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oi-Bhavna Pandey
US Israel Iran war: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब केवल राजनीतिक या सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका गंभीर प्रभाव पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में इजरायली ड्रोन हमलों के बाद तेहरान के बाहरी इलाके में स्थित तेल डिपो और रिफाइनरियों में भीषण आग लग गई। इन आगजनी की घटनाओं के बाद शहर में ‘काली बारिश’ की खबर सामने आई, जिसने पर्यावरण वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
धुएँ और रसायनों की बारिश
विशेषज्ञों का कहना है कि जलते हुए ईंधन से उठने वाला घना धुंआ और जहरीले रसायन हवा में फैल गए। जब यह प्रदूषित धुआं बादलों के साथ मिल गया तो बारिश के रूप में शहर पर गिरा। इस प्रक्रिया ने हवा और पानी दोनों को प्रदूषित कर दिया, जिससे पर्यावरण पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

खाड़ी युद्ध जैसा भयावह असर
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन की ब्रैडफोर्ड यूनिवर्सिटी के केमिकल और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के प्रोफेसर नेजात रहमानियन ने इस घटना की तुलना लगभग 35 साल पहले हुए खाड़ी युद्ध से की है। उस समय कुवैत में जलते तेल कुओं से उठने वाला धुआँ हजारों किलोमीटर दूर ईरान तक पहुँच गया था, जिसने पूरे क्षेत्र के वातावरण को बुरी तरह प्रभावित किया था।
इस बार खतरा ज्यादा बड़ा क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार स्थिति पहले से अधिक खतरनाक हो सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि तेल भंडार और रिफाइनरियाँ तेहरान जैसे बड़े और घनी आबादी वाले शहर के बेहद करीब स्थित हैं। ‘संघर्ष और पर्यावरण अबजरवेटरी’ के अनुसार, मौजूदा युद्ध के दौरान अब तक 300 से अधिक ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जिनसे पर्यावरण को गंभीर नुकसान का खतरा पैदा हुआ है।
मिसाइल और बमों से फैल रहे जहरीले कण
युद्ध के दौरान मिसाइल और बम विस्फोट से भारी धातुएँ और विषैले कण निकलते हैं, जो हवा, मिट्टी और पानी में मिल जाते हैं। इन जहरीले तत्वों का प्रभाव केवल कुछ दिनों या महीनों तक ही नहीं, बल्कि कई दशकों तक बना रह सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे दीर्घकालिक पर्यावरणीय चुनौती मान रहे हैं।
स्वास्थ्य को खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के प्रदूषण से सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है, क्योंकि जहरीले कण फेफड़ों और त्वचा पर गंभीर असर डाल सकते हैं।
सरकार ने दी चेतावनी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईरानी अधिकारियों ने शुरुआती चरण में ही लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अम्लीय बारिश त्वचा और फेफड़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, इसलिए बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
पहले से प्रदूषण से जूझ रहा तेहरान
तेहरान पहले ही गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। शहर के आसपास मौजूद भारी उद्योग, लाखों की संख्या में वाहन और इसकी भौगोलिक स्थिति प्रदूषकों को लंबे समय तक हवा में फंसा कर रखती है। ऐसे में युद्ध से उत्पन्न अतिरिक्त प्रदूषण स्थिति को और भी भयावह बना सकता है।
पूरे पश्चिम एशिया के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल भंडारों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रहे तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरे पश्चिम एशिया के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है और एक बड़ा क्षेत्रीय पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है।
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