Homeटेक्नोलॉजीदिल्ली हाईकोर्ट बोला- सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा लापरवाही का नतीजा: यह...

दिल्ली हाईकोर्ट बोला- सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा लापरवाही का नतीजा: यह सामान्य दुर्घटना नहीं; 10 दिन पहले गिरा था 5 मंजिला हॉस्टल, 7 की मौत हुई थी




दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि सत्य निकेतन में हॉस्टल की बिल्डिंग गिरना सामान्य हादसा नहीं था। इस हादसे में छात्रों समेत 7 लोगों की मौत हुई थी। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि 4 छात्र छोटे शहरों से करियर बनाने की उम्मीद लेकर दिल्ली आए थे। कुछ लोगों के “लापरवाह और आपराधिक रवैये” ने उनके सपने तोड़ दिए। सत्य निकेतन में दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास लड़कों के लिए पेइंग-गेस्ट आवास था। मरम्मत के दौरान 6 सितंबर को यह बहुमंजिला इमारत गिर गई थी। हादसे में कई लोग घायल भी हुए थे। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि घटना के बाद अधिकारियों ने कई कदम उठाए हैं। इनमें छात्रों के लिए जमीन और दूसरी सुविधाओं की पहचान और उनका नक्शा तैयार करना शामिल है। बेंच ने मौखिक टिप्पणी में कहा, “चार छात्रों ने हादसे में जान गंवाई। यह बेहद दुखद है। यह सामान्य दुर्घटना नहीं है।” कोर्ट ने कहा, “ये चारों छात्र छोटे शहरों से कई उम्मीदें और सपने लेकर राजधानी आए थे। वे अपना करियर बनाना चाहते थे। कुछ लोगों के ऐसे लापरवाह और आपराधिक रवैये ने उनके सारे सपने तोड़ दिए।” दिल्ली में हॉस्टल की कमी पर सवाल अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि अधिकारियों ने घटना के बाद कई कदम उठाए हैं। इनमें छात्रों के लिए जमीन और अन्य सुविधाओं की पहचान कर उन्हें अलग रखना भी शामिल है। हालांकि, बेंच ने कहा कि हॉस्टल की कमी कोई “नई समस्या” नहीं है। कोर्ट ने कहा, “शहर में हॉस्टल की समस्या के बारे में कौन नहीं जानता?” बेंच ने कहा कि छात्र उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आ रहे हैं। पिछले 20-25 साल से वे करियर बनाने की उम्मीद में राजधानी आ रहे हैं। कोर्ट ने कहा, “देखिए, क्या हो गया।” PIL में स्वतंत्र जांच और मुआवजे की मांग कोर्ट सत्य निकेतन हादसे की स्वतंत्र जांच की मांग वाली PIL पर सुनवाई कर रहा था। यह PIL आकर्षक दानवीर राठी ने दायर की है। याचिका में सभी पेइंग-गेस्ट आवासों की जांच की मांग की गई है। इसमें पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए मुआवजे और पुनर्वास योजना की मांग भी की गई है। बेंच ने कहा कि इस PIL पर 25 सितंबर को लंबित एक अन्य याचिका के साथ सुनवाई होगी। 7 सितंबर को MCD जांच के आदेश हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को घटना की उच्चस्तरीय MCD जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। कोर्ट ने कहा था कि यह घटना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है। इससे हॉस्टल समेत छात्रों के लिए पर्याप्त आवास सुविधाओं पर गंभीर चिंता पैदा हुई है। अदालत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और सरकार की ओर से चलाए जा रहे हॉस्टलों की स्थिति पर भी चिंता जताई थी। इसके अलावा, छात्रों की सुरक्षा और पेइंग-गेस्ट सुविधाओं को नियंत्रित करने के लिए MCD और अन्य अधिकारियों के अपर्याप्त कदमों पर सवाल उठाए थे।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments