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Petrol Diesel Price: सरकार ने ₹10 घटाई एक्साइज ड्यूटी, क्या अब सस्ता मिलेगा पेट्रोल-डीजल? हर सवाल का जवाब


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oi-Pallavi Kumari

Petrol Diesel Price Explain: देश में पेट्रोल-डीजल को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती करते हुए पेट्रोल पर टैक्स ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर और डीजल पर ₹10 से सीधे शून्य कर दिया है। यानी सरकार ने पेट्रोल, डीजल पर 10 रुपये घटाई एक्साइज ड्यूटी घटाकर राहत दी है।

यह फैसला 26 मार्च 2026 से तुरंत लागू भी कर दिया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब आम जनता को पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलेगा? सरकार के इस फैसले के मायने क्या है? आइए इस पूरे फैसले को डिकोड करते हैं।

Petrol Diesel Price Govt Cut Excise Duty 10 Rupees

1️⃣ सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी क्यों घटाई? (Why Government Cut Excise Duty)

मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। पिछले एक महीने में क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।

ऐसे में दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल 20% से 50% तक महंगे हो गए। भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे-या तो सीधे दाम बढ़ा दिए जाएं या फिर खुद टैक्स कम करके जनता को बचाया जाए। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के मुताबिक सरकार ने दूसरा रास्ता चुना, यानी खुद राजस्व का नुकसान उठाकर आम लोगों को महंगाई से बचाने की कोशिश की गई।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने एक्स पोस्ट में कहा,

”पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बहुत तेजी से बढ़ी है। यह करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ा है। दक्षिण-पूर्व एशिया में 30% से 50% तक बढ़ोतरी, उत्तरी अमेरिका में करीब 30%, यूरोप में लगभग 20%, अफ्रीका में 50% तक कीमतें बढ़ गई हैं। तो ऐसे में इस स्थिति में भारत सरकार के पास दो रास्ते थे बाकी देशों की तरह पेट्रोल-डीजल के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा दिए जाएं,या फिर खुद नुकसान उठाकर आम लोगों को महंगाई से बचाया जाए सरकार ने दूसरा रास्ता चुना, यानी अपनी कमाई (टैक्स) कम करके जनता को राहत देने की कोशिश की। सरकार ने यह तय किया कि वह अपने खजाने पर बोझ डालेगी, लेकिन आम लोगों पर अचानक महंगाई का झटका नहीं आने देगी। इसी वजह से पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की गई।”

International crude prices have gone through the roof in the last 1 month from around 70 dollars/barrel to around 122 dollars/barrel. Consequently, petrol and diesel prices for consumers have gone up all over the world. Prices have increased by around 30%-50% in South East Asian…

— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) March 27, 2026 “>

2️⃣ क्या भारत में पेट्रोल-डीजल ₹10 सस्ता हो जाएगा? (Will Petrol-Diesel Prices Drop by ₹10?)

जवाब: नहीं, ऐसा तुरंत होना मुश्किल है। भले ही सरकार ने टैक्स कम किया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम सीधे सरकार तय नहीं करती। ये काम इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां करती हैं। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल पंप पर कीमतें कम होने की संभावना बहुत कम है। यानी आपको पेट्रोल और डीजल उसी दाम पर मिलेंगे। हां लेकिन अब महंगे भी नहीं होंगे। मिडिल ईस्ट में जारी जंग की वजह से जो कच्चे तेल के भाव बढ़े थे…उसका असर भारत में आम नागरिक पर नहीं होगा।

3️⃣ तेल कंपनियां दाम क्यों नहीं घटाना चाहतीं? (Why Oil Companies Not Cutting Prices?)

जवाब: कंपनियां भारी नुकसान झेल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण कंपनियां महंगा कच्चा तेल खरीद रही थीं, लेकिन उन्होंने घरेलू बाजार में दाम नहीं बढ़ाए। अब एक्साइज ड्यूटी में कटौती से जो राहत मिली है, उसका इस्तेमाल वे अपने नुकसान की भरपाई में करेंगी।

