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उधार के नियम: क्रेडिट कार्ड धारक ˘की मृत्यु होने के बाद कौन चुकाएगा बकाया कर्ज?


परिवार के लिए अपने सदस्य को खोना सबसे बड़ा आघात होता है। ऐसे में यदि उस व्यक्ति के नाम पर क्रेडिट कार्ड का कर्ज बकाया रह जाए, तो चिंता और बढ़ जाती है।  पति, पत्नी, बच्चे या माता-पिता किसी भी मृत व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड के कर्ज के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं होते हैं। 

क्रेडिट कार्ड असुरक्षित श्रेणी में आता है, यानी इसके बदले कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखी जाती। कार्डधारक की मृत्यु के बाद यह कर्ज सीधे तौर पर खत्म नहीं होता, बल्कि मृतक की संपत्ति पर एक दावा बन जाता है।

कैसे होती है कर्ज की भरपाई?

मृतक व्यक्ति द्वारा छोड़ी गई संपत्ति, जिसमें उसके बैंक खाते, एफडी, म्यूचुअल फंड और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं, को एस्टेट कहा जाता है। किसी भी असुरक्षित व्यक्तिगत कर्ज या क्रेडिट कार्ड के बकाए का भुगतान मृतक की संपत्ति से ही किया जा सकता है। कानूनी उत्तराधिकारी केवल तभी तक उत्तरदायी होते हैं, जब तक उन्हें उस संपत्ति या विरासत का हिस्सा मिला है।


  • यदि मृतक के पास संपत्ति कम है और बकाया कर्ज ज्यादा है, तो उपलब्ध राशि से भुगतान के बाद बचे हुए कर्ज को बैंक या कार्ड जारीकर्ता द्वारा बट्टे खाते में मानकर राइट-ऑफ कर दिया जाता है।

यदि कोई वसीयत न हो, तब क्या होगा?


  • वसीयत होने पर: वसीयत में नियुक्त किया गया एग्जीक्यूटर संपत्ति के फंड से सबसे पहले सभी बकाया कर्ज चुकाता है और उसके बाद ही बची हुई संपत्ति परिवार के सदस्यों को सौंपता है।

  • वसीयत न होने पर: यदि कोई वसीयत नहीं है, तो अदालत द्वारा एक प्रशासक नियुक्त किया जाता है, जो संपत्ति का प्रबंधन करता है, कर्ज निपटाता है और शेष हिस्से को कानूनी नियमों के तहत बांटता है।

किन मामलों में परिवार को चुकानी पड़ सकती है रकम?

कुछ खास परिस्थितियों में जिम्मेदारी बदल सकती है:


  • ज्वाइंट अकाउंट या को-एप्लीकेंट: यदि क्रेडिट कार्ड का खाता ज्वइंट था या परिवार का कोई अन्य सदस्य कर्ज में को-एप्लीकेंट था, तो वह भुगतान के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बना रहता है।

  • ऐड-ऑन कार्ड: ऐड-ऑन कार्डधारकों के नियम अलग होते हैं, लेकिन मुख्य देनदारी प्राइमरी कार्डधारक के खाते की ही होती है।

तो आपको क्या करना चाहिए?

भविष्य में परिवार को ऐसी किसी भी उलझन से बचाने के लिए एक स्पष्ट और अपडेटेड वसीयत तैयार रखना हमेशा एक समझदारी भरा कदम है।  

डिस्क्लेमर: अपना पैसा में छपे विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। इनसे अखबार या उसके प्रबंधन की सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अखबार या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।



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