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oi-Sumit Jha
US pilot rescue Iran: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वापसी का रास्ता सिर्फ जंग की ओर जाता है। पिछले 24 घंटों से पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई थीं-सवाल एक लापता अमेरिकी पायलट का था, जो ईरान की सरजमीं पर गिरे F-15E लड़ाकू विमान के बाद से गायब था।
एक तरफ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स उस पायलट के सिर पर इनाम रखकर उसे जिंदा दबोचने के लिए शिकारियों की तरह ढूंढ रहे थे, तो दूसरी तरफ अमेरिका उसे मौत के मुंह से निकालने के लिए एक ऐसा प्लान तैयार कर रहा था जिसकी कल्पना सिर्फ फिल्मों में की जा सकती है। भारी गोलीबारी, 100 कमांडो और 12 हेलीकॉप्टरों के बीच अंजाम दिए गए इस ‘खौफनाक ऑपरेशन’ ने युद्ध की आग को और भड़का दिया है। आखिर कैसे अमेरिका ने ईरान के जबड़े से अपने जांबाज को सुरक्षित निकाला? आइए जानते हैं इस रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू मिशन की पूरी इनसाइड स्टोरी।

आसमान से गिरे, मौत से भिड़े: कैसे शुरू हुआ मिशन?
शुक्रवार को कुवैत के पास जब अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरानी हमले का निशाना बनाया गया, तो हड़कंप मच गया। विमान का एक पायलट तो सुरक्षित मिल गया, लेकिन दूसरा ‘वेपन सिस्टम्स ऑफिसर’ ईरान के खतरनाक इलाके में लापता हो गया। अमेरिका के लिए यह सिर्फ एक सैनिक की जान का नहीं, बल्कि देश की साख का सवाल था। अगर पायलट ईरान के हाथ लग जाता, तो यह युद्ध की दिशा बदल सकता था। तुरंत ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ ऑपरेशन का बिगुल बजा दिया गया।
60,000 डॉलर का इनाम और ईरान की घेराबंदी
पायलट को ढूंढने के लिए ईरान ने अपनी पूरी मशीनरी लगा दी थी। IRGC ने पूरे दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र को सील कर दिया और स्थानीय लोगों को लालच दिया कि जो भी पायलट को जिंदा पकड़ेगा, उसे 60,000 डॉलर से ज्यादा का इनाम मिलेगा। ईरानी संसद के स्पीकर ने तो इसे ‘पायलटों का शिकार’ तक कह दिया। ईरान चाहता था कि पायलट को पकड़कर वह ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम का जवाब दे सके और अमेरिका को बातचीत की मेज पर झुकने को मजबूर कर दे।
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US Iran conflict News:100 कमांडर और 12 हेलीकॉप्टरों का ‘तूफान’
पायलट को दुश्मन के जबड़े से निकालने के लिए अमेरिका ने अपनी सबसे घातक यूनिट को मैदान में उतारा। इस ऑपरेशन में करीब 100 स्पेशल कमांडो और 12 हाई-टेक हेलीकॉप्टर शामिल थे। रात के अंधेरे और ईरान की भारी गोलीबारी के बीच अमेरिकी हेलीकॉप्टरों ने उस इलाके पर घेरा डाला जहां विमान गिरा था। यह मिशन बेहद जोखिम भरा था क्योंकि जरा सी चूक का मतलब था ईरान के साथ सीधे युद्ध की शुरुआत और दर्जनों सैनिकों की जान का जाना।
Iran America War: गोलियों की बौछार और जांबाज रेस्क्यू
ईरान की धरती पर जब अमेरिकी रेस्क्यू टीम उतरी, तो उनका सामना भारी रेजिस्टेंस से हुआ। दुश्मन की तरफ से लगातार फायरिंग हो रही थी, लेकिन अमेरिकी कमांडो ने सुरक्षा घेरा बनाकर लापता पायलट को खोज निकाला। वह एक ‘वेपन सिस्टम्स ऑफिसर’ था जो घंटों से छिपकर अपनी टीम का इंतजार कर रहा था। भारी गोलीबारी के बीच उसे सुरक्षित हेलीकॉप्टर में खींच लिया गया। यह ऑपरेशन अमेरिका की सैन्य श्रेष्ठता और अपने हर सिपाही को वापस लाने की प्रतिबद्धता का सबूत बना।
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ट्रंप की चेतावनी और युद्ध के बादल
पायलट के सुरक्षित मिलते ही राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी सेना की पीठ थपथपाई, लेकिन साथ ही ईरान को दी गई चेतावनी और सख्त कर दी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ कहा कि अब 48 घंटे से भी कम का समय बचा है। यदि ईरान ने होर्मुज का रास्ता नहीं खोला या समझौता नहीं किया, तो उस पर ‘कहर’ टूटेगा। पायलट का बचना अमेरिका के लिए बड़ी जीत है, लेकिन इसने दोनों देशों के बीच तनाव को उस बिंदु पर पहुंचा दिया है जहां से पीछे मुड़ना मुश्किल लग रहा है।



