वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत एक नई औद्योगिक क्रांति के लिए तैयार है। देश हाई-टेक और डीप-इंजीनियरिंग के छह नए क्षेत्रों में अपनी औद्योगिक नींव रख रहा है। घरेलू मांग, नीतिगत प्रोत्साहन और निजी क्षेत्र की पूंजी इस बदलाव को गति दे रही है। देश का विशाल घरेलू बाजार नए उद्योगों के विस्तार में मदद कर रहा है।
जेफरीज ने अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डाटा सेंटर, सोलर और एयरोस्पेस को उच्च वृद्धि वाले छह क्षेत्रों के रूप में पहचाना है। इन क्षेत्रों में सरकार का समर्थन स्पष्ट रूप से दिख रहा है। इसमें निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष खोलना और डाटा सेंटरों के लिए कर छूट शामिल है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा के लिए प्रोत्साहन योजनाएं भी हैं। स्थानीयकरण के उपाय और सरकार की ओर से जीपीयू की खरीद भी इसमें शामिल है।
यह वृद्धि बिजली, निर्माण, कूलिंग, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स व नेटवर्क जैसे सहायक क्षेत्रों में भी मौके पैदा कर रही है। भारत नए क्षेत्रों में क्षमताएं विकसित कर रहा है, जो घरेलू और वैश्विक बाजारों दोनों की सेवा कर सकती हैं।
तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से उभरते अवसरः दुनियाभर के निगमों, संस्थागत निवेशकों और सरकारों को वित्तीय और पूंजी बाजार से जुड़ी सेवाएं देने वाले जफरीज के मुताबिक, भारत टेक्नोलॉजी-इंटेंसिव और रणनीतिक क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। बड़े घरेलू अवसर उभरते उद्योगों में अधिक निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर रहे हैं। सरकारी उपाय नीतिगत सुधारों और लक्षित प्रोत्साहनों के जरिए इस गति को और मजबूत कर रहे हैं।
जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जब दुनिया पश्चिम एशिया तनाव और अन्य वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है, तब ये सभी विकास कारक मिलकर निवेश, नवाचार (इनोवेशन) और घरेलू मूल्य संवर्धन के मोर्चे पर नए रास्ते तैयार कर रहे हैं। इससे न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी, बलि्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की साख मजबूत होगी।
चुनौतियों के बीच ये सेक्टर देंगे देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार
अंतरिक्ष : निजी उद्यम ने रखा नई कक्षा में कदम
- भारत अंतरिक्ष में सक्रिय गिने-चुने देशों के समूह में शामिल है। 2020 में सरकार ने अंतरिक्ष गतिविधियों को निजी भागीदारी के लिए खोला था।
- मार्च 2026 तक इस क्षेत्र में निजी निवेश 61.85 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया था। जुलाई तक 105 अनुमतियां दी जा चुकी थीं।
- स्काईरूट एयरोस्पेस, पिक्सल, अग्निकुल कॉस्मॉस और दिगंतरा जैसी कंपनियां क्षमताएं विकसित कर रही हैं।
सेमीकंडक्टर : 20 अरब डॉलर का निवेश
- भारत का सेमीकंडक्टर अभियान परियोजना निष्पादन की ओर बढ़ रहा है। इसमें 20 अरब डॉलर का निवेश पाइपलाइन में है। एक फैब्रिकेशन प्लांट निर्माणाधीन है।
- कई आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग परियोजनाएं उत्पादन शुरू कर रही हैं।
- ब्रोकरेज को 13 अरब डॉलर की एक और प्रोत्साहन योजना की उम्मीद है। इस योजना से चिप डिजाइन सहित घरेलू मूल्य संवर्धन को भी अधिक प्रोत्साहन मिलने की आशा है।
डाटा सेंटर : क्षमता में 5 गुना वृद्धि की तैयारी
- डाटा सेंटर भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे के एक रणनीतिक हिस्से के रूप में उभर रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में डाटा सेंटर क्षमता (कोलैकेशन कैपेसिटी) 5 गुना बढ़कर लगभग 2 गीगावट तक पहुंच गई है।
- क्लाउड एडॉप्शन, डिजिटाइजेशन और डाटा लोकलाइजेशन की जरूरतें इस विस्तार को बढ़ावा दे रही हैं।
- अगले पांच वर्षों में यह क्षमता लगभग पांच गुना बढ़कर करीब 10गीगावट होने की उम्मीद है।
- इस विस्तार के जरिये बिजली, कूलिंग, निर्माण और नेटवर्क बुनियादी ढांचे में 45 अरब डॉलर के निवेश का अवसर है। इससे डाटा सेंटर ऑपरेटरों के लिए 9 अरब डॉलर के राजस्व का अवसर भी उपलब्ध होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स : असेंबली से निर्माण की ओर कदम
- भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग अब असेंबली से आगे बढ़कर कलपुर्जा निर्माण की ओर बढ़ रहा है।
- ईसीएमएस (कंपोनेंट्स स्कीम) और एमपीएमएस (मोबाइल 2.0) जैसी योजनाएं इस एकीकरण को समर्थन दे रही है। इन पहलों का उद्देश्य आयात पर निर्भरता को कम करना है।
- अगले छह वर्षों में मोबाइल कंपोनेंट शृंखला में घरेलू मूल्य संवर्धन 50 फीसदी हो जाएगा, जो वर्तमान में 20 फीसदी से भी कम है।
- प्रिंटेड सर्किट बोर्ड यानी एचडीआई और मल्टी-लेयर दोनों, प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं। यह सेगमेंट 85-90% आयात के साथ 5 अरब अमेरिकी डॉलर के कुल एड्रेसेबल मार्केट का प्रतिनिधित्व करता है।
- भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 में 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में 12 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

सोलर मैन्युफैक्चरिंग : घरेलू उत्पादन का विस्तार
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर पीवी निर्माता बनकर उभरा है। देश में लगभग 35गीगावट सौर सेल क्षमता पहले से ही चालू है, जबकि लगभग 100गीगावाट क्षमता निर्माणधीन है।
- मॉडलों और निर्माताओं की अनुमोदित सूची (एएलएमएम), घरेलू सामग्री की आवश्यकताएं और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव जैसे नीतिगत उपाय एकीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं।
- देश 2030 तक सोलर मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन का लगभग 90% स्थानीयकृत करने की उम्मीद है।

एयरोस्पेस : मेड इन इंडिया से वैश्विक उड़ान की ओर
- भारत का एयरोस्पेस उद्योग भी वैश्विक मांग-आपूर्ति असंतुलन से लाभ उठा रहा है। इससे भारत की लागत-प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाने का अवसर मिल रहा है। देश की इंजीनियरिंग प्रतिभा इस अवसर को और मजबूत करती है।
- बोइंग और एयरबस वर्तमान में भारत से सालाना 1.4-1.6 अरब डॉलर के कंपोनेंट्स मंगाते हैं।
- एस्क्यूज, आजाद , डीवाईटीसी, बीएचएफसी, आरडब्ल्यू, मोथर्सन और सैन्सेरा जैसी भारतीय कंपनियां वैश्विक ओईएम (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) और टियर-1 आपूर्तिकर्ताओं के रूप में तेजी से विस्तार कर रही हैं।



