भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत सरकारी प्रतिभूतियां खरीदकर बैंकिंग सिस्टम में 50,000 करोड़ रुपये की तरलता डाली। केंद्रीय बैंक ने एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।
ओएमओ खरीद के तहत सरकारी बॉन्ड खरीदे गए
आरबीआई ने ओएमओ खरीद के तहत विभिन्न अवधि के सरकारी बॉन्ड खरीदे, जिनमें 6.33% जीएस 2035 के 13,507 करोड़ रुपये, 6.01% जीएस 2030 के 13,494 करोड़ रुपये, 6.10% जीएस 2031 के 8,157 करोड़ रुपये, 7.30% जीएस 2053 के 6,955 करोड़ रुपये, 7.18% जीएस 2033 के 4,479 करोड़ रुपये, 6.92% जीएस 2039 के 2,304 करोड़ रुपये और 6.19% जीएस 2034 के 1,104 करोड़ रुपये के बॉन्ड शामिल हैं।
बैंकिंग सिस्टम को लेकर आरबीआई ने क्या बताया?
केंद्रीय बैंक के अनुसार, फिलहाल बैंकिंग सिस्टम में तरलता करीब 2.41 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष में है। इस महीने अग्रिम कर और जीएसटी भुगतान के कारण बैंकिंग सिस्टम से बड़ी राशि निकलने की आशंका को देखते हुए यह OMO नीलामी पहले ही घोषित की गई थी। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, चालू कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक केंद्रीय बैंक सरकारी प्रतिभूतियों की ओएमओ खरीद के जरिए लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपये की तरलता सिस्टम में डाल चुका है।
सरकार ने 6,309 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड वापस खरीदे
इस बीच, सरकार ने भी आरबीआई द्वारा आयोजित स्विच नीलामी में 6,309 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड वापस खरीदे और इसके बदले 6,431.79 करोड़ रुपये के नए बॉन्ड जारी किए।
सरकार ने जिन बॉन्ड को वापस खरीदा, उनमें 7.33% जीएस 2026 के 1,684 करोड़ रुपये, 5.74% जीएस 2026 के 1,035 करोड़ रुपये, 8.15% जीएस 2026 के 590 करोड़ रुपये और 8.24% जीएस 2027 के 3,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
नए बॉन्ड हुए जारी
इसके बदले सरकार ने 6.57% जीएस 2033 के 1,719.236 करोड़ रुपये, 7.62% जीएस 2039 के 986.526 करोड़ रुपये, 6.57% जीएस 2033 के 605.609 करोड़ रुपये और 7.40% जीएस 2062 के 3,120.426 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए।
यह फरवरी के बाद आरबीआई द्वारा आयोजित चौथी स्विच नीलामी है। बॉन्ड स्विच के जरिए सरकार निकट अवधि में परिपक्व होने वाले बॉन्ड को लंबी अवधि के बॉन्ड से बदलती है, जिससे अगले वित्त वर्ष में भुगतान का दबाव कम होता है।
अगले वित्त वर्ष में 5.47 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड परिपक्व होने वाले हैं, जबकि सरकार का सकल बाजार उधार पहले से ही 17.2 लाख करोड़ रुपये निर्धारित है। ऐसे में यह कदम परिपक्वता प्रोफाइल को संतुलित करने और भुगतान दायित्वों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद करेगा। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले की तीन स्विच नीलामियों में केंद्रीय बैंक 98,591.70 करोड़ रुपये के बॉन्ड वापस खरीद चुका है।



