Homeटेक्नोलॉजीसीजेआई बोले- ये छात्रों और मेरे बीच की बात: बार काउंसिल...

सीजेआई बोले- ये छात्रों और मेरे बीच की बात: बार काउंसिल दखल देने वाला कौन होता है; जस्टिस सूर्यकांत का हैदराबाद यूनिवर्सिटी में विरोध हुआ था


नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR से जुड़े विवाद को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह छात्रों और मेरे बीच की बातचीत है, BCI इसमें दखल देने वाला कौन होता है?

CJI सूर्यकांत ने BCI के उस सर्कुलर पर नाराजगी जताई जिसमें NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था। CJI ने कहा- यह बिल्कुल बेवजह था।

कोर्ट ने इस पर BCI नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया।

quote image 14 1786688840509

क्या है पूरा मामला?

NALSAR के करीब 450 छात्रों ने CJI सूर्यकांत को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर न्योता वापस लेने की मांग की थी। यह विरोध CJI की उन हालिया टिप्पणियों को लेकर था, जिन्हें छात्रों ने प्रदर्शनकारियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान किया गया बताया था।

इसके बाद BCI ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट अगले आदेश तक न किया जाए। साथ ही यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से तीन दिन में रिपोर्ट मांगकर विरोध अभियान शुरू करने, उसे आयोजित करने या छात्रों को जुटाने वालों की जानकारी मांगी गई थी।

कुछ घंटों में BCI ने फैसला बदला

विरोध के बाद BCI ने उसी दिन अपना फैसला बदल दिया। परिषद ने कहा कि 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और उन्हें किसी दूसरे की गलती के लिए नुकसान नहीं उठाना चाहिए। अब सभी NALSAR छात्र अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल हो सकते हैं।

BCI ने हालांकि कहा कि वह यूनिवर्सिटी से मांगी गई रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है। बाद में BCI ने 2026 बैच के खिलाफ अपनी कार्यवाही भी बंद कर दी और कहा कि बैच के छात्रों की किसी गड़बड़ी या आंदोलन में भूमिका नहीं मिली।

SCBA ने भी BCI के कदम पर सवाल उठाए थे

BCI के शुरुआती आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे मनमाना, गैरकानूनी और जरूरत से ज्यादा कार्रवाई बताते हुए कहा था कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments