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असम में 18+ उम्र वालों का आधार कार्ड नहीं बनेगा: सरकार बोली- अवैध घुसपैठियों को रोकना मकसद; SC-ST और दिव्यांगों को 2027 तक छूट


गुवाहाटी3 घंटे पहले

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असम सरकार ने अवैध घुसपैठ रोकने के लिए आधार कार्ड के नियम सख्त कर दिए हैं। अब राज्य में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को नया आधार कार्ड नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि इसका मकसद अवैध बांग्लादेशियों को आधार कार्ड हासिल करने से रोकना है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। सीएम सरमा ने कहा कि 18 साल से ज्यादा उम्र के किसी व्यक्ति को आधार कार्ड लेने के लिए विशेष मंजूरी लेनी होगी। जिला आयुक्त प्रस्ताव भेजेंगे, जिसके बाद राज्य सरकार पात्रता की जांच करेगी।

फिलहाल चाय बागान समुदाय, एसटी, एससी और दिव्यांग लोगों को इस नियम से 1 अप्रैल 2027 तक छूट मिलेगी। इन वर्गों के जिन लोगों के पास आधार नहीं है, उन्हें आधार जारी किया जाएगा। इसके बाद इन वर्गों के 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को भी नया आधार कार्ड नहीं मिलेगा।

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18 साल से कम उम्र वालों को कार्ड मिलते रहेंगे

वहीं 18 साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों को पहले की तरह आधार कार्ड जारी होते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पहले से ही आधार जारी करने की प्रक्रिया को सख्त करने की तैयारी कर रही थी, ताकि अवैध घुसपैठ पर रोक लगाई जा सके।

असम कैबिनेट के अन्य फैसले

  • नए ग्रामीण रोजगार कानून के ढांचे को मंजूरी दे दी है। यह व्यवस्था 1 जुलाई से लागू होगी। इस योजना के लिए 2000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को 125 दिन का मजदूरी आधारित रोजगार मिलेगा। सरकार रोजगार के साथ गांवों में स्थायी और उपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी जोर देगी।
  • गुवाहाटी और आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए गुवाहाटी सैटेलाइट सिटीज डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएससीडीए) बनाने को भी मंजूरी दी गई है। यह संस्था नए सैटेलाइट शहरों की योजना, फंडिंग और विकास का काम करेगी। यह गुवाहाटी मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के तहत काम करेगी।
  • अब आईएएस समेत अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को डेप्युटेशन पर भेजने से पहले कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी। असम विधानसभा का बजट सत्र 1 जुलाई से शुरू होगा। राज्य का बजट 6 जुलाई को पेश किया जा सकता है।

अक्टूबर 2024: असम में अप्रवासियों को नागरिकता देने वाला कानून वैध

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में सिटिजनशिप एक्ट की धारा 6A की वैधता को बरकरार रखा था। सिटिजनशिप एक्ट की धारा 6A को 1985 में असम समझौते के दौरान जोड़ा गया था। इस कानून के तहत जो बांग्लादेशी अप्रवासी 1 जनवरी 1966 से 25 मार्च 1971 तक असम आए हैं वो भारतीय नागरिक के तौर पर खुद को रजिस्टर करा सकते हैं।

हालांकि 25 मार्च 1971 के बाद असम आने वाले विदेशी भारतीय नागरिकता के लायक नहीं हैं। CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच ने इस पर फैसला सुनाया था। फैसले पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सहित चार जजों ने सहमति जताई है। वहीं जस्टिस जेबी पारदीवाला ने असहमति जताई।

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सिटीजनशिप एक्ट 1955 की धारा 6A, भारतीय मूल के विदेशी प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की अनुमति देती है। जो 1 जनवरी, 1966 के बाद लेकिन 25 मार्च, 1971 से पहले असम आए थे। यह प्रावधान 1985 में असम समझौते के बाद डाला गया था, जो भारत सरकार और असम आंदोलन के नेताओं के बीच हुआ समझौता था।

ये नेता बांग्लादेश से असम में प्रवेश करने वाले अवैध प्रवासियों को हटाने का विरोध कर रहे थे। जब बांग्लादेश मुक्ति युद्ध समाप्त हुआ था।असम के कुछ स्वदेशी समूहों ने इस प्रावधान को चुनौती दी, उनका तर्क था कि यह बांग्लादेश से विदेशी प्रवासियों की अवैध घुसपैठ को वैध बनाता है।

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