जिम में कसरत, डांस या रोजमर्रा के काम के दौरान अचानक होने वाली युवाओं की मौतों के पीछे खून का थक्का बनने का आनुवंशिक इतिहास, दूसरी बीमारियां, धूम्रपान जैसे कारक प्रमुख रूप से सामने आए हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में यह खुलासा किया है।
यह अध्ययन उन मरीजों पर किया गया, जिन्हें समय पर इलाज मिलने के बाद बचा लिया गया। इस अध्ययन के जरिये यह समझने की कोशिश की गई कि कम उम्र में दिल के दौरे व खून के थक्के बनने के लिए कौन से कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।
सतर्कता जरूरी
- जिन्हें पहले भी खून का थक्का बनने की समस्या हो चुकी थी, उनमें दिल के दौरे का खतरा करीब 60 गुना ज्यादा पाया गया।
- जिन मरीजों को पहले से कोई अन्य बीमारी थी, उनमें दिल के दौरे का खतरा 4.6 गुना ज्यादा िमला।
- धूम्रपान करने वालों में दिल के दौरे का खतरा 3.5 गुना ज्यादा था।
- परिवार में पहले किसी को खून का थक्का बना तो, उनमें दिल के दौरे का खतरा 3.3 गुना ज्यादा मिला।
- कोविड के चलते अस्पताल में भर्ती हो चुके लोगों में भी खून का थक्का बनने का मामला देखा गया।
- कोविड टीके से लोगों को कोई नुकसान नहीं हुआ।
देश के 25 बड़े अस्पतालों में 18 से 45 वर्ष के 767 मरीजों को अध्ययन में शामिल किया गया। इनमें 432 यानी 56.3% को दिल का दौरा, जबकि 198 यानी 25.8 को दिमाग की नस में रक्त प्रवाह थमने की समस्या हुई। दोनों को मिलाकर 82% मामले थे। इनमें 614 यानी 80.1% मरीज 31 से 45 साल के थे। इस शोध से उन युवाओं को अलर्ट किया जा सकता है, जिनमें खतरा सामान्य से ज्यादा है।