Homeव्यवसायटाटा-मिस्त्री में सुलह की सुगबुगाहट: चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद बढ़ी बातचीत;...

टाटा-मिस्त्री में सुलह की सुगबुगाहट: चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद बढ़ी बातचीत; किन विकल्पों पर हो रहा विचार?


टाटा संस और साइरस मिस्त्री परिवार के बीच वर्षों से चला आ रहा ऐतिहासिक कॉरपोरेट टकराव अब एक निर्णायक और व्यावहारिक समाधान की ओर बढ़ता दिख रहा है। शापूरजी पलोनजी समूह (एसपी ग्रुप) पर लदे भारी-भरकम और महंगे कर्ज के बोझ ने दोनों पक्षों को एक ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया है, जहां टाटा संस में मिस्त्री परिवार की 18.4 फीसदी हिस्सेदारी को भुनाने के फॉर्मूलों पर गोपनीय बातचीत चल रही है।

सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के प्रतिनिधि एसपी ग्रुप के साथ नकदी जुटाने के विभिन्न तरीकों पर विचार कर रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख विकल्प यह है कि टाटा संस की 18.4 फीसदी हिस्सेदारी के बदले एसपी ग्रुप को टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों जैसे टाटा पावर आदि के शेयर ट्रांसफर कर दिए जाएं।

चेयरमैन के इस्तीफे के बाद क्या हुआ

टाटा संस में 66 फीसदी की बहुलांश हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स की कमान नोएल टाटा के हाथों में आने और चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के फरवरी में पद छोड़ने की घोषणा के बाद से इन वार्ताओं ने गति पकड़ी है। असल में बातचीत की सबसे अहम कड़ी पारिवारिक रिश्तेदारी है।

  

नोएल टाटा का विवाह एसपी ग्रुप के मौजूदा चेयरमैन शापूर मिस्त्री की बहन आलू मिस्त्री से हुआ है। ऐसे में कड़वे कानूनी मुकदमों के बजाय एक सौहार्दपूर्ण वित्तीय समझौते की संभावना पहले से कहीं अधिक मजबूत मानी जा रही है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा संस का रवैया इस डील के प्रति सख्त रहा था।

एसपी ग्रुप की मजबूरी

एसपी ग्रुप के लिए यह समझौता असल में मजबूरी बन चुका है। समूह ने हाल ही में भारत के सबसे बड़े प्राइवेट क्रेडिट सौदों में से एक के तहत भारी फंड जुटाया है। समूह की इकाई इक्विजेन इनवेस्टमेंट ने 18.95 फीसदी के भारी ब्याज पर 36 महीने के बॉन्ड जारी किए हैं।

बॉन्ड का पहला बड़ा भुगतान जुलाई 2028 तक होना है…ऐसे में अगले 18 महीनों के भीतर एसपी ग्रुप को अपने महंगे कर्ज को निपटाने के लिए इस हिस्सेदारी से नकदी निकालनी ही होगी।

ये भी पढ़ें: 22000 करोड़ के ऋण समाधान पर विवाद: जी समूह के सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी पर लगाए आरोप, रिलायंस ने क्या कहा?

मूल्यांकन सबसे बड़ी चुनौती

इस संभावित सौदे में सबसे बड़ा रोड़ा टाटा संस का सटीक वैल्यूएशन तय करना है। टाटा संस देश के नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक फैले 100 से अधिक ऑपरेटिंग कंपनियों के विशाल साम्राज्य की नियंत्रक कंपनी है।

लिस्टेड कंपनियों का बाजार भाव तय है, लेकिन टाटा संस के पास एअर इंडिया और आईफोन बनाने वाली टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी विशाल अनलिस्टेड कंपनियां भी हैं, जिनकी सही वैल्यू तय करना दोनों पक्षों के लिए आसान नहीं होगा।

शेयरों की अदला-बदली में लिस्टेड कंपनियों के शेयर शामिल होने के कारण सेबी के टेकओवर कोड, खुले बाजार नियमों और आरबीआई के एनबीएफसी लिस्टिंग दिशा-निर्देशों के कानूनी पहलुओं की गहन समीक्षा होगी।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments