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Trump China Visit: युद्ध के माहौल में चीन दौरे पर जा रहे हैं ट्रंप, 14-15 मई को बीजिंग में ‘ग्रैंड डील’


International

oi-Sumit Jha

Donald Trump China Visit 2026: दुनियाभर में जारी युद्ध के तनाव के बीच अमेरिकी राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने घोषणा की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 14 और 15 मई को बीजिंग का दौरा करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मध्य पूर्व (Middle East) में संघर्ष चरम पर है और वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगा रही है।

ट्रंप का यह कदम न केवल अमेरिका और चीन के रिश्तों को नई दिशा देगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि क्या दोनों महाशक्तियां मिलकर वैश्विक शांति बहाल कर पाएंगी। इसके बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सपरिवार वाशिंगटन का दौरा करेंगे।

Donald Trump China Visit

Trump Xi Jinping Meeting Beijing: युद्ध के साये में कूटनीति का नया अध्याय

मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव और ओपेक देशों की अस्थिरता के बीच ट्रंप का बीजिंग दौरा बेहद साहसिक कदम माना जा रहा है। मूल रूप से यह दौरा मार्च में होना था, लेकिन ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब मई की तारीखें तय करना यह दर्शाता है कि व्हाइट हाउस अगले 6 हफ्तों के भीतर मध्य पूर्व में किसी बड़े ‘एंडगेम’ या युद्धविराम की उम्मीद कर रहा है। ट्रंप इस यात्रा के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका एक साथ दो मोर्चों पर नियंत्रण रखने में सक्षम है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और चीन की भूमिका

वर्तमान संघर्ष में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। ट्रंप ने पहले चीन से इस क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग की मांग की थी, जिसे बीजिंग ने ठुकरा दिया था। अब बीजिंग में होने वाली वार्ता का मुख्य केंद्र तेल आपूर्ति बहाल करना होगा। चीन, जो ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, के पास तेहरान पर दबाव बनाने की अनूठी क्षमता है। ट्रंप इस कूटनीतिक यात्रा का उपयोग चीन को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूर करने में कर सकते हैं।

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टैरिफ युद्ध बनाम रणनीतिक साझेदारी

ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में 15% वैश्विक फ्लैट टैरिफ की बात की है, जिसने चीन की आर्थिक चिंताएं बढ़ा दी हैं। मध्य पूर्व के युद्ध ने चीन की ऊर्जा सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया है। ऐसे में यह शिखर सम्मेलन “लेन-देन की कूटनीति” (Transactional Diplomacy) का केंद्र बनेगा। ट्रंप चीन से व्यापारिक रियायतों के बदले मध्य पूर्व में शांति बहाली के लिए सहयोग मांग सकते हैं। यदि शी जिनपिंग इस संकट में मध्यस्थ बनते हैं, तो यह वैश्विक व्यवस्था में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।

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मेलानिया और मैडम पेंग: सॉफ्ट पावर का प्रभाव

व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और मैडम पेंग लियान के बीच वाशिंगटन में एक ‘रेसिप्रोकल विजिट’ (पारस्परिक दौरा) भी होगा। युद्ध के माहौल में इस पारिवारिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का उद्देश्य दोनों महाशक्तियों के बीच जमी बर्फ को पिघलाना है। यह दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन केवल सैन्य या आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संबंधों के माध्यम से भी चीन के साथ एक लंबी अवधि का “ग्रैंड डील” (Grand Deal) सुनिश्चित करना चाहता है, ताकि एशियाई मोर्चे पर शांति बनी रहे।



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