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US Iran War: ईरानी Drones मचा रहे खाड़ी देशों में तबाही, जंग में फंसे जेलेंस्की से Trump ने लगाई मदद की गुहार


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oi-Siddharth Purohit

US Iran War: कहते हैं कि वक्त का पहिया कभी भी पलट सकता है और ये जब पलटता है तो किसी की भी स्थिति 180 डिग्री तक बदल सकती है। ऐसा ही कुछ है रहा है अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की इस जंग में। दरअसल ईरान जंग की शुरुआत से ही उन सभी देशों पर Shahed-136 ड्रोन से हमले कर रहा है जो या तो अमेरिका की मदद कर रहे थे या फिर जिनके यहां अमेरिकी बेस हैं। अब इन्हीं ड्रोन अटैक से बचने के लिए खाड़ी देशों समेत अमेरिका मिलिट्री बेस को बचाने के लिए यूक्रेनी ड्रोन एक्सपर्ट को बुलाया गया है। जिसके बदले उनकी अपनी मांग है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने बताया कि 201 यूक्रेनी एंटी-ड्रोन मिलिट्री एक्सपर्ट अब मिडिल ईस्ट में तैनात कर दिए गए हैं। इसके अलावा 34 और एक्सपर्ट्स को भेजने की तैयारी चल रही है। ये टीमें United Arab Emirates, Qatar, Saudi Arabia और Jordan में तैनात हैं, जबकि कुछ एक्सपर्ट Kuwait के लिए रवाना हो चुके हैं।

US Iran War

क्या है मिशन?

इन एक्सपर्ट्स का मुख्य काम अमेरिकी और क्षेत्रीय सेनाओं को ईरान द्वारा डिजाइन किए गए Shahed-136 drone से बचाने में मदद करना है। इसके लिए अमेरिका ने वोलोदिमीर जेलेंस्की से गुहार लगाई है, जिसमें मिडिल ईस्ट में इन “शाहेद” ड्रोन से सुरक्षा के लिए सपोर्ट मांगा गया था।

महंगे बनाम सस्ते हथियार

अपनी रिपोर्ट में The New York Times ने इसे भूमिका में बदलाव बताया है। अमेरिका जहां एक शाहेद ड्रोन को गिराने के लिए करीब 4 मिलियन डॉलर की Patriot missile system का इस्तेमाल करता है, वहीं एक शाहेद ड्रोन की कीमत सिर्फ 50,000 डॉलर होती है। यानी महंगा हथियार सस्ते खतरे से लड़ रहा है।

यूक्रेन का सस्ता और स्मार्ट समाधान

इसके उलट, यूक्रेन ‘वाइल्ड हॉर्नेट्स’ नाम की कंपनी के ‘स्टिंग’ इंटरसेप्टर ड्रोन का इस्तेमाल करता है, जिनकी कीमत सिर्फ 2,000 डॉलर प्रति यूनिट है। यह दिखाता है कि कैसे कम लागत में ज्यादा असरदार तकनीक तैयार की जा सकती है।

“लॉन-मोवर” जैसी आवाज से पकड़ते हैं ड्रोन

रूस के साथ चार साल से चले आ रहे और अभी जारी युद्ध ने यूक्रेन को खास अनुभव दिया है। शाहेद ड्रोन एक “लॉन-मोवर” (घास काटने वाली मशीन) जैसी आवाज करते हैं। यूक्रेन के सिस्टम इसी आवाज को पकड़कर उन्हें ट्रैक करते हैं।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

यूक्रेनी सिस्टम आवाज वाले सेंसर और माइक्रोफोन का इस्तेमाल करते हैं, जो ड्रोन की आवाज पहचान लेते हैं। इसके बाद कम लागत वाले FPV (फर्स्ट-पर्सन व्यू) ड्रोन रियल टाइम में उस टारगेट को ट्रैक करते हैं और जाकर टकरा कर उसे नष्ट कर देते हैं।

खाड़ी देशों में हो रही तैनाती

यह तैनाती ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और इजरायल ईरानी ढांचे पर हमले कर रहे हैं, जिसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी कहा जा रहा है। यानी यह कदम एक बड़े सैन्य परिदृश्य का हिस्सा है।

ज़ेलेंस्की का बयान

राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने कहा है कि अगर रूस, ईरान को खुफिया जानकारी देता है, तो यूक्रेन पश्चिमी और क्षेत्रीय संपत्तियों की रक्षा के लिए अपने एक्सपर्ट भेजता रहेगा। इस बीच अमेरिकी रक्षा स्टार्टअप्स और यूक्रेनी सैनिक मिलकर “मेरोप्स” नाम की नई एंटी-ड्रोन प्रणाली भी विकसित कर रहे हैं। यह सिस्टम भविष्य में और ज्यादा प्रभावी सुरक्षा दे सकता है।

हजारों इंटरसेप्टर भेजने की तैयारी

अमेरिका इस क्षेत्र में हजारों इंटरसेप्टर ड्रोन भेजने की तैयारी कर रहा है, ताकि Muwaffaq Salti Air Base जैसे ठिकानों पर तैनात सैनिकों को बेहतर सुरक्षा मिल सके। पहले यहां ड्रोन हमलों में रडार सिस्टम को नुकसान पहुंच चुका है। The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन अब ड्रोन टेक्नोलॉजी का एक ग्लोबल हब बन चुका है। अनुमान है कि 2025 तक वह 2 मिलियन (20 लाख) से ज्यादा ड्रोन का उत्पादन करेगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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