इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि भारत के लिए फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा,सरकार पूरी तरह सतर्क है। हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है। देश में कच्चे तेल के साथ पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। जिससे अल्पकालिक आपूर्ति बाधा से निपटा जा सकता है।
मंत्री ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने तेल खरीद के विविध स्रोतों बनाए है। अब भारतीय कंपनियों के पास ऐसे आपूर्ति मार्ग भी हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं हैं। यदि इस समुद्री रास्ते में किसी तरह की रुकावट आती है तो वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति जारी रखी जा सकती है। हालात की निगरानी के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है।
सूत्रों के मुताबिक, देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे और रिफाइंड तेल का स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही एहतियात के तौर पर कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी के वैकल्पिक आयात स्रोतों की भी तलाश की जा रही है। फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।
भारत में अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। देश में तेल का उत्पादन होता है, लेकिन वह जरूरत के मुकाबले काफी कम है। दुनिया में कई देश बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का उत्पादन करते हैं। अमेरिका वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक देश है। इसके अलावा सऊदी अरब, रूस, कनाडा, इराक, चीन, ईरान, ब्राजील, यूएई और कुवैत भी प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल हैं।
भारत लंबे समय से रूस, सऊदी अरब, इराक, यूएई और अमेरिका जैसे देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता और कीमत के आधार पर भारत जरूरत पड़ने पर अन्य देशों से भी तेल आयात कर सकता है।



