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जंतर-मंतर हिंसा, सुप्रीम कोर्ट का जांच कमेटी बदलने से इनकार: कहा- अभी सवाल उठाना जल्दबाजी; 5 सदस्यीय टीम पैलेट गन इस्तेमाल के दावों का पता लगा रही


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10 मिनट पहले

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दिल्ली के जंतर-मंतर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से 25 जुलाई तक चला था।

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों की जांच कर रही हाई-पावर्ड एनक्वायरी कमेटी (HPEC) को बदलने की मांग खारिज कर दी।

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि कमेटी ने अभी जांच शुरू ही की है। अभी से आपत्ति जताना जल्दबाजी है।

कोर्ट ने कहा कि HPEC पर लगाए गए आरोप महज अनुमान हैं। इसे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कोर्ट की मदद करने के लिए बनाया गया है। इसका काम किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं है।

18 अगस्त को बनी थी 5 सदस्यीय कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को पांच सदस्यीय HPEC बनाई थी। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी जंतर-मंतर और दूसरी जगहों पर हुई हिंसा की जांच करेगी।

इसमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के ज्यादा बल प्रयोग और सुरक्षाबलों के खिलाफ हुई हिंसा के आरोप शामिल हैं। कमेटी सीधे सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करेगी और उसकी निगरानी में काम करेगी।

कोर्ट ने कमेटी को सबसे पहले पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच करने को कहा है। महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की भी जांच होगी।

दोनों पक्षों की ओर से हुई ज्यादा हिंसा और संपत्ति को हुए नुकसान की भी जांच की जाएगी। प्रदर्शन से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों पर कोर्ट बाद में फैसला करेगा।

गवाहों की पहचान गुप्त रहेगी

कोर्ट ने संवेदनशील गवाहों की पहचान गुप्त रखने का निर्देश दिया है। उनके बयान और सबूत भी गोपनीय रखे जाएंगे।

गवाहों के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने की संभावना है। इसके जरिए वे गोपनीय तरीके से दस्तावेज और सबूत जमा कर सकेंगे।

कोर्ट ने कहा कि नोडल काउंसिल सिर्फ कोर्ट की मदद करेगा। वह HPEC, कोर्ट और मामले से जुड़े पक्षों के बीच संपर्क का काम नहीं करेगा।

दो वकील अमिकस क्यूरी बनाए गए

सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट डॉ. मोनिका गुसैन और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सी. सोलोमन को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। वे दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ के तौर पर काम करेंगे।

HPEC को एक मेंबर सेक्रेटरी नियुक्त करने का निर्देश भी दिया गया है। कमेटी को अपनी पहली रिपोर्ट जल्द कोर्ट में पेश करनी होगी।

14 साल की प्रदर्शनकारी को सुरक्षा देने का आदेश

सुनवाई में 14 साल की एक प्रदर्शनकारी और उसके परिवार को मिल रही धमकियों का मामला भी उठा। कोर्ट को बताया गया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली हैं।

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बच्ची और उसके परिवार के खतरे का आकलन करने को कहा। उन्हें जरूरी सुरक्षा देने का भी निर्देश दिया। पुलिस को धमकियों और उत्पीड़न की शिकायतों की जल्द जांच करने को कहा गया है।

दिल्ली पुलिस को अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

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