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oi-Divyansh Rastogi
Pakistan Lockdown: पाकिस्तान में ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध का सबसे भयानक झटका अब आम जनता की जिंदगी तक पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति रुकने से ईंधन संकट गहरा गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने 7 अप्रैल 2026 से देशव्यापी ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ लगा दिया है। इसका नाम भले ही ‘स्मार्ट’ रखा गया हो, लेकिन हकीकत में यह आम लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है। बाजार, शॉपिंग मॉल, रेस्तरां, बेकरी और शादी हॉल समय से पहले बंद होने लगे हैं। कुछ इलाकों में स्कूलों पर भी असर पड़ा है।
जियो न्यूज और सरकारी बयान के मुताबिक, यह फैसला सोमवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। मकसद सिर्फ एक है कि ईंधन बचाना, बिजली की खपत कम करना और वैश्विक तेल संकट से निपटना। लेकिन पाकिस्तान की पहले से ही लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर यह फैसला कितना भारी पड़ रहा है, यह देखकर हर कोई हैरान है।

‘Smart Lockdown’ What’s Closed: क्या-क्या बंद? ‘Smart Lockdown’ की पूरी डिटेल
- सरकार के आदेश के अनुसार, बाजार, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर और जरूरी सामान की दुकानें – रात 8 बजे बंद।
- यह नियम पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर लागू है। सिर्फ सिंध प्रांत को छूट दी गई है। खैबर पख्तूनख्वा के कुछ संभागीय मुख्यालयों में दुकानें रात 9 बजे तक खुली रह सकती हैं, लेकिन ज्यादातर जगहों पर सख्ती बरती जा रही है।
- बेकरी, रेस्तरां, तंदूर, खाने-पीने की दुकानें और विवाह हॉल – रात 10 बजे बंद।
- निजी घरों में शादी समारोह – 10 बजे के बाद पूरी तरह प्रतिबंधित। बड़े आयोजन अब असंभव हो गए हैं।
अस्पताल, दवाखाने और फार्मेसी को छूट दी गई है ताकि जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। कुछ प्रांतों में स्कूलों पर भी आंशिक असर पड़ा है कि जहां ईंधन बचाने के लिए स्मार्ट क्लासेस या छुट्टियां घोषित की जा रही हैं। ये उपाय तत्काल प्रभाव से लागू हैं। जियो न्यूज के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकारें पहले से ही ऐसे आदेश जारी कर चुकी थीं। अब केंद्र ने पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया है।
क्यों आया यह संकट? Strait of Hormuz का तूफान
ईरान-US-इजरायल युद्ध 28 फरवरी 2026 से चरम पर है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (दुनिया के 20-25% तेल का रास्ता) को बाधित कर दिया। पाकिस्तान मुख्य रूप से सऊदी अरब और UAE से तेल आयात करता है। जहाज रुक गए तो ईंधन की कमी घर-घर पहुंच गई।
اسلام آباد: 6 اپریل 2026
وزیراعظم محمد شہباز شریف نے پیٹرولیم مصنوعات ، توانائی کی بچت اور کفایت شعاری کے اقدامات کے نفاذ کے حوالےسے اہم جائزہ اجلاس کی صدارت کی. صوبہء پنجاب، خیبر پختونخوا، بلوچستان ، اسلام آباد کیپیٹل ٹیریٹری ، گلگت بلتستان اور آزاد جموں و کشمیر میں بازار،… pic.twitter.com/BEsPreuQWa
— Prime Ministers Office (@PakPMO) April 6, 2026 “>
नतीजा:
- 6 मार्च: पेट्रोल और डीजल में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी।
- 2 अप्रैल: पेट्रोल 458.41 रुपये/लीटर, डीजल 520.35 रुपये/लीटर पहुंच गया।
- 3 अप्रैल: पेट्रोलियम लेवी घटाकर पेट्रोल की कीमत अस्थायी तौर पर 378 रुपये/लीटर कर दी गई, लेकिन राहत अल्पकालिक साबित हुई।
सरकार ने पहले ही 4-दिवसीय कार्य सप्ताह, ईंधन भत्तों में कटौती और सरकारी खर्च में 20% कमी जैसे उपाय कर लिए थे। अब ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ आखिरी हथियार है।
आम लोगों पर क्या असर? ‘दाने-दाने को मोहताज’ की स्थिति
