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अर्थव्यवस्था: वित्त वर्ष 27 में 7.2% तक रह सकती है भारत की जीडीपी, वृद्धि दर को मिलेगा घरेलू खपत से सहारा


भारत की रियल जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 में 7-7.2 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। इसे मजबूत घरेलू खपत और सरकार के पूंजीगत खर्च से समर्थन मिलेगा। यह जानकारी ईवाई की रिपोर्ट में दी गई।  इस दौरान भारत की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 12.5-13 प्रतिशत के बीच रह सकती है। 

रिपोर्ट में कहा गया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर ग्लोबल ट्रेड माहौल के बावजूद भारत के विकास का आउटलुक काफी मजबूत बना हुआ है। उम्मीद है कि मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों और लगातार सरकारी खर्च से साल भर ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा।

ईवाई के अनुसार, भारत में औद्योगिक गतिविधियों में भी मजबूती के संकेत दिखे हैं। जून 2026 में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में ग्रोथ बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गई, जो 23 महीनों में सबसे ज्यादा है। नतीजतन, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में औसत औद्योगिक वृद्धि बढ़कर 5.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछले आठ तिमाही में सबसे ज्यादा है।

इस सुधार में मैन्युफैक्चरिंग का अहम योगदान रहा, जून में इसका आउटपुट 7.8 प्रतिशत बढ़ा। इसमें इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, मोटर वाहन, टेक्सटाइल और खाद्य उत्पाद भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर में शामिल थे।

हालांकि, कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर बताते हैं कि विस्तार की रफ्तार धीमी हो सकती है। मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जून के 54.2 से घटकर जुलाई में 53.5 हो गया, जबकि सर्विसेज पीएमआई 57.4 से तेजी से गिरकर 53.3 पर आ गया। इस सुस्ती के बावजूद, दोनों इंडेक्स 50 के निशान से ऊपर बने रहे, जिससे पता चलता है कि आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

क्रेडिट की स्थिति भी मददगार बनी रही। ईवाई ने बताया कि जून में ग्रॉस बैंक क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई, जो 25 महीनों में सबसे अधिक है। इससे पता चलता है कि बिजनेस और अर्थव्यवस्था के अन्य सेक्टर के लिए फाइनेंसिंग की सुविधा बनी हुई है।

सरकार का पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर जोर भी ग्रोथ के नजरिए को सपोर्ट करने वाला एक अहम फैक्टर है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 23.3 प्रतिशत की गिरावट के बाद, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में सरकारी पूंजीगत खर्च में तेजी से सुधार हुआ और यह 23.7 प्रतिशत हो गया।

साथ ही, राजकोषीय घाटा सालाना बजट लक्ष्य के 18.2 प्रतिशत पर ही बना रहा। ईवाई का कहना है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर में आई नई तेजी से घरेलू मांग को बनाए रखने और रियल जीडीपी ग्रोथ की संभावनाओं को मजबूत करने में मदद मिलनी चाहिए।

 

 



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