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US-Iran वार्ता फेल होने से चिंता में मौलाना खालिद रशीद, UN और OIC के सामने रख दी कौन सी मांग?


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oi-Kumari Sunidhi Raj

Maulana Khalid Rashid on US Iran Talks Fail: पाकिस्तान की राजधानी इस्लाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच चली 21 घंटे की लंबी शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे बिना समाप्त हो गई है। वैश्विक शांति की उम्मीदों को उस समय बड़ा झटका लगा जब यह स्पष्ट हुआ कि दोनों पक्ष अपने बुनियादी मतभेदों को पाटने में पूरी तरह असमर्थ रहे।

परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की शर्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। इस विफलता ने न केवल मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता को बढ़ा दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनाव की लहर पैदा कर दी है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता का विफल होना वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

Maulana Khalid Rashid US Iran Talks

वार्ता की विफलता पर मौलाना खालिद रशीद का बड़ा बयान

इस संवेदनशील वैश्विक घटनाक्रम पर ‘इस्लामी केंद्र भारत’ (Islamic Centre of India) के अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रमुख सदस्य, मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली (Maulana Khalid Rashid Firangi Mahali) ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।

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उन्होंने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, “यह अत्यंत चिंता का विषय है कि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता किसी सकारात्मक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी और पूरी तरह विफल रही है। अब वह समय आ गया है जब संयुक्त राष्ट्र (UN) और ओआईसी (Organisation of Islamic Cooperation) को सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करना चाहिए। इस मुद्दे को पूर्ण संवाद के माध्यम से हल करना अनिवार्य है, क्योंकि वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए इस विवाद का समाधान निकलना बेहद आवश्यक है।”

क्यों फेल हुई शांति वार्ता?

इस्लामाबाद में हुई इस सीधी बातचीत में पाकिस्तान ने मेजबान और मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। हालांकि, 21 घंटे की चर्चा के बावजूद निम्नलिखित बिंदुओं पर गतिरोध बना रहा:

प्रतिबंधों की वापसी: ईरान ने अपनी अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए सभी प्रतिबंधों को तुरंत हटाने की मांग की, जिस पर अमेरिका ने कड़ी शर्तें रखीं।

परमाणु गारंटी: अमेरिका ने ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम पर लंबी अवधि के कड़े नियंत्रण की मांग की, जिसे ईरान ने अपनी संप्रभुता के साथ समझौता माना।

क्षेत्रीय सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति और सामरिक जलमार्गों पर नियंत्रण को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच गहरी खाई नजर आई।

मौलाना खालिद रशीद ने इस बात पर जोर दिया कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बड़े संगठन अब भी मूकदर्शक बने रहे, तो इसके परिणाम पूरे विश्व को भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने अपील की कि वैश्विक स्थिरता के हित में कूटनीतिक प्रयासों को नए सिरे से और अधिक मजबूती के साथ शुरू किया जाना चाहिए।

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