पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच कच्चे तेल की भड़कती कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है, जिसका सीधा असर अब घरेलू बाजार पर पड़ने की आशंका है। आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद लगाए बैठे कर्जदारों को फिलहाल निराशा हाथ लग सकती है। विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों के अनुसार, विकास की गति और महंगाई के बीच सटीक संतुलन साधने के लिए केंद्रीय बैंक इस बार ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाएगा और रेपो रेट को जस का तस बनाए रखेगा।
कब से कब तक होनी है आरबीआई एमपीसी की बैठक?
पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच बाजार की निगाहें वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिक गई हैं, जिसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 6 से 8 अप्रैल 2026 तक होगी। इस महत्वपूर्ण बैठक के परिणाम और मुख्य नीतिगत दरों (रेपो रेट) पर रिजर्व बैंक के अंतिम निर्णय की घोषणा 8 अप्रैल 2026 को की जाएगी। विदेशी बाजारों में ब्रेंट क्रूड ऑयल के 55% तक महंगे होने और घरेलू स्तर पर विनिर्माण पीएमआई के चार साल के सबसे निचले स्तर पर आने के कारण रिजर्व बैंक के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
आइए जानते हैं कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति शृंखला में रुकावटों के बीच देश की अर्थव्यवस्था और आपकी जेब को लेकर आरबीआई का क्या आउटलुक रहने वाला है।
विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का कहना है, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) फरवरी 2026 में घोषित पिछली मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा भारत के साथ कई देशों के मुक्त व्यापार समझौते की बाद हुई थी, महंगाई के अच्छे आउटलुक, घरेलू अर्थव्यवस्था वृद्धि की अच्छी रफ्तार और बाहरी संभावनाओं में सुधार के परिपक्ष में तय की गई थी। हालांकि मॉनेटरी पॉलिसी बैठक के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में बहुत अधिक बदलाव हुआ है, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा ट्रेड को खतरा पैदा हो गया है। वहीं, ऊर्जा की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत से कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की कीमतों में क्रमशः 55% और 90% की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा बिगड़ती भू-राजनीतिक स्थिति का असर वैश्विक कमोडिटी की कीमतों, करेंसी की चाल और बड़े वित्तीय बाजार में महसूस किया जा रहा है। कुल मिलाकर इस संघर्ष ने न केवल बढ़ती वैश्विक एनर्जी कीमतों के बारे में बल्कि आपूर्ति चेन में रुकावटों के बारे में चिंताएं पैदा की हैं, जिसका असर विकास की गति और महंगाई पर पड़ सकता है।
वेट एंड वॉच की रणनीति पर आगे बढ़ेगा आरबीआई
केयरएज रेटिंग एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा, “बहुत अधिक उतार-चढ़ाव वाले इस वैश्विक माहौल के बीच हम उम्मीद करते हैं कि रेपो रेट यानी ब्याज दर कटौती पर आरबीआई का रुख जैसा है वैसा ही बना रहेगा।” उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक आगामी बैठक में बदलती भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखेगा। सिन्हा के अनुसार वेट एंड वॉच की रणनीति आरबीआई को विकास और महंगाई के जोखिमों का अनुमान लगाने, भविष्य में ब्याज दरों पर सोच-समझकर फैसला लेने और फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखने में मदद करेगी। वे कहते है कि आनेवाली पॉलिसी पर वित्त वर्ष 2027 के लिए आरबीआई के ग्रोथ और महंगाई के आउटलुक के लिए करीब से नजर रखी जाएगी।



