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आरबीआई का नया नियम: बैंक-डीमैट खातों की जानकारी एक जगह, भूली रकम का पता लगाना कितना आसान होगा?


क्या आपके भी अलग-अलग बैंकों में कई खाते हैं, कुछ निवेश शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के डीमैट खातों में फंसे हैं और इन सबका हिसाब-किताब रखने में आपको भारी परेशानी होती है? अगर हां, तो भारतीय रिजर्व बैंक का एक नया और क्रांतिकारी कदम आपके लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। इस डिजिटल व्यवस्था के आगामी 1 जनवरी, 2027 से पूरी तरह लागू होने की उम्मीद है।  

आरबीआई ने वित्तीय जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को पूरी तरह सुगम बनाने के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-अकाउंट एग्रीगेटर (NBFC-AA) के बीच आपसी जुड़ाव की व्यवस्था शुरू करने का बड़ा फैसला किया है।

अकाउंट एग्रीगेटर का नया बदलाव?

अब तक की व्यवस्था में यदि आपकी बैंक की जानकारी किसी एक वित्तीय सूचना प्रदाता के पास थी और निवेश की जानकारी किसी दूसरे के पास, तो आपको अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर भटकना पड़ता था।


  • अब क्या बदलेगा?: इस नई पहल के तहत ग्राहक अपनी पसंद के किसी भी एक एनबीएफसी-अकाउंट एग्रीगेटर के जरिये अलग-अलग जगहों पर बिखरी अपनी तमाम वित्तीय जानकारियां एक ही जगह पर सुरक्षित रूप से देख और साझा कर सकेंगे।

  • पूरी तरह सुरक्षित और डिजिटल: यह मध्यस्थ इकाई पूरी तरह से आपकी सहमति पर काम करती है, जिससे आपका वित्तीय डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

डीमैट और बैंक खाते अब एक ही स्टेटमेंट में

आरबीआई के इस निर्देश के बाद, अब सेबी के नियमन के तहत आने वाली डिपॉजिटरी (जैसे NSDL और CDSL) को यह अनुमति मिल गई है कि वे अपने एकीकृत खाता विवरण (CAS) में बैंक जमा खातों से जुड़ी जानकारी भी शामिल कर सकेंगे।

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डीमैट खाताधारक अब अपने डीमैट खाते की प्रतिभूतियों के साथ-साथ अपने तमाम बैंक डिपॉजिट्स की जानकारी भी एक ही मासिक स्टेटमेंट में देख सकेंगे। जिन लोगों के पास डीमैट खाते नहीं हैं, वे भी अकाउंट एग्रीगेटर के जरिये अपनी वित्तीय जानकारी का एक समेकित विवरण पा सकेंगे।

लावारिस और भूली हुई रकम से मिलेगी मुक्ति

अक्सर देखने में आता है कि लोगों की मृत्यु के बाद उनके बैंक खाते या निवेश लावारिस छूट जाते हैं, जिनके बारे में परिजनों को समय पर पता नहीं चल पाता।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी इस बात पर जोर दिया है कि इस समेकित व्यवस्था से लोग अपने सभी वित्तीय खातों को आसानी से ट्रैक कर सकेंगे, जिससे पैसे खोने या