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‘आखिरी गांव’ से बना भारत का पहला गांव, जानें हिमालय के इस गांव की खूबसूरती


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India’s First Village : अगर आप पहाड़ों की शांति, रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का एक साथ अनुभव करना चाहते हैं, तो हिमालय का यह खूबसूरत गांव एक खास जगह हो सकती है. ‘आखिरी गांव’ से ‘भारत का पहला गांव’ बनने का इसका सफ़र इसे देश के अहम सीमावर्ती गांवों में शामिल करता है.

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India’s First Village : भारत में कई ऐसे गांव हैं जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और अनोखी पहचान के लिए जाने जाते हैं. ऐसी ही एक जगह है माणा गांव, जो उत्तराखंड के चमोली ज़िले में भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित है. समुद्र तल से लगभग 3,200 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह गांव लंबे समय तक देश के “आख़िरी गांव” के तौर पर जाना जाता था. हालांकि, 2022 में इसे आधिकारिक तौर पर “भारत का पहला गांव” घोषित किया गया. तब से, यह जगह पर्यटकों के बीच और भी ज़्यादा लोकप्रिय हो गई है…

माणा गांव चारों तरफ ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है. यहां का प्राकृतिक माहौल, बर्फ़ से ढकी चोटियां, पत्थर के पारंपरिक घर और शांत वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं. गांव के आस-पास अलकनंदा और सरस्वती नदियों से जुड़ी कई प्राकृतिक जगहें भी हैं. ज़्यादा ऊंचाई पर होने के कारण यहां का मौसम काफ़ी ठंडा रहता है और सर्दियों में यहां भारी बर्फ़बारी होती है.

आख़िरी गांव’ क्यों कहा जाता था?
माणा गांव भारत-तिब्बत सीमा के बहुत पास बसा है. अपनी इसी भौगोलिक स्थिति के कारण, इसे लंबे समय तक भारत का ‘आख़िरी गांव’ कहा जाता था. हालांकि, पर्यटन और विकास के नजरिए से सीमावर्ती गांवों को एक नई पहचान देने के मकसद से, सरकार ने माना को ‘भारत का पहला गांव’ के तौर पर बढ़ावा देना शुरू किया. इससे इस गांव की पहचान सिर्फ़ एक सीमावर्ती चौकी से बदलकर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में हो गई.

पौराणिक कथाओं से माणा का संबंध
माणा गाँव कई पौराणिक कथाओं से भी जुड़ा है. माना जाता है कि पांडवों ने स्वर्गारोहण (स्वर्ग की यात्रा) के दौरान इस इलाके से गुज़रते हुए यात्रा की थी. यहां मौजूद ‘भीम पुल’ के बारे में भी एक स्थानीय मान्यता है, कहा जाता है कि भीम ने सरस्वती नदी को पार करने के लिए एक विशाल चट्टान का इस्तेमाल करके रास्ता बनाया था.

पर्यटकों के लिए यह जगह खास क्यों है?
माना आने वाले पर्यटक हिमालय के शानदार नज़ारों के साथ-साथ यहां की स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को भी करीब से देख सकते हैं. आस-पास कई धार्मिक और प्राकृतिक स्थल हैं. बद्रीनाथ धाम के पास होने की वजह से, पवित्र तीर्थस्थल पर आने वाले श्रद्धालु माना गांव भी जरूर आते हैं.

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( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.

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Rajvant Prajapati

Rajvant has over 5 years of experience in digital media and content writing. He studied Journalism at the Asian Academy of Film and Television (AAFT), Noida. He is currently working as a Lifestyle Journ…

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