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बंकिमचंद्र के वंशज बोले-सोनिया ने वंदे मातरम् का अपमान किया: बिना शर्त माफी मांगें; कांग्रेस मुख्यालय में बार-बार राष्ट्रीय गीत रोकने का इशारा किया था


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कोलकाता/नई दिल्ली6 मिनट पहले

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वे बंकिमचंद्र के भाई पूर्णचंद्र की पांचवीं पीढ़ी के वंशज हैं।

बंगाल के नैहाटी से BJP विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने वंदेमातरम् के अपमान पर सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। दरअसल, सोनिया ने स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् को रुकवाने का इशारा किया था।

चटर्जी का दावा है कि सोनिया ने वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाने को लेकर असहजता दिखाई और इसे रोकने की बार-बार कोशिश की।

BJP विधायक चटर्जी ने सोनिया गांधी के नाम एक लेटर लिखा है। जिसमें उन्होंने खुद को आम नागरिक, देशभक्त और बंकिमचंद्र का सीधा वंशज बताया।

उन्होंने कहा कि इस घटना के कारण उन्हें गहरा दर्द है। उन्हें गुस्सा आ रहा है। क्योंकि ये शहीदों का अपमान है।

पहले देखिए कांग्रेस मुख्यालय की वीडियो क्लिप…

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चटर्जी बोले- कांग्रेस ने ऐतिहासिक गलती दोहराई

चटर्जी ने जो लेटर लिखा है उसमें कहा है कि 15 अगस्त की घटना केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराना है। उन्होंने अरविंद की उस बात का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम को देश को ‘देशभक्ति के धर्म’ में दीक्षित करने वाला मंत्र बताया था।

5 पॉइंट में पढ़ें, लेटर में और क्या है…

  • आजाद भारत की धरती पर वंदे मातरम को पूरा गाने में अनिच्छा, खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।
  • वंदे मातरम का आजादी की लड़ाई में खास महत्व रहा है। 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी ने इसका पाठ किया था।
  • 1909 में बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने उनके राजद्रोह मुकदमे की सुनवाई के दौरान वंदे मातरम गाया था।
  • 1938 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी में निजाम की पाबंदियों के बावजूद राष्ट्रवादी छात्रों ने इसे नारे की तरह इस्तेमाल किया था।
  • 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर की ओर से वंदे मातरम को गाया गया था।

कांग्रेस की ‘दोहरी नीति’ पर सवाल उठाया

सुमित्रो ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘दोहरी नीति’ कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा- “1937 में पार्टी ने मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुककर उसी साल अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया था। उस समझौते की परछाई एक बार फिर कांग्रेस के आचरण में दिखाई दे रही है।”

चटर्जी ने कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के छात्र संगठन छात्र परिषद के नारे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्र परिषद ‘मंत्र मोदेर संजीवन, वंदे मातरम’ नारे का इस्तेमाल करती है। इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि पार्टी की टॉप लीडरिशप इसी गीत को लेकर असहज क्यों है।

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वंदे मातरम किसी एक पार्टी की संपत्ति नहीं

सुमित्राे ने अपने लेटर में लिखा है कि वंदे मातरम किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। यह देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर विरासत और शहीदों के खून और बलिदान से मिला पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।

इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास का सम्मान करने के बराबर है। इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं।

सोनिया गांधी से आत्ममंथन करने और सभी देशवासियों, खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की।



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