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West Asia Crisis: पश्चिम एशिया की जंग से कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, 100 डॉलर प्रति बैरल के पार


ईरान में चल रहे युद्ध का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो पिछले साढ़े तीन साल में पहली बार हुआ है। यह वृद्धि तेल के उत्पादन और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने (शिपिंग) में आ रही बाधाओं के कारण हुई है।

कीमतों में जबरदस्त उछाल

जब बाजारों में रविवार को ट्रेडिंग फिर से शुरू हुई, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत 107.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। यह शुक्रवार के मुकाबले 16.5 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, अमेरिका में बनने वाले वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत भी 106.22 डॉलर प्रति बैरल के पार कर गई, जो शुक्रवार से 16.9 प्रतिशत अधिक है। बाजार में ट्रेडिंग जारी रहने के साथ इन कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है।

यह उछाल पिछले हफ्ते ही देखने को मिला था, जब अमेरिकी क्रूड के दाम 36 प्रतिशत और ब्रेंट क्रूड के दाम 28 प्रतिशत बढ़ गए थे। युद्ध अब अपने दूसरे हफ्ते में है और इसने उन इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है जो फारस की खाड़ी से तेल और गैस के उत्पादन और आवागमन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडरा रहा खतरा

एक स्वतंत्र रिसर्च फर्म के अनुसार, हर दिन लगभग 1.5 करोड़ (15 मिलियन) बैरल कच्चा तेल दुनिया भर में भेजा जाता है। इसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह जलडमरूमध्य ईरान के पास है और इससे सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे देशों का तेल और गैस का परिवहन होता है। लेकिन ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण अब टैंकर इस रास्ते से जाने से कतरा रहे हैं।

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उत्पादन में कटौती और आपूर्ति की चिंता

तेल के निर्यात में कमी आने और भंडारण (स्टोरेज) टैंकों के भरने के कारण इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अपने तेल उत्पादन को कम कर दिया है। इसके अलावा, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान, इस्राइल और अमेरिका ने भी तेल और गैस से जुड़ी सुविधाओं पर हमले किए हैं, जिससे दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

पिछली कीमतों से तुलना और आर्थिक असर

अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स आखिरी बार 30 जून 2022 को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था, जब यह 105.76 डॉलर पर पहुंचा था। वहीं, ब्रेंट क्रूड 29 जुलाई 2022 को 104 डॉलर प्रति बैरल पर था।

1 मार्च को इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद से तेल की कीमतों में यह वैश्विक बढ़ोतरी वित्तीय बाजारों के लिए चिंता का विषय बन गई है। इससे यह डर पैदा हो गया है कि ऊर्जा के बढ़ते दाम महंगाई को और बढ़ाएंगे और अमेरिकी उपभोक्ताओं के खर्च करने की क्षमता को कम करेंगे, जो कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा

अमेरिका में रविवार को एक गैलन (लगभग 3.78 लीटर) सामान्य पेट्रोल की कीमत 3.45 डॉलर तक पहुंच गई, जो एक हफ्ते पहले से लगभग 47 सेंट ज्यादा है। डीजल की कीमत लगभग 4.6 डॉलर प्रति गैलन हो गई है, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले 83 सेंट की वृद्धि है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव ने आश्वासन दिया है कि पेट्रोल की कीमतें जल्द ही 3 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ जाएंगी और यह समस्या कुछ हफ्तों की है, महीनों की नहीं।

क्या बोले विशेषज्ञ?

कुछ विशेषज्ञ और निवेशक मानते हैं कि अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

ईरान में हमले और चेतावनी

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि रविवार तड़के तेहरान में तेल के गोदामों और एक टर्मिनल पर इस्राइल के हमलों में चार लोगों की मौत हो गई। इस्राइल की सेना का कहना है कि इन गोदामों का इस्तेमाल ईरान मिसाइलें दागने के लिए ईंधन के तौर पर कर रहा था। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि युद्ध का असर तेल उद्योग पर और बढ़ेगा।

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चीन पर भी असर की आशंका

ईरान हर दिन लगभग 16 लाख (1.6 मिलियन) बैरल तेल बेचता है, जिसमें से ज्यादातर चीन खरीदता है। अगर ईरान से तेल की आपूर्ति रुक जाती है, तो चीन को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे ऊर्जा की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

प्राकृतिक गैस और शेयर बाजार में गिरावट

युद्ध के दौरान प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, हालांकि तेल जितनी नहीं। रविवार देर रात यह 3.33 डॉलर प्रति 1,000 क्यूबिक फीट पर बिक रही थी, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले 4.6 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई है।

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