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अब सस्ता नहीं, पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा होना जरूरी: वरना इलाज में खाली ही होगी जेब, जानें कैसे बचेगा आपका पैसा?


आज के समय में सिर्फ नाम के लिए स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) लेना ही काफी नहीं रह गया है। बदलते समय और बीमारियों के इस दौर में अब ऐसी पॉलिसी लेना जरूरी है, जिससे अस्पताल में इलाज के दौरान आपकी जेब से एक भी पैसा भरने की नौबत न आए। वह पुराना समय अब बीत गया है जब पूरे परिवार के लिए तीन या पांच लाख रुपये का कवर काफी मान लिया जाता था। आजकल अस्पतालों में इलाज इतना महंगा हो गया है कि पच्चीस लाख रुपये से कम का स्वास्थ्य बीमा भी नाकाफी लगने लगा है। हमें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि स्वास्थ्य बीमा महंगा नहीं होता है, बल्कि अस्पताल का इलाज बहुत महंगा होता है। इसलिए, अब सस्ती पॉलिसी के बजाय परिवार की जरूरत के हिसाब से एक बड़ा और पर्याप्त बीमा कवर लेना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है।

इसका सीधा मतलब यह है कि लोगों को अब अपने पुराने और छोटे बीमा कवर को बदलने की जरूरत है। आज के दौर में जब कोई मरीज किसी बड़े अस्पताल के आईसीयू में भर्ती होता है, तो अस्पताल का बिल इतनी तेजी से बढ़ता है कि पांच लाख रुपये का बीमा दो-तीन दिन के भीतर ही खत्म हो जाता है। सरकार ने भी व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर लगने वाले अठारह प्रतिशत जीएसटी को हटाकर शून्य कर दिया है। इस बड़े फैसले के बाद से पूरे देश का बीमा बाजार बदल गया है। प्रीमियम सस्ता होने की वजह से लोग अब छोटे बीमा कवर को छोड़कर पचास लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक का सुपर टॉप-अप प्लान ले रहे हैं।

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20 लाख रुपये से कम का स्वास्थ्य बीमा कवर अब नाकाफी क्यों है?

भारत में इलाज की महंगाई बहुत ही तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, देश में मेडिकल महंगाई सालाना चौदह प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें कि जो इलाज पिछले साल एक लाख रुपये में होता था, उसी इलाज का खर्च इस साल बढ़कर एक लाख चौदह हजार रुपये हो गया है। अगर किसी को कैंसर, किडनी फेलियर या हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारी हो जाए, तो मेट्रो शहरों के बड़े अस्पतालों में इसका बिल आसानी से पंद्रह से पच्चीस लाख रुपये के बीच पहुंच जाता है। अगर आप किसी बड़े मेट्रो शहर में रहते हैं, तो एक परिवार के लिए पच्चीस लाख से पचास लाख रुपये का बेस कवर अब कोई शौक नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जरूरत बन चुका है।

क्या देश में छोटे बीमा कवर का दौर अब पूरी तरह से खत्म हो रहा है?

अब छोटे बीमा का दौर खत्म हो रहा है। पॉलिसीबाजार के पिछले आठ महीनों के आंकड़े साफ तौर पर इसी ओर इशारा करते हैं। सरकार ने जैसे ही स्वास्थ्य बीमा पर 18% जीएसटी खत्म किया, वैसे ही भारतीय लोग सस्ते बीमा की जगह उच्च मूल्य (हाई-वैल्यू) वाले बीमा की ओर बढ़ने लगे हैं। इसे नीचे दी गई टेबल से आसानी से समझा जा सकता है।

 




































कवरेज का प्रकार सितंबर तक वर्तमान स्थिति इसका सीधा असर
10 लाख से कम 26% 10% मांग में भारी गिरावट
10 से 20 लाख 61% 62% स्थिति लगभग स्थिर है
20 लाख से 1 करोड़ 11% 16% मांग में मजबूती आई है
1 करोड़ से अधिक 2% 12% मांग में 6 गुना बढ़त

(स्रोत: पॉलिसीबाजार – सितंबर 2025 में बीमा से GST हटने के बाद के आंकड़े)

लोग अब भारी-भरकम बीमा कवर की मांग तेजी से क्यों कर रहे हैं?

