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oi-Sumit Jha
US Iran peace Talks: पश्चिम एशिया में शांति की बहाली के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद के लिए रवाना हो गए हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान के साथ बातचीत में शामिल होना है। सालों बाद अमेरिका और ईरान के बीच इस स्तर की कूटनीतिक हलचल देखी जा रही है।
रवानगी से पहले वेंस ने उम्मीद जताई कि यह बातचीत सकारात्मक रहेगी, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी है। यह मिशन न केवल संघर्षविराम को मजबूत करने के लिए है, बल्कि क्षेत्र में लंबी शांति स्थापित करने की एक बड़ी कोशिश है।

JD Vance Pakistan visit: ‘सीधे काम करो या नतीजा भुगतो’
विमान पर सवार होने से पहले जेडी वेंस ने बहुत ही नपे-तुले लेकिन सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान नेक नीयती के साथ बातचीत की मेज पर आता है, तो अमेरिका हाथ मिलाने को तैयार है। लेकिन अगर उन्होंने किसी भी तरह की ‘चालबाजी’ या धोखा देने की कोशिश की, तो अमेरिकी दल बहुत सख्त रुख अपनाएगा। वेंस ने स्पष्ट कर दिया कि वे वहां सिर्फ बात करने नहीं, बल्कि ठोस नतीजे निकालने जा रहे हैं और वे किसी के दबाव में नहीं आएंगे।
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US delegation Islamabad: शांति पर मंडराता खतरा
भले ही दोनों पक्ष मेज पर आने को तैयार हैं, लेकिन शांति की इस कोशिश पर ग्रहण लगने का खतरा भी बरकरार है। दरअसल, संघर्षविराम की शर्तों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच गहरी असहमति है। ईरान का मानना है कि लेबनान में इजरायली युद्ध को रोकना इस समझौते का हिस्सा है, जबकि ट्रंप और नेतन्याहू ने इससे साफ इनकार कर दिया है। इसके अलावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का मुद्दा भी आग में घी डालने का काम कर रहा है, जो वार्ता को पटरी से उतार सकता है।
इस्लामाबाद में कूटनीति का ‘महाकुंभ’
इस बातचीत के लिए अमेरिका ने अपनी सबसे मजबूत टीम उतारी है। जेडी वेंस के साथ जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ जैसे अनुभवी और राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी लोग शामिल हैं। यह टीम दर्शाती है कि वाशिंगटन इस बार समझौते को लेकर कितना गंभीर है। इस्लामाबाद इस समय पूरी दुनिया की नजरों का केंद्र बन गया है, क्योंकि यहीं से तय होगा कि मध्य-पूर्व में युद्ध की आग ठंडी होगी या एक बार फिर तनाव का नया दौर शुरू होगा।
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जेडी वेंस की नई और बड़ी परीक्षा
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के लिए यह दौरा उनकी राजनीतिक क्षमताओं की सबसे बड़ी परीक्षा है। बहुत कम समय में राष्ट्रीय राजनीति के शिखर पर पहुंचे वेंस को एक ऐसे मुद्दे को सुलझाने की जिम्मेदारी मिली है, जहां दशकों से कूटनीति फेल होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वेंस का कम अनुभवी होना उनके लिए एक मौका भी है, क्योंकि वे पुरानी कड़वाहटों से हटकर नई सोच के साथ ईरान से बात कर सकते हैं। हालांकि, ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को निभाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होगा।



