3 घंटे पहले
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पी. चिदंबरम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। वे तमिलनाडु से आते हैं और फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं।
कांग्रेस के सीनियर लीडर पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।”
चिदंबरम ने यह प्रतिक्रिया मोदी के बयान के एक दिन बाद दी। 15 अगस्त को लाल किले से संबोधन के दौरान पीएम ने कहा था कि देश को दिमागी नक्सलियों से बचना चाहिए।
मोदी ने नागरिकों से ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की अपील की थी।

पीएम बोले थे- देश को सतर्क रहने की जरूरत, 5 बातें…
- माओवादी सोच वाले लोगों ने सालों तक सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बना ली थी। वे सरकारी समितियों में सलाहकार रहे और उन्होंने सरकारी नीतियों को प्रभावित किया।
- इस चुनौती को कम करके नहीं आंकना चाहिए। इसके लिए देश को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
- दशकों से चले आ रहे नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने लाखों युवाओं की जिंदगी और उनके सपनों को बर्बाद कर दिया।
- इस संघर्ष में 3,500 से ज्यादा पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के जवान मारे गए, जो युद्धों में मारे जाने वाले सैनिकों की संख्या से काफी ज्यादा है।
- नक्सलवाद ने भारत के बहुत बड़े हिस्से और बड़ी आबादी को बंदूक के दम पर अपने कब्जे में रखा था।”
कांग्रेस ने दिमागी नक्सल को खोखला बताया

कांग्रेस ने मोदी के बयान पर कहा कि दिमागी नक्सल खोखला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पहले जाति जनगणना की मांग को अर्बन नक्सल सोच बताकर खारिज किया गया था, लेकिन एक साल पहले जाति आधारित जनगणना की घोषणा कर दी गई।
उन्होंने कहा कि पहले विरोधियों की मांगों को अपमानजनक नाम दिए जाते हैं, फिर बाद में उन्हीं मांगों को मान लिया जाता है। 12 साल बाद भी उनके राजनीतिक भाषण में कुछ नया नहीं था।
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80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले पर 75 मिनट की स्पीच दी। पीएम ने कहा- ‘हथियारी नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। समाज को गलत राह पर ले जाने के लिए तरह-तरह के काम कर रहे हैं।’ पूरी खबर पढ़ें…




