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West Bengal Election 2026: बंगाल की ये 7 सीटें बना सकती हैं नया CM! जहां हार-जीत का अंतर 1000 वोट से भी था कम


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oi-Pallavi Kumari

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। मतदान 23 और 29 अप्रैल को होना है और नतीजे 4 मई को आएंगे। लेकिन इस बार असली लड़ाई सिर्फ बड़ी सीटों पर नहीं, बल्कि उन सीटों पर होगी जहां पिछले चुनाव 2021 में जीत और हार का अंतर 1000 वोट से भी कम था।

यही वो सीटें हैं, जहां थोड़ा सा झुकाव पूरे चुनाव का गणित बदल सकता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इन ‘माइक्रो सीट्स’ पर ही 2026 का ‘गेम चेंजर’ छिपा है।

West Bengal Election 2026

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 7 सीटों पर मुकाबला इतना करीबी था कि जीत का अंतर 1000 वोट से भी कम रहा। दिनहाटा विधानसभा सीट पर सिर्फ 57 वोटों से जीत दर्ज की गई थी। इसका मतलब साफ है कि इन सीटों पर वोटर का मूड थोड़ा सा बदलते ही नतीजा पलट सकता है। इन सीटों पर न सिर्फ पार्टी की ताकत, बल्कि उम्मीदवार की छवि, स्थानीय मुद्दे और बूथ मैनेजमेंट बहुत बड़ा रोल निभाते हैं। आइए जानते हैं वो 7 विधानसभा सीट के बारे में और वहां हार-जीत का अंतर कितना था।

बंगाल की ये हैं वो सीटें जहां हुआ था कांटे का मुकाबला

क्रमांक सीट कुल वैध वोट विजेता पार्टी विजेता वोट उपविजेता पार्टी उपविजेता वोट जीत का अंतर
1 दिनहाटा 2,43,751 निशीथ प्रमाणिक बीजेपी 1,16,035 उदयन गुहा टीएमसी 1,15,978 57
2 बलरामपुर 1,97,965 बनश्वर महतो बीजेपी 89,521 शांतराम महतो टीएमसी 89,098 423
3 दांतन 1,97,798 बिक्रम चंद्र प्रधान टीएमसी 95,209 शक्तिपद नायक बीजेपी 94,586 623
4 कुल्टी 1,74,767 अजय कुमार पोद्दार बीजेपी 81,112 उज्जल चटर्जी टीएमसी 80,433 679
5 तमलुक 2,36,031 सौमेन कुमार महापात्र टीएमसी 1,08,243 हरे कृष्ण बेड़ा बीजेपी 1,07,450 793
6 जलपाईगुड़ी 2,25,933 डॉ. प्रदीप कुमार बरमा टीएमसी 95,668 सुजीत सिंघा (पिकू) बीजेपी 94,727 941
7 घाटाल 2,25,375 सीतल कपाट बीजेपी 1,05,812 शंकर दोलाई टीएमसी 1,04,846 966

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क्यों ये सीटें हैं ‘गेम चेंजर’?

इन सीटों का सबसे बड़ा फैक्टर है ‘लो मार्जिन’। जब जीत का अंतर 1000 वोट से कम हो, तो इसका मतलब है कि सिर्फ 1-2% वोट स्विंग भी नतीजा बदल सकता है।

राजनीतिक तौर पर इसे ‘स्विंग सीट’ कहा जाता है। यहां पर

  • उम्मीदवार बदलते ही समीकरण बदल सकता है
  • स्थानीय मुद्दे चुनाव का रुख तय कर सकते हैं
  • गठबंधन या बगावत का असर सीधा परिणाम पर पड़ता है
  • यानी ये सीटें किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं हैं।

2026 में क्या बदलेगा?

2026 के चुनाव में दोनों प्रमुख पार्टियां इन सीटों पर खास फोकस कर रही हैं। बीजेपी यहां बूथ लेवल मैनेजमेंट मजबूत कर रही है। टीएमसी अपने पुराने वोट बैंक को बचाने और बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। इन सीटों पर उम्मीदवार चयन सबसे बड़ा फैक्टर है। 2021 में जहां मामूली अंतर से जीत मिली थी, वहां इस बार नए चेहरे या मजबूत स्थानीय नेता उतारे गए हैं।

इन सीटों पर जातीय समीकरण, ग्रामीण-शहरी संतुलन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे निर्णायक होंगे। उदाहरण के तौर पर दिनहाटा और बलरामपुर जैसी सीटों पर सीमावर्ती मुद्दे असर डालते हैं। कुल्टी और घाटाल में औद्योगिक और रोजगार के मुद्दे अहम हैं। तमलुक और जलपाईगुड़ी में स्थानीय विकास और संगठन की ताकत काम करती है

2021 में ये सीटें भले ही ‘करीबी मुकाबले’ के रूप में सामने आईं, लेकिन 2026 में यही सीटें सत्ता की चाबी बन सकती हैं। अगर किसी एक पार्टी ने इन 7 सीटों में से 4-5 सीटें भी अपने पक्ष में कर लीं, तो पूरे राज्य का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। यही वजह है कि इस बार बंगाल चुनाव में असली खेल इन ‘1000 वोट’ वाली सीटों पर ही होगा।



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