, वह इस बार एकदम सुनसान था। लेकिन दोपहर में इस खामोशी को एक जोरदार धमाके ने तोड़ दिया। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) के मुताबिक, एक ईरानी मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया था, जिसके मलबे टेंपल माउंट से महज 400 मीटर दूर यहूदी क्वार्टर के एक कार पार्किंग में गिरे। गाड़ियों को नुकसान तो हुआ, लेकिन अच्छी बात यह रही कि कोई जान नहीं गई।

क्या बदला जा रहा है अल-अक्सा का इतिहास?

फिलिस्तीनियों को डर है कि सुरक्षा और तनाव तो सिर्फ एक बहाना है। असली मकसद अल-अक्सा मस्जिद (जिसे मुसलमान अल-हरम अल-शरीफ कहते हैं) पर पूरी तरह इजरायली कंट्रोल कड़ा करना है। इसी परिसर में सातवीं सदी का ‘डोम ऑफ द रॉक’ भी है। वहीं यहूदियों के लिए यह टेंपल माउंट है, जहां प्राचीन काल के दो पवित्र यहूदी मंदिर हुआ करते थे। यह जगह सदियों से आस्था और विवाद का केंद्र रही है।

अरब लीग का गुस्सा

यरूशलेम के पूर्व ग्रैंड मुफ्ती शेख एक्रिमा साबरी ने मुसलमानों से अपील की कि वे मस्जिद के जितना करीब हो सके, वहीं नमाज अदा करें। दूसरी ओर, अरब लीग ने इस बंदी को इंटरनेशनल लॉ का मज़ाक बताया है। उनका मानना है कि इबादत की आजादी छीनना पूरे मिडिल ईस्ट में हिंसा की आग को और भड़का सकता है।

अमेरिका का साथ देने वाले इस्लामिक देशों ने जताई कड़ी आपत्ति

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC), अरब लीग और अफ्रीकी संघ ने एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर इस कदम की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे यरूशलेम के ऐतिहासिक और कानूनी स्टेटस का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि रमज़ान में मस्जिद बंद करना दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की भावनाओं को उकसाने जैसा है।

वहीं, वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों ने इसे डिजास्टर बताया। लोगों ने ये भी कहा कि पुलिस तो पुलिस आम इजरायली भी फिलिस्तीनियों का पीछा कर उन्हें डराते हैं ताकि वे मस्जिद में न आ सकें। इसके अलावा अगर मस्जिद के आस-पास भी नमाज पढ़ते हैं तो इजरायली युवा आकर उनके पास उत्पात मचाना शुरू कर देते हैं। फिलीस्तीनियों ने ये तक कह दिया कि हमसे हमारी अल-अक्सा मस्जिद अब यहूदी सरकार ने छीन ली है। लिहाजा इस बार ईद अल-अक्सा मस्जिद से काफी दूर ही रही।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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