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Trump Warning Iran: ‘तेल भी लेंगे, खार्ग आईलैंड पर भी कब्जा करेंगे’, ट्रंप का दावा- 20 जहाज तेल भेज रहा ईरान


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oi-Pallavi Kumari

Donald Trump Warning Iran: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में खुलकर कहा कि उनकी पहली पसंद “ईरान का तेल लेना” है और जरूरत पड़ी तो अमेरिका, ईरान के सबसे अहम तेल निर्यात केंद्र खार्ग आईलैंड पर कब्जा भी कर सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब एक तरफ दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की आशंका भी बढ़ती जा रही है।

’20 तेल टैंकर सम्मान में भेजे जा रहे’-ट्रंप का दावा

ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया कि ईरान अमेरिका को 20 बड़े तेल टैंकर भेज रहा है। उन्होंने इसे “सम्मान के संकेत” के तौर पर बताया। ट्रंप के मुताबिक, ये टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरेंगे और सोमवार सुबह से यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बातचीत अच्छी चल रही है और उन्हें भरोसा है कि जल्द ही कोई बड़ा समझौता हो सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसा न भी हो सकता है।

Donald Trump Warning Iran

खार्ग आईलैंड पर नजर, सैन्य ऑपरेशन की तैयारी

ट्रंप ने ‘फाइनेंशियल टाइम्स’को दिए इंटरव्यू में यह भी कहा कि अमेरिका खार्ग द्वीप को “बहुत आसानी से” अपने कब्जे में ले सकता है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा हब है, जहां से दुनिया के कई देशों को तेल सप्लाई होता है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पेंटागन ने इस दिशा में तैयारी भी तेज कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 10 हजार प्रशिक्षित सैनिकों को इस मिशन के लिए तैयार रखा गया है। इनमें से 3,500 सैनिक पहले ही क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, जबकि 2,200 मरीन रास्ते में हैं। इसके अलावा 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को भी तैनाती के आदेश दिए गए हैं।

यूरेनियम हटाने का प्लान, जोखिम भी बड़ा

अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप प्रशासन ईरान से करीब 1,000 पाउंड यूरेनियम निकालने के लिए सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। यह ऑपरेशन बेहद जटिल और जोखिम भरा माना जा रहा है, क्योंकि इसके लिए अमेरिकी सेना को कई दिनों तक ईरान के अंदर रहना पड़ सकता है।

हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ट्रंप खुद इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इस मिशन से अमेरिकी सैनिकों को कितना खतरा हो सकता है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि ट्रंप इस योजना को लेकर सकारात्मक हैं, क्योंकि इससे ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सकता है।

पाकिस्तान के जरिए बातचीत, डील ‘जल्द’ संभव

दिलचस्प बात यह है कि तनाव के बीच बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। ट्रंप ने बताया कि ईरान के साथ सीधी और अप्रत्यक्ष दोनों तरह की बातचीत चल रही है, जिसमें पाकिस्तान के जरिए संपर्क भी शामिल है।

पाकिस्तान ने भी पुष्टि की है कि वह जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी कर सकता है। विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सार्थक बातचीत कराने को तैयार है।

बार-बार पश्चिम एशिया में बढ़ रहा तनाव

इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। कुवैत में एक पावर स्टेशन पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और इमारत को नुकसान पहुंचा। इससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। इसके अलावा होर्मुज, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, वहां तनाव के चलते बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है और तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरा

अगर यह टकराव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। रेड सी के बाब-एल-मंदेब जलडमरूमध्य में हूती विद्रोहियों की सक्रियता भी वैश्विक शिपिंग के लिए खतरा बन सकती है। यह रास्ता दुनिया के करीब 12 प्रतिशत तेल और बड़े हिस्से के व्यापार को संभालता है। ऐसे में अगर यहां हमले फिर शुरू होते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

‘रेजीम चेंज’ का दावा और इंटरनेट ब्लैकआउट

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद ईरान में “रेजीम चेंज” हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब वहां पहले जैसे नेता नहीं हैं और हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट को 30 दिन हो चुके हैं। लाखों लोग वैश्विक इंटरनेट से कटे हुए हैं, हालांकि देश के अंदर का नेटवर्क सीमित रूप से काम कर रहा है।

क्या बढ़ेगा युद्ध या होगा समझौता?

पूरे घटनाक्रम को देखें तो तस्वीर दो हिस्सों में बंटी नजर आती है। एक तरफ ट्रंप के कड़े बयान और सैन्य तैयारी है, तो दूसरी तरफ बातचीत और समझौते की उम्मीद भी बनी हुई है। ट्रंप ने खुद कहा कि उन्हें “पूरा भरोसा” है कि डील हो सकती है और यह जल्द हो सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि हालात कभी भी बदल सकते हैं।

अमेरिका-ईरान के बीच यह टकराव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां एक छोटा कदम भी बड़े युद्ध या बड़े समझौते की दिशा तय कर सकता है। आने वाले कुछ दिन पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।



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