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Pharma Sector: मिडल ईस्ट संकट के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला, फार्मा सेक्टर को आयात शुल्क में 8.25% की छूट!


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oi-Kumari Sunidhi Raj

Indian Pharma Sector: मिडल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक सप्लाई चेन के साथ-साथ भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र पर भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। लाल सागर संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए भारत सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है।

सरकार ने फार्मा इंडस्ट्री को संबल देने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) में बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य दवाओं के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी घटकों की लागत को कम करना और घरेलू बाजार में जीवन रक्षक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट घटेगी, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारतीय दवा बाजार को स्थिरता भी मिलेगी।

Indian Pharma Sector

सप्लाई चेन की चुनौतियों पर सरकार का एक्शन

फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (Pharmexcil) के चेयरमैन नमित जोशी ने मौजूदा स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मध्य पूर्व के संकट ने वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की रणनीति चरणबद्ध तरीके से काम कर रही है:

प्रथम चरण: शुरुआत में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए LPG सिलेंडर और ईंधन की आपूर्ति को सुरक्षित किया, ताकि आम जनता की बुनियादी जरूरतें प्रभावित न हों।

द्वितीय चरण: अब सरकार का पूरा ध्यान इंडस्ट्री की जरूरतों पर है। दूसरे चरण के तहत उन कच्चे माल और रसायनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जो फार्मा उत्पादन के लिए अनिवार्य हैं।

लागत में 8.25% की सीधी बचत

नमित जोशी के मुताबिक, सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी में दी गई राहत इंडस्ट्री के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद:

  • विदेशों से मंगाए जाने वाले जरूरी सामानों पर अब कंपनियों को 8.25% तक की बचत होगी।
  • ड्यूटी घटने से उत्पादन की कुल लागत (Production Cost) में कमी आएगी, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहा दबाव कम होगा।

बाजार में दवाओं की उपलब्धता रहेगी बरकरार

इस नीतिगत बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। चेयरमैन ने आश्वस्त किया कि इस वित्तीय राहत से फार्मा कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने में सक्षम होंगी। इससे बाजार में जरूरी दवाओं की कमी का खतरा टल जाएगा और दवाओं की उपलब्धता सुचारू रूप से बनी रहेगी। सरकार का यह सक्रिय हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करता है कि बाहरी युद्ध या तनाव की स्थिति में भी भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र और दवा उद्योग मजबूती से खड़ा रहे।

With AI Inputs

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