नई दिल्ली34 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर बुधवार को बंटा हुआ फैसला दिया है। दो जजों की बेंच को यह फैसला लेना था कि केस पांच जजों की बेंच को भेजा जाए या नहीं।
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मामले को बड़ी बेंच को भेजने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। वहीं जस्टिस एससी शर्मा ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
दोनों जजों ने केस CJI सूर्यकांत के सामने रखने के निर्देश दिए। साथ ही CJI से अनुरोध किया कि वे कि केस की सुनवाई के लिए पांच जजों की स्थायी बेंच बनाने की संभावना पर विचार करें।

जस्टिस शर्मा बोले- संसद कानून बना चुकी
जस्टिस शर्मा ने कहा कि जब पिछला फैसला आया तो वह एक वैक्यूम को भरने के लिए था। चयन को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। तब कोर्ट ने प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस की कमेटी की बात कही। अब स्थिति अलग है। संसद कानून बना चुकी है। मेरा फैसला है कि मामला चीफ जस्टिस के सामने रखा जाए और वह 5 जजों की बेंच बनाएं।
याचिकाओं में नियुक्ति पैनल से CJI को हटाने पर सवाल
याचिकाओं में 2023 के उस कानून की वैधता को चुनौती दी गई है, जो CEC और इलेक्शन कमिश्नर्स की नियुक्ति से जुड़ा है। इस कानून में इलेक्शन कमिश्नर्स की नियुक्ति करने वाले चयन पैनल से CJI को हटा दिया गया था।
इस कानून का बचाव करते हुए केंद्र ने दलीली दी- यह मान लेना गलत होगा कि चयन समिति में संख्या बल होने के कारण प्रधानमंत्री और मंत्री ‘बुरी मंशा’ से काम करेंगे या लोकतंत्र के खिलाफ जाएंगे।
प्रधानमंत्री पर भरोसा करने का सवाल नहीं: कोर्ट
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि अदालत प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं करती, ऐसा सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा- हम प्रधानमंत्री पर भरोसा क्यों नहीं करेंगे? निश्चित रूप से करेंगे।
असली मुद्दा यह है कि चुनाव आयुक्त स्वतंत्र व्यक्ति होना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या चयन समिति में ऐसे लोग नहीं होने चाहिए, जिससे निष्पक्षता दिखाई भी दे।

चयन प्रक्रिया में CJI को बाहर रखने पर है विवाद
यह कानून दिसंबर 2023 में संसद से पारित हुआ था और 29 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले के खिलाफ है, क्योंकि इसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर रखा गया है। यह याचिकाएं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), कांग्रेस नेता जया ठाकुर, संजय नारायणराव मेश्राम, धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा और वकील गोपाल सिंह ने दाखिल की थीं।
नए कानून में चयन समिति में कौन-कौन हैं?
2023 के कानून के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री के नामित एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) शामिल होते हैं।

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मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत अब यह तय करेगी कि नियुक्ति प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय पीठ के पास भेजा जाए या नहीं। पढ़ें पूरी खबर…