हरदीप पुरी ने एक्स पर कहा,

”इस समय तेल कंपनियां भारी नुकसान में हैं, पेट्रोल पर करीब ₹24 प्रति लीटर का घाटा, डीजल पर करीब ₹30 प्रति लीटर का घाटा सरकार ने टैक्स घटाकर कंपनियों का यह नुकसान कम करने की कोशिश की है, ताकि वे अचानक कीमतें न बढ़ाएं। सरकार ने टैक्स घटाकर कंपनियों का यह नुकसान कम करने की कोशिश की है, ताकि वे अचानक कीमतें न बढ़ाएं। सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात (Export) पर भी टैक्स लगा दिया है। इसका मतलब है कि अगर कोई रिफाइनरी विदेश में पेट्रोल-डीजल बेचेगी, तो उसे टैक्स देना होगा। इसका मकसद यह है कि देश के अंदर पर्याप्त सप्लाई बनी रहे और घरेलू बाजार में कमी न हो।”

4️⃣ तेल की कीमत कैसे तय होती है? (How Fuel Prices Are Calculated?)

पेट्रोल-डीजल की कीमत कई चीजों से मिलकर बनती है: कच्चे तेल की कीमत + रिफाइनिंग लागत + ट्रांसपोर्ट + कंपनी का मार्जिन + केंद्र का टैक्स + राज्य का टैक्स (VAT) + डीलर कमीशन एक आसान नियम समझिए-अगर कच्चा तेल 1 डॉलर महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल करीब 50-60 पैसे प्रति लीटर महंगा हो जाता है। अगर कीमत 30 डॉलर बढ़ जाए, तो लागत ₹15-₹18 तक बढ़ सकती है।

5️⃣ प्राइवेट कंपनियां क्या कर रही हैं?

जवाब: प्राइवेट कंपनियां पहले से ही दाम बढ़ा रही हैं। सरकारी फैसले से ठीक पहले नायरा एनर्जी ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा कर दिया। भोपाल में इसका पेट्रोल ₹111.72 और डीजल ₹94.88 तक पहुंच गया। इससे साफ है कि निजी कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर तेल बेचना मुश्किल हो रहा है।

6️⃣ सरकार को कितना नुकसान होगा?

जवाब: सरकार को भारी राजस्व नुकसान होगा। एक्साइज ड्यूटी कम करने का मतलब है कि सरकार की टैक्स से होने वाली कमाई घटेगी। लेकिन सरकार का कहना है कि यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि अंतरराष्ट्रीय झटके का पूरा असर आम जनता पर न पड़े।

7️⃣ क्या राज्य सरकारें भी VAT घटाएंगी?

जवाब: यह अभी साफ नहीं है, लेकिन दबाव जरूर बढ़ेगा। अगर राज्य सरकारें भी VAT कम करती हैं, तभी लोगों को ₹2 से ₹5 तक की असली राहत मिल सकती है।

8️⃣ क्या कंपनियां महंगा होने पर बढ़ाती हैं, लेकिन सस्ता होने पर नहीं घटातीं? (Do Companies Delay Price Cuts?)

जवाब: हां, काफी हद तक यह सही है। जब कच्चा तेल अचानक महंगा होता है, तो कंपनियां तुरंत दाम नहीं बढ़ातीं और घाटा उठाती हैं। लेकिन जब कीमतें गिरती हैं, तो वे पहले पुराने घाटे की भरपाई करती हैं। इसके अलावा, सरकार भी कई बार टैक्स बढ़ा देती है, जिससे सस्ता तेल होने का फायदा सीधे जनता तक नहीं पहुंच पाता।

9️⃣ भारत में तेल की स्थिति क्या है?

सरकार के मुताबिक भारत ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का स्टॉक कर लिया है। देशभर में पेट्रोल पंप पर ईंधन की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य है। हालांकि, कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण पैनिक बाइंग देखने को मिली है, जिससे मांग अचानक बढ़ गई है। पिछले दो दिनों में देशभर में पेट्रोल-डीजल की बिक्री 15% तक बढ़ी है, जबकि कुछ इलाकों में यह 50% तक पहुंच गई।

सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर बड़ा कदम जरूर उठाया है, लेकिन इसका सीधा फायदा आम लोगों को तुरंत मिलता नहीं दिख रहा। यह फैसला ज्यादा तौर पर तेल कंपनियों को राहत देने और भविष्य में कीमतों को बेकाबू होने से रोकने के लिए लिया गया है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात सुधरते हैं और राज्य सरकारें भी टैक्स घटाती हैं, तभी आम जनता को असली राहत मिल सकती है।





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