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अधूरी प्रेम कहानी है रांची का दशम वॉटरफॉल, पत्नी के साथ घूमने पहुंचे थे सीएम हेमंत सोरेन


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रांची से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है दशम वॉटरफॉल चर्चा में है. अभी एक हफ्ता पहले ही सीएम हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ यहां गए हुए थे और यहां से उन्होंने इसे टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित किया. गांव के स्थान निवासी सुशील बताते हैं, तमाड़ के बागुरा पीड़ी गांव का छैला संदू और पाक सकम गांव में रहने वाली बिंदी की प्रेम कहानी अदभुत है. छैला सिंदू को प्रेमिका से मिलने जाने के लिए दशम फॉल पार करना पड़ता था. वह रोज हाथ में बांसुरी, गले में मांदर और कंधे पर मुर्गा लेकर प्रेमिका से मिलने जाता था.

रांची से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है दशम वॉटरफॉल अभी चर्चा का विषय बना हुआ है. अभी एक हफ्ता पहले ही सीएम हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ यहां पर गए हुए थे. यहां से उन्होंने इसे टूरिस्ट प्लेस के रूप में बढ़ावा देने की बात कही थी और लोगों से यहां घूमने आने की अपील भी की थी.

बहुत कम लोग जानते हैं कि अधूरी प्रेम कहानी की दास्तां के रूप में दसम फॉल को याद किया जाता है. दशम फॉल में आज भी छैला की मांदर की ताल और बासुंरी की आवाज सुनाई देती है. छैला संदू और बिंदी की की अमर प्रेम कहानी बताते क्षेत्र के ग्रामीण आज भी भावुक हो जाते है. वर्षां पुरानी छैला-बिंदी की प्रेम कहानी अद्भुत है.

गांव के स्थान निवासी सुशील बताते हैं, तमाड़ के बागुरा पीड़ी गांव का छैला संदू और पाक सकम गांव में रहने वाली बिंदी की प्रेम कहानी अदभुत है. छैला सिंदू को प्रेमिका से मिलने जाने के लिए दशम फॉल पार करना पड़ता था. वह रोज हाथ में बांसुरी, गले में मांदर और कंधे पर मुर्गा लेकर प्रेमिका से मिलने जाता था. दशम को वहां लटकती लताओं के सहारे पार करता था.

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गांव के लोगों को जब इसका पता चला, तो दोनों को जुदा करने की योजना बनायी गयी. ग्रामीणों ने उस लता को आधा काट दिया जिसके सहारे छैला दशम फॉल पार करता था. जैसे ही छैला फॉल पार करने लगा, लता टूट गयी और वह फॉल में समा गया. इस तरीके से प्रेम कहानी का अंत तो हो गया लेकिन, आज भी उसकी गूंज इन फिजाओं में सुनाई देती है.

यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि आज की रात में ऐसा लगता है मानो कोई घुंघरू पहनकर नाच रहा हो, कोई बांसुरी बजा रहा हो. इसलिए डर के मारे इस जगह शाम के 5 या 6:00 के बाद ही सब घर लौट जाते हैं. हिम्मत नहीं है कि शाम 6:00 बजे के बाद यहां पर कोई रुक भी सके.

यहां पर जैसे शाम के पांच बजते हैं, जितने भी लोग घूमने आते हैं यहां से लौटने लगते हैं. शाम के समय यहां पर गजब की सुनसान और सन्नाटा देखने को मिलता है. ऐसा लगता है यह दोनों आज भी यहां पर मिलने आते हैं. इस फॉल की खूबसूरती भी ऐसी है कि एक बार आप देखेंगे तो उसकी खूबसूरती में ही खो जाएंगे. बरसात के दिनों में इसका भयवाह रूप और भी लोगों को आकर्षित करता है.

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