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oi-Siddharth Purohit
US Iran War: अमेरिका-ईरान की जंग जब शुरू हुई थी तब लग रहा था कि 15 दिन में अमेरिका सब समेट देगा। हमले में पहले ही दिन अली खामेनेई की मौत के बाद ऐसा लग भी रहा था। लेकिन अब 29 दिनों के बाद कहानी उल्टी हो चुकी है। ऐसा लग रहा है कि ईरान कमजोर पड़ने के बजाय और ज्यादा मजबूत और घातक हो गया है। ताजा मामला कुछ घंटे पहले का है, जब ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाया। जिसमें 10 अमेरिकी जवान हताहत हुए हैं। पर किसी की जान नहीं गई है।
किस बेस पर हुआ हमला?
सऊदी अरब से आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमला Prince Sultan Air Base पर हुआ। ईरानी मिसाइल और ड्रोन ने अमेरिकी रिफ्यूलिंग (ईंधन भरने वाले) विमानों को निशाना बनाया, जिससे उन्हें नुकसान हुआ। इसके अलावा 10 सैनिकों के घायल होने की भी खबर आई है।

सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा
हमले में क्षतिग्रस्त विमानों की सैटेलाइट तस्वीरें भी सामने आईं। इससे पहले 1 मार्च को इसी बेस पर हुए एक हमले में 26 साल के आर्मी सार्जेंट बेंजामिन एन. पेनिंगटन घायल हुए थे, जिनकी कुछ दिनों बाद मौत हो गई। वहीं, United States Central Command ने पहले बताया था कि इस पूरे संघर्ष में अब तक 300 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं।
हमले से बौखलाए ट्रंप, अब्राहम एकॉर्ड्स पर दिया जोर
इस हमले पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के बाद अब सऊदी अरब और इजरायल के बीच रिश्तों को सामान्य करना जरूरी है। हमें अब्राहम एकॉर्ड्स में शामिल होना होगा।” बता दें कि ट्रंप लंबे समय से इजरायल और सऊदी अरब पर Abraham Accords के तहत रिश्ते सामान्य करने का दबाव बना रहे हैं। लेकिन ऐसा अभी तक हो नहीं पाया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान नरम
इस बीच, जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत Ali Bahreini ने कहा कि तेहरान ने Strait of Hormuz के जरिए मानवीय सहायता को आसान बनाने और तेज करने पर सहमति दे दी है। यह फैसला तब लिया गया है, जब ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले जारी हैं।
वैश्विक व्यापार और खाद्य सुरक्षा पर असर
अली बहरेनी ने बताया कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के अनुरोध को मान लिया है ताकि मानवीय सहायता और कृषि से जुड़े सामान इस जलमार्ग से गुजर सकें। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल शि पमेंट और करीब एक-तिहाई उर्वरक (फर्टिलाइजर) व्यापार को संभालता है। इसलिए इसका खुला रहना पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई और खेती के लिए बेहद जरूरी है।
एक महीने के युद्ध के बाद पहली बड़ी राहत
यह कदम एक महीने से चल रहे युद्ध के बीच पहली बड़ी राहत माना जा रहा है। अब तक दुनिया का ध्यान तेल और गैस सप्लाई पर था, लेकिन उर्वरक की कमी भी एक बड़ा संकट बन रही है। अगर यह समस्या बढ़ती, तो दुनिया भर में खेती और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता था।
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