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US-Iran War: ट्रंप के मुंह पर ईरान का तमाचा? USS Abraham Lincoln पर 101 मिसाइलें दागीं? आखिर सच क्या है?


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oi-Divyansh Rastogi

Iran 101 Missile Strikes on USS Abraham Lincoln: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक बार फिर USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर सुर्खियों में है। ईरान की सेना और आईआरजीसी (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी इस विशाल युद्धपोत पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया, जिससे कैरियर को अपनी पोजिशन बदलनी पड़ी। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि ईरान ने इस कैरियर पर 101 मिसाइलें दागीं थीं।

ट्रंप ने कहा, ‘उन्होंने हमारे सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर में से एक पर 101 मिसाइलें दागीं… लेकिन हर एक मिसाइल को समंदर में ही मार गिराया गया।’ उन्होंने इसे अमेरिकी डिफेंस सिस्टम की ताकत बताते हुए ईरानी मिसाइलों को ‘बहुत तेज और सोफिस्टिकेटेड’ करार दिया।

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क्या हुआ था असल में?

ईरान की नौसेना और आईआरजीसी ने पहले 4 क्रूज मिसाइलें या बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया था। उन्होंने कहा कि हमले से कैरियर को नुकसान हुआ और उसे होर्मुज क्षेत्र से दूर जाना पड़ा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन दावों को सिरे से खारिज किया। पेंटागन ने कहा कि ‘मिसाइलें कैरियर के पास भी नहीं पहुंचीं’ और कोई नुकसान नहीं हुआ। अब ट्रंप के बयान में संख्या बढ़कर 101 हो गई है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी मिसाइलें अमेरिकी डिफेंस ( Aegis सिस्टम, SM-3/6 मिसाइलें आदि) ने समंदर में ही नष्ट कर दीं। कोई हिट या नुकसान नहीं हुआ।

नोट: ईरान के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कई बार ईरानी मीडिया AI जनरेटेड वीडियो या पुरानी फुटेज का इस्तेमाल करके प्रोपगैंडा फैलाने के आरोप लग चुके हैं। अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं कि कैरियर को कोई क्षति पहुंची।

USS अब्राहम लिंकन कितना ताकतवर है?

यह निमित्ज-क्लास न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो 1989 में कमीशन हुआ। इसमें 80 से ज्यादा लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर (F/A-18 Super Hornet, F-35C, EA-18G Growler, MH-60R आदि) 24 घंटे तैनात रहते हैं। पूरा Carrier Strike Group- 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर (USS Frank E. Petersen Jr., USS Spruance, USS Michael Murphy आदि), क्रूजर, सबमरीन और सपोर्ट शिप्स के साथ चलता है। एडवांस्ड रडार, मिसाइल डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम इतने मजबूत हैं कि दुश्मन के हमले को दूर से ही नाकाम कर सकते हैं। यह 9/11 के बाद इराक, अफगानिस्तान और सीरिया अभियानों में भी अहम भूमिका निभा चुका है। फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के दौरान इसे मध्य पूर्व में तैनात किया गया था।

ईरान के हमलों का असर

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल के पावर प्लांट पर मिसाइलें दागीं, लेकिन इजरायली एयर डिफेंस ने ज्यादातर को रोक लिया। एक मिसाइल खुले इलाके में गिरी। कोई बड़ा नुकसान नहीं।

मानवीय क्षति (ईरान में):

  • अब तक करीब 1,500 मौतें, 18,000 से ज्यादा घायल।
  • मरने वालों में 8 महीने के बच्चे से 88 साल के बुजुर्ग तक शामिल।
  • 200 से ज्यादा महिलाएं और स्कूल हमले में 168 बच्चे शहीद हुए।
  • 55 हेल्थ वर्कर्स घायल, जिनमें 11 की मौत।

क्या है पूरा संदर्भ?

यह घटना फरवरी-मार्च 2026 के US-Israel vs Iran संघर्ष का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका-इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को निशाना बनाया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने और पावर प्लांट्स पर हमले की धमकी दी। ट्रंप ने ईरान को डील की पेशकश की है, लेकिन दोनों तरफ से बयानबाजी जारी है।

ट्रंप का तमाचा या अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन?

ईरान इसे ‘ट्रंप के मुंह पर तमाचा’ बता रहा है, क्योंकि अमेरिका ने पहले दावों को झुठलाया था। लेकिन ट्रंप इसे अमेरिकी नौसेना की अजेयता का उदाहरण बता रहे हैं- 101 मिसाइलें दागी गईं, लेकिन एक भी नहीं लगी।

यह दावा प्रोपगैंडा और साइकोलॉजिकल वारफेयर का हिस्सा लगता है। अमेरिकी पक्ष कहता है कि कोई नुकसान नहीं, जबकि ईरान अपनी ‘ताकत’ दिखाने की कोशिश कर रहा है। वास्तविक स्थिति अभी भी अस्पष्ट है क्योंकि दोनों तरफ से विरोधाभासी बयान आ रहे हैं। स्थिति गंभीर है कि होर्मुज से तेल सप्लाई, ग्लोबल इकोनॉमी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों के लिए LPG, क्रूड और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है।



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