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UP पुलिस भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द पर बवाल, मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंची शिकायत, अब नपेंगे जिम्मेदार!


Uttar Pradesh

oi-Sohit Kumar

UP Police SI Exam Pandit Word Controversy: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित उप-निरीक्षक (SI) नागरिक पुलिस की लिखित परीक्षा शनिवार को विवादों के घेरे में आ गई। परीक्षा के हिंदी खंड में पूछे गए एक प्रश्न के विकल्पों ने न केवल अभ्यर्थियों को चौंका दिया, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। मर्यादा और संवेदनशीलता से जुड़े इस मामले ने अब मुख्यमंत्री दरबार तक दस्तक दे दी है।

दरअसल, 14 मार्च को प्रदेश भर में आयोजित हुई इस परीक्षा में ‘अनेक शब्दों के लिए एक शब्द’ खंड के तहत एक प्रश्न पूछा गया था। प्रश्न था: ‘वह व्यक्ति जो परिस्थितियों के अनुसार बदल जाता है।’

si written examination

इस प्रश्न के लिए जो चार विकल्प दिए गए थे, वे इस प्रकार थे:

  • 1. पंडित (विद्वान)
  • 2. अवसरवादी (Opportunist)
  • 3. निष्कपट (सच्चा)
  • 4. सदाचारी (नैतिक)

हालांकि व्याकरण की दृष्टि से इसका सही उत्तर ‘अवसरवादी’ है, लेकिन ‘पंडित’ शब्द को इस संदर्भ में एक विकल्प के रूप में शामिल करने पर भारी आपत्ति जताई गई है।

मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंची शिकायत

इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस संबंध में एक प्रतिवेदन सौंपा। उन्होंने इस प्रश्न को ‘आपत्तिजनक और संवेदनशील’ बताते हुए कहा कि ‘पंडित’ शब्द पारंपरिक रूप से विद्वानों और पूजनीय धार्मिक हस्तियों के लिए उपयोग किया जाता है। इसे नकारात्मक प्रवृत्तियों वाले विकल्पों के साथ रखना समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है।

वहीं, अखिल भारत हिंदू महासभा के शिशिर चतुर्वेदी ने इसे ब्राह्मण समुदाय की छवि धूमिल करने की साजिश बताया। उन्होंने इस मामले में FIR दर्ज कराने और प्रश्नपत्र तैयार करने वाली कमेटी के खिलाफ सख्त जांच की मांग की है।

डिप्टी सीएम ने दिए जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि, किसी भी समुदाय या सामाजिक समूह की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले प्रश्न पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। इस चूक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच में दोषी पाए जाने वाले पैनल या अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।



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