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Super El Nino क्या है? क्‍या भारत पर होगा इसका असर, इसके कारण पड़ेगी भयंकर गर्मी?


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oi-Bhavna Pandey

What is Super El Nino? अप्रैल में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तब उत्‍तर भारत के कई राज्यों में अचानक आंधी-पानी भी आ जाता है और धीरे-धीरे ऐसा लग रहा है कि क्लाइमेट चेंज अपने भयावह रूप में हमारे मौसम को प्रभावित कर रहा है। वहीं गर्मी का मौसम आते ही चर्चा शुरू हो गई है कि इस साल Super El Nino बन सकता है। लेकिन ये El Nino आखिर है क्या? और इसका हमारे दिन-प्रतिदिन के मौसम पर क्या असर पड़ सकता है? चलिए, आसान शब्दों में जानते हैं कि ये फेनोमिना क्या है और कैसे हमारे मौसम की कहानी बदल सकता है।”

What is Super El Nino

Super El Nino क्या है?

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ सीमा जावेद ने oneindia को बताया एल नीनो एक प्राकृतिक मौसम चक्र है। जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, तब ये घटना होती है। आम तौर पर वायुमंडल की हवाएं गर्म पानी को दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं और दक्षिण अमेरिका के पास ठंडा पानी ऊपर आता है। एल नीनो के समय ये हवाएं कमजोर हो जाती हैं और गर्म पानी पूरे प्रशांत महासागर में फैल जाता है।

What is Super El Nino

Super El Nino का दुनिया भर में क्‍या होगा असर?

जब पानी गर्म होता है, तो उसके ऊपर हवा उठती है और बारिश ज्यादा होती है। इसी बीच भारतीय महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में हवा नीचे गिरती है, जिससे वहां बारिश कम और तापमान बढ़ जाता है। एल नीनो की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में असामान्य मौसम देखने को मिल सकता है, जैसे तूफान, सूखा या अत्यधिक बारिश।

What is Super El Nino

Super El Nino का भारत पर क्‍या होगा असर?

भारत में एल नीनो के सालों में गर्मी ज्यादा और मानसून कमजोर रहने की संभावना बढ़ जाती है। हमारे मानसून को समुद्र और जमीन के तापमान के अंतर से ताकत मिलती है। एल नीनो के दौरान ये संतुलन बिगड़ जाता है। नतीजा: उत्तर और मध्य भारत में गर्मी की लहरें ज्यादा और मानसून में बारिश कम।

क्या है भविष्य की संभावना?

वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट के अनुसार, जून तक महासागर और वायुमंडल पूरी तरह से जुड़ सकते हैं। इसका मतलब है कि इस साल एक “मजबूत एल नीनो” बन सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो दुनिया भर का मौसम प्रभावित हो सकता है। अटलांटिक में तूफान कम और पश्चिमी प्रशांत में टाइफून ज्यादा हो सकते हैं। इसके अलावा, भारत में गर्मी की लहरें और मानसून की कमी की संभावना भी बढ़ जाएगी।



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