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oi-Siddharth Purohit
OI Exclusive: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में कश्मीर के लोगों ने ईरान के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए खुलकर दान दिया है। लेकिन अब ऐसी खबर सामने आ रही है कि कुछ अलगाववादी तत्व इस मदद के नाम पर चंदा इकठ्ठा कर भारत विरोधी गतिविधियों में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
कैसे हुई मदद की शुरुआत?
ईरान के लिए यह समर्थन 14 मार्च को शुरू हुआ, जब नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने X पर मानवीय सहायता की अपील की। इसके साथ ही दान के लिए बैंक अकाउंट की जानकारी भी साझा की गई। इसके बाद कश्मीर से नकद, सोना, तांबा और यहां तक कि पशु भी दान में दिए जाने लगे। लोगों ने सामूहिक जगहों पर भी चंदा जुटाया और डोर-टू-डोर कैंपेन चलाकर भी लोगों से मदद की मांग की। कुछ लोगों ने ये दान डिजिटल पेमेंट के जरिए दिया तो कुछ ने बर्तन, गहने, बाइक या फिर कैश के रूप में भी दिया। यहां तक कि लोगों ने अपनी घर के बहन-बेटियों की शादी के लिए इकठ्ठा किया सोना भी दान कर दिया।

कितना पैसा और सामान हुआ इकट्ठा?
जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, करीब 17.91 करोड़ रुपये के साथ भारी मात्रा में सोना और अन्य कीमती सामान जमा हुआ है। यह रकम सीधे ईरानी दूतावास के खाते में जमा पैसे से अलग है।
कहां से आया सबसे ज्यादा चंदा?
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, अकेले बडगाम से 9.4 करोड़ रुपये, बारामूला से 4.5 करोड़ रुपये और श्रीनगर से करीब 2 करोड़ रुपये का दान आया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि लोगों ने बड़े स्तर पर चंदा जुटाया है। इस दान में धार्मिक भावनाएं भी शामिल थीं। कई लोगों ने ज़कात और सदक़ा अल-फ़ित्र के तहत इसे अपना कर्तव्य समझकर दान दिया, ताकि ईरान में युद्ध से पीड़ित लोगों की मदद की जा सके। इसमें अमीर से लेकर गरीब तक सभी लोगों ने दान दिया।
दान के बीच कैसे एक्टिव हुए मिलिटेंट?
भारतीय जांच एजेंसियां इस बड़े पैमाने पर हुए दान को लेकर सतर्क हैं। स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को शक है कि कुछ बिचौलिए और संदिग्ध संगठन लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर पैसे का गबन कर रहे हैं।
शिया समुदाय को बनाया गया निशाना?
वनइंडिया के सूत्र के मुताबिक, इन बिचौलियों पर खासकर शिया समुदाय के लोगों से करोड़ों रुपये और कीमती सामान लेने का आरोप है। आशंका है कि इस पैसे का इस्तेमाल निजी फायदे या अलगाववादी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
बिचौलियों के जरिए पैसा देना हो सकता है खतरनाक
कश्मीर के ही एक अधिकारी से हुई बात के आधार पर सूत्र ने ये भी बताया कि ज्यादातर लोग ईमानदारी से दान कर रहे हैं। लेकिन जो लोग बिचौलियों के जरिए पैसा दे रहे हैं, उनका पैसा दूतावास तक पहुंचेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। पैसे जुटाने के नाम पर कुछ ऐसे तत्व भी इस अभियान में शामिल हो गए हैं, जिससे पैसा गलत हाथों में जा सकता है। इससे आतंकवादी या अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का खतरा है। जिससे इस पैसे का भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने का खतरा बना हुआ है।
मिलिटेंट उठा सकते हैं फंड का फायदा
सूत्र का कहना है कि कुछ लोग ईरान की मदद के नाम पर पैसा इकट्ठा कर रहे हैं, लेकिन उसे निजी फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। मिलिटेंसी से जुड़े कुछ लोगों की भी इसमें भागीदारी की आशंका है। जिसपर, केंद्र और जम्मू-कश्मीर की एजेंसियां इस पूरे मामले पर नजर रख रही हैं। अगर कोई व्यक्ति बिना जांच के दान करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
IRGC और अलगाववादियों के लिंक का शक
सूत्र ने बताया कि एक बिचौलियों का एक नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) और कश्मीर के अलगाववादी तत्वों से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं। जिसमें श्रीनगर के बागवानपुरा के रहने वाले हकीम सज्जाद को इस नेटवर्क का मैन सोर्स बताया गया। वहीं, सैयद रूहुल्लाह रिजवी का नाम भी सामने आया है, जो ईरान में रहते हैं और इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने के शक के घेरे में हैं।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
मार्च 2023 में SIA ने एक केस में पाया कि मौलवी सरजन बरकती ने 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी, जिसे बाद में भारत-विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। बरकती 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद भड़काऊ भाषणों के कारण चर्चा में आए थे। एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने Unknown Sources से पैसा जुटाया और उसे संदिग्ध गतिविधियों में इस्तेमाल किया। अब ऐसे शख्स
आधे पैसे के गलत इस्तेमाल होने का खतरा
एजेंसियों का मानना है कि इकट्ठा किए गए पैसे का करीब आधा हिस्सा कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए पेमेंट नेटवर्क भी बनाया जा रहा है। जांच एजेंसियों ने साफ कहा है कि लोगों को सावधान रहना चाहिए कि उनका पैसा गलत हाथों में न जाए। उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।
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