रात 8 बजे बाजार बंद होने से दिनभर की खरीदारी में भीड़ बढ़ गई है। गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है। ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है, किराना सामान, दाल-चावल, सब्जी-फल की कीमतें आसमान छू रही हैं। शादी-ब्याह जैसे सामाजिक आयोजन अब रात 10 बजे तक सिमट गए हैं। लोग कह रहे हैं कि रात को खाना खाने का भी समय नहीं बचा।
कुछ इलाकों में स्कूल बंद या ऑनलाइन शिफ्ट होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। गिलगित और मुजफ्फराबाद में सरकार ने एक महीने के लिए मुफ्त सार्वजनिक परिवहन की घोषणा की है, लेकिन यह सिर्फ दो शहरों तक सीमित है। बाकी पाकिस्तान में लोग बसों और रिक्शों के लिए घंटों लाइन में खड़े हैं। व्यापारी नाराज हैं। रेस्तरां मालिक कह रहे हैं कि रात 10 बजे बंद होने से उनका कारोबार आधा हो गया। छोटे दुकानदारों के लिए रात 8 बजे शटर गिराना रोजी-रोटी का संकट बन गया है।
UAE को 3.5 अरब डॉलर कर्ज चुकाने की मजबूरी
संकट की जड़ सिर्फ तेल नहीं। ‘खालसा वॉक्स’ रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अप्रैल 2026 के अंत तक UAE को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाने जा रहा है। 2019 में दिए गए इस लोन की तत्काल वापसी की मांग की गई। पाकिस्तान ने दो साल की मोहलत और ब्याज दर 6.5% से घटाकर 3% करने की कोशिश की, लेकिन UAE ने इनकार कर दिया।
सरकार इसे “संप्रभु गौरव” बता रही है, लेकिन रिपोर्ट कहती है कि यह “भिखारी की थाली” वाली छवि छुपाने का बहाना है। विदेशी मुद्रा भंडार पहले से कमजोर हैं। ईंधन आयात के लिए डॉलर चाहिए, लेकिन कर्ज चुकाने से भंडार और पतले हो रहे हैं। IMF और वैश्विक बाजारों पर असर पड़ा है।
सरकार की अन्य मितव्ययिता उपाय
- 4-दिवसीय कार्य सप्ताह का प्रस्ताव
- सरकारी विभागों में 20% खर्च कटौती
- ईंधन भत्तों में कमी
उप प्रधानमंत्री इशाक डार और योजना मंत्री अहसान इकबाल ने आपात बैठक की। लेकिन विपक्ष इसे ‘मजबूरी का लॉकडाउन’ बता रहा है।
पाकिस्तान की नाजुक अर्थव्यवस्था का सच
पाकिस्तान दशकों से राजकोषीय कुप्रबंधन, अभिजात वर्ग के नियंत्रण और कर आधार न बढ़ा पाने की वजह से बाहरी कर्ज पर निर्भर है। ईरान-US जंग ने इस निर्भरता को नंगा कर दिया। जहां भारत, नेपाल और बांग्लादेश ने तेल संकट से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाए, पाकिस्तान अभी भी ‘मध्यस्थ’ की भूमिका निभाने का दावा कर रहा है, लेकिन घरेलू मोर्चे पर फंस गया है।
यह स्मार्ट लॉकडाउन अल्पकालिक राहत तो दे सकता है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान नहीं। अगर होर्मुज संकट लंबा चला तो मुद्रास्फीति बढ़ेगी, विकास रुक जाएगा और गरीबी बढ़ेगी। रिपोर्ट्स चेतावती हैं कि दिखावटी संप्रभुता से ज्यादा स्थायी अर्थव्यवस्था बनानी होगी।
आगे क्या?
सरकार का कहना है कि स्थिति सुधरने तक ये उपाय जारी रहेंगे। लेकिन व्यापारियों और आम लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। अगर ईंधन की कमी और गहराई तो और सख्त कदम आ सकते हैं कि जैसे वीकेंड लॉकडाउन या स्कूलों की लंबी छुट्टियां। पाकिस्तान की कहानी सिर्फ एक देश की नहीं, बल्कि उन सभी कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की है जो वैश्विक संकट में सबसे पहले हिल जाती हैं। ईरान-US जंग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि तेल सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। पाकिस्तान के लोग इस संकट से कैसे निकलेंगे? क्या सरकार कोई स्थायी समाधान लाएगी? या फिर ‘गरिमा’ के नाम पर और कर्ज लेना पड़ेगा? लगातार नजर रखे हुए है। तेल संकट का भारत पर असर, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का भविष्य और अगले अपडेट के लिए जुड़े रहें। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें।
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