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oi-Siddharth Purohit
North Korea: इधर तरफ पूरी दुनिया अमेरिका-इजरायल और ईरान की खबरों पर टकटकी लगाए हुए थी कि उसी बीच एक खबर आई जिसने अमेरिका के पैरों तले जमीन खिसका दी। दरअसल एक अमेरिकी जांच में पता चला कि उत्तर कोरिया से जुड़े लोग नकली टेक कर्मचारी बनकर अमेरिकी कंपनियों में घुस रहे थे। उनका असली मकसद कंपनियों में काम करना नहीं, बल्कि वहां से पैसा कमाकर उसे गैर-कानूनी तरीके से अपने देश प्योंगयांग भेजना था।
जॉब के नाम पर एंट्री, फिर ब्लैकमेल का रैकेट
जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े करीब 20 लोगों की पहचान की गई है। इन लोगों ने मिलकर लगभग 1,60,000 नौकरियों के लिए आवेदन किया। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन करने के बाद वे कई अमेरिकी कंपनियों में नौकरी पाने में सफल भी हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन लोगों ने सिर्फ नौकरी ही नहीं की, बल्कि इसके जरिए धोखाधड़ी, डेटा चोरी और ब्लैकमेल जैसे काम भी किए। आम भाषा में कहें, तो ये सभी लोग नोर्थ कोरिया सरकार के लिए किसी न किसी तरह की जासूसी कर रहे थे।

कहां से से शुरू हुआ शक?
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब वर्जीनिया की एक कॉर्पोरेट सिक्योरिटी कंपनी Nisos को “जो” नाम के एक जॉब कैंडिडेट पर शक हुआ। यह व्यक्ति बहुत ज्यादा एक्टिव था-एक साथ कई नौकरियों के लिए अप्लाई कर रहा था और हर दिन दर्जनों आवेदन भेज रहा था। उसकी यह असामान्य एक्टिविटी जांच का कारण बनी। यहीं से जांच की शुरुआत हुई।
डिटेल में मिली जानकारी
जब एक के बाद एक कई गड़बड़ियां सामने आईं तो कंपनी ने गहराई से जांच शुरू की। इस जांच में जो सामने आया, उसने एक्सपर्ट्स को एक ऐसे नेटवर्क की अंदरूनी जानकारी दी, जिसके बारे में पहले कभी इतनी डिटेल में जानकारी नहीं मिली थी।
लैपटॉप ट्रैकिंग से खुली पूरी टीम की पोल
जांच के दौरान कंपनी ने कर्मचारियों को दिए गए लैपटॉप्स की एक्टिविटी पर नजर रखी। इससे पता चला कि यह कोई अकेला व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरी टीम थी जो मिलकर काम कर रही थी। इनके बीच लगातार बातचीत, काम का तालमेल और आपसी समझ दिखी, जिससे साफ हो गया कि यह एक संगठित नेटवर्क है।
पहली बार नोर्थ कोरिया का इतना बड़ा नेटवर्क मिला
Nisos के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर जारेड हडसन ने कहा कि इस जांच से उन्हें इस नेटवर्क का इन्फ्रास्ट्रक्चर, काम करने का तरीका और अंदरूनी सिस्टम तक की जानकारी मिली। उनके मुताबिक, यह पहली बार था जब किसी को उत्तर कोरिया के इस तरह के रोजगार धोखाधड़ी नेटवर्क की इतनी गहराई से जानकारी मिली।
दोस्तों की तरह करते बातें, लेकिन…
हैरानी की बात यह है कि ये लोग दिखने में बिल्कुल सामान्य कर्मचारियों जैसे थे। वे आपस में GIF शेयर करते थे, अंग्रेजी में बात करते थे और यहां तक कि ऑनलाइन दोस्ती और मिलने-जुलने की बातें भी करते थे। लेकिन इस सामान्य व्यवहार के पीछे उनका मकसद बेहद खतरनाक था।
डेटा चोरी से लेकर ब्लैकमेल तक के केस
कुछ मामलों में इन लोगों ने अमेरिकी सैन्य तकनीक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी चुरा ली। वहीं कुछ मामलों में उन्होंने सरकारी सिस्टम तक पहुंच बना ली। कई बार उन्होंने कंपनियों को उनका डेटा लीक करने की धमकी देकर पैसे भी वसूले। खासतौर पर उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी कंपनियों को ज्यादा निशाना बनाया।
क्रिप्टोकरेंसी बनी सबसे बड़ा टारगेट
क्रिप्टोकरेंसी को ट्रैक करना मुश्किल होता है, इसलिए यह उनके लिए सबसे आसान और फायदेमंद तरीका बन गया। इसी वजह से उन्होंने इस सेक्टर को ज्यादा टारगेट किया और यहां से भारी रकम कमाई।\
अमेरिका से लूटा पैसा नोर्थ कोरिया की मिसाइलों में लगा
जांच और गवाही के अनुसार, कुछ लोगों ने सालाना 3 लाख डॉलर (करीब 2.5 करोड़ रुपये) तक कमाए। इसमें से लगभग 90 प्रतिशत पैसा उत्तर कोरियाई सरकार को भेज दिया जाता था। यानी ये लोग सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए काम कर रहे थे। साथ ही कमाए गए पैसों को उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को फंड करने में लगाते थे। यानी यह सिर्फ साइबर क्राइम नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। अब ऐसे में कंपनियों पर लापरवाही और नेशनल सिक्योरिटी को कॉम्प्रोमाइज करने जैसे आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।
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