बाजार में बड़े बीमा कवर की मांग बढ़ने के तीन सबसे बड़े कारण हैं। पहला कारण यह है कि जीएसटी हटने से प्रीमियम में 18 प्रतिशत की सीधी गिरावट आई है, जिससे ग्राहकों को बड़ा कवर चुनने की हिम्मत मिली है। दूसरा बड़ा कारण यह है कि भारत में हर पांच से सात साल के भीतर इलाज का खर्च सीधा दोगुना हो जाता है। नेशनल हेल्थ अकाउंट्स की रिपोर्ट बताती है कि देश में इलाज के कुल खर्च का 39 से 47 प्रतिशत हिस्सा आज भी लोगों को अपनी जेब से ही भरना पड़ता है। तीसरा कारण यह है कि ज्यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों को बहुत बड़ा स्वास्थ्य कवर नहीं देती हैं। इसलिए लोग अपनी सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत तौर पर बड़ा कवर खरीद रहे हैं।

क्या अब अपने पुराने और छोटे कवर को अपग्रेड करने का सही समय है?

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर निशा सांघवी के अनुसार, अगर आपने अभी भी पुरानी दर पर कोई छोटा कवर लिया हुआ है, तो अब उसे अपग्रेड करने (बढ़ाने) का बिल्कुल सही समय आ गया है। अगर आपके पास छोटा बेस कवर है, तो आप एक सुपर टॉप-अप प्लान लेकर उसे आसानी से 50 लाख या एक करोड़ रुपये तक ले जा सकते हैं। जीरो जीएसटी लागू होने की वजह से यह अब पहले के मुकाबले बहुत सस्ता पड़ता है। एक सही और बड़ा बीमा प्लान गंभीर बीमारी के समय आपकी जीवन भर की जमा-पूंजी को खत्म होने से बचा सकता है। इसलिए पॉलिसी रिन्यू करते समय बेस कवर बढ़ाने पर जरूर विचार करना चाहिए।

पुराने और नए स्वास्थ्य बीमा के नियमों में कितना बड़ा बदलाव आया है?

बीमा कंपनियों ने अपने नियमों में ग्राहकों के फायदे के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। पहले बीमा लेने की एक उम्र सीमा होती थी, लेकिन अब उम्र की कोई सीमा नहीं है। अब 65 साल की उम्र के बाद भी कोई बुजुर्ग नया स्वास्थ्य बीमा आसानी से ले सकता है। इसके अलावा, पहले से मौजूद बीमारियों (प्री-एग्जिस्टिंग) के इलाज के लिए पहले चार साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिसे अब घटाकर तीन साल कर दिया गया है। सबसे अच्छी बात यह है कि अब नई पॉलिसियों में रोबोटिक सर्जरी, स्टेम सेल थेरेपी जैसे आधुनिक इलाज और ओपीडी का खर्च भी शामिल किया जा रहा है।

नया बीमा लेते या रिन्यू करते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखें?

अपनी पॉलिसी को बिना पढ़े कभी भी रिन्यू नहीं करना चाहिए, क्योंकि कंपनियां हर साल नियम बदलती रहती हैं। सबसे पहले यह चेक करें कि क्या आपके प्लान में ‘सब-लिमिट’ (जैसे कमरे के किराये की सीमा) तो नहीं जोड़ दी गई है। यह भी देखें कि क्या आपकी पॉलिसी में ‘कंज्यूमेबल्स कवर’ जुड़ा है या नहीं, क्योंकि अस्पताल के बिल में 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा मास्क, ग्लव्स और पीपीई किट जैसी चीजों का ही होता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि आपके प्लान में ‘अनलिमिटेड रीस्टोर’ की सुविधा हो। यह सुविधा तब बहुत काम आती है जब एक ही साल में परिवार के कई सदस्य एक साथ बीमार पड़ जाएं।

परिवार और शहर के हिसाब से कम से कम कितना कवर लेना चाहिए?

बीमा हमेशा अपनी जरूरत और अपने शहर की महंगाई को देखकर ही लेना चाहिए। इसे नीचे दी गई टेबल से समझा जा सकता है।


























परिवार का प्रकार आप कहां रहते हैं? न्यूनतम कवर कितना होना चाहिए?
युवा (अकेले रहने वाले) टियर 2 या टियर 3 शहर 15 लाख से 20 लाख रुपये
परिवार (पति-पत्नी और 2 बच्चे) मेट्रो शहर (जैसे दिल्ली/मुंबई) 25 लाख से 50 लाख रुपये
बुजुर्ग (सीनियर सिटीजन) देश का कोई भी शहर 25 लाख बेस + 50 लाख का सुपर टॉप-अप

यहां साफ समझा सकता है कि अगर आप अकेले हैं और छोटे शहर में हैं, तो 15-20 लाख का बीमा काम कर सकता है। लेकिन अगर आप दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में परिवार के साथ रहते हैं, तो आपको कम से कम 25 से 50 लाख रुपये का बीमा जरूर लेना चाहिए। वहीं, बुजुर्गों को बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए उन्हें 25 लाख के कवर के साथ 50 लाख का सुपर टॉप-अप प्लान जरूर रखना चाहिए।



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