प्रतापगढ़ में रहने वाले दीपक सिंह ने आईपीओ में पैसा लगाकर मोटा मुनाफा कूटने की योजना बनाई। खुद की जेब में थे बस 50 हजार रुपये। मौका हाथ से निकल न जाए, इसलिए बैंक से आईपीओ के लिए 5 लाख रुपये का लोन ले लिया। गणित सीधा था, 10 दिन में आईपीओ लिस्ट होगा, 50-55 फीसदी प्रीमियम मिलेगा, लोन चुकता कर जेब में एकमुश्त मोटा मुनाफा! लेकिन बाजी उल्टी पड़ गई। शेयर प्रीमियम पर खुलने के बजाय अपने इश्यू प्राइस से 12 फीसदी डिस्काउंट पर लिस्ट हुआ।
- 2026 में अबतक कुल 37 आईपीओ आए हैं। इनमें से केवल 20 ने लिस्टिंग डे पर फायदा कराया, जबकि 16 ने नुकसान। एक आईपीओ इश्यू प्राइस पर ही लिस्ट हुआ।
- दीपक को डबल झटका लगा…आईपीओ में नुकसान, दूसरी तरफ ब्याज की मार।
- दीपक अकेले नहीं हैं। हजारों छोटे निवेशक इसी शॉर्टकट के चक्कर में लोन लेकर आईपीओ में दांव लगा रहे हैं।
आखिर क्यों बढ़ रहा है उधार लेकर IPO में निवेश का चलन?
2026 में आए कई आईपीओ ने निवेशकों को लिस्टिंग के दिन शानदार रिटर्न दिए हैं। भारत कोकिंग कोल 76% से अधिक प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुआ। ऐसे उदाहरण देखकर कई निवेशकों को लगता है कि आईपीओ से कम समय में आसान कमाई की जा सकती है। बस इसी वजह से कुछ निवेशक अपनी बचत से आगे बढ़कर उधार लेकर भी आईपीओ में आवेदन करने लगे हैं।
सिर्फ लोन नहीं, शेयर गिरवी रखकर भी लिया जा रहा है पैसा
आजकल निवेशकों के बीच एक और तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज (LAS)। इसमें निवेशक अपने मौजूदा शेयर, म्यूचुअल फंड यूनिट्स, बॉन्ड या अन्य प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर लोन लेते हैं और उस रकम का उपयोग आईपीओ में निवेश के लिए करते हैं।
उधार लेकर आईपीओ में पैसा लगाने के अपने जोखिम हैं:
- लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं : अधिकांश लोग यह मानकर चलते हैं कि हर आईपीओ प्रीमियम पर लिस्ट होगा। लेकिन बाजार का इतिहास बताता है कि कई अच्छे माने जाने वाले आईपीओ भी कमजोर लिस्टिंग दे चुके हैं, इसका ताजा उदाहरण एसबीआई फंड्स है। यदि शेयर डिस्काउंट पर सूचीबद्ध होता है, तो निवेशक को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उधार के पैसे से नुकसान और अधिक होता है, क्योंकि ब्याज देना पड़ता है।
- ब्याज खा सकता है मुनाफा : कोई भी लोन मुफ्त नहीं होता। निवेशक को ब्याज चुकाना पड़ता है। कई बार आईपीओ से मिलने वाला वास्तविक लाभ ब्याज, प्रोसेसिंग और अन्य शुल्क घटाने के बाद काफी कम रह जाता है।
- अलॉटमेंट न मिलने पर भी जेब होगी खाली : ओवर सब्सक्रिप्शन के चलते रिटेल निवेशकों को अलॉटमेंट मिलने की संभावना सीमित होती है। अगर शेयर नहीं मिले, तब भी कुछ मामलों में फंडिंग की लागत देनी होती है।
- बाजार में अचानक गिरावट : आईपीओ आवेदन और लिस्टिंग के बीच बाजार की धारणा बदल सकती है। वैश्विक घटनाएं, ब्याज दरों में बदलाव या घरेलू बाजार में कमजोरी आईपीओ की लिस्टिंग को प्रभावित कर सकती है।
- लेवरेजिंग का दोहरा जोखिम : लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज के जरिये निवेश करने वालों के लिए जोखिम और बढ़ जाता है। अगर बाजार गिर जाता है, तो एक तरफ आईपीओ में नुकसान हो सकता है और दूसरी तरफ आपके गिरवी रखे शेयरों का मूल्य भी कम हो सकता है। ऐसे में मार्जिन कॉल आ सकता है। यदि निवेशक अतिरिक्त पैसा जमा नहीं कर पाता, तो गिरवी रखे गए शेयर या अन्य प्रतिभूतियां बेची भी जा सकती हैं।
IPO में निवेश के लिए उधार लेने की लागत
| उधार का स्रोत | सामान्य ब्याज दर (वार्षिक) |
| बैंक से पर्सनल लोन | 10-18% |
| एनबीएफसी पर्सनल लोन | 12- 24% |
| IPO फंडिंग (ब्रोकरेज/NBFC) | 8-18% (शॉर्ट टर्म) |
| ओवरड्राफ्ट सुविधा | 9-15% |
| लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड | 10-11% |
आगे आने वाले हैं बड़े आईपीओ (करोड़ रुपये)
| आईपीओ | आकार |
| जियो प्लेटफॉर्म | 37,700 |
| एनएसई | 30,000 |
| ओयो | 6,650 |
| क्रेडिला फाइनेंशियल | 5,000 |
| ट्रूहोम फाइनेंस | 3,000 |
| एलिवेट कैंपेसेस | 2,550 |
| शिपरॉकेट | 2,350 |
| इन्नोवेटिवव्यू इंडिया | 2,000 |
| मिल्की मिस्ट | 1,550 |
| आरडी इंडस्ट्रीज | 426 |
जोखिम क्षमता के आधार पर लें फैसला
हर व्यक्ति को अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर निवेश रणनीति बनानी चाहिए। केवल दूसरों को देखकर या उनकी सफलता से प्रभावित होकर कोई निवेश निर्णय न लें। आपकी जोखिम क्षमता, वित्तीय स्थिति और निवेश लक्ष्य दूसरे व्यक्ति से पूरी तरह अलग हो सकते हैं। इसलिए जो रणनीति आपके किसी परिचित के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं कि वह आपके लिए भी सही साबित हो। –पूनम रूंगटा
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर
उधार के पैसे से IPO लिया है, तो क्या रणनीति हो?
- केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम देखकर निवेश का फैसला न करें। कंपनी के बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं को देखें।
- पहले से तय करें कि आपका निवेश उद्देश्य क्या है- लिस्टिंग गेन या लंबी अवधि का निवेश। लालच में आकर रणनीति बार-बार बदलना नुकसानदायक हो सकता है।
- ब्याज लागत को अपने संभावित रिटर्न की गणना में शामिल करें। केवल संभावित मुनाफे को देखकर निवेश का निर्णय न लें।
- उतनी ही राशि उधार लें जिसे चुकाने की आपकी क्षमता हो। निवेश कभी भी कर्ज के बोझ का कारण नहीं बनना चाहिए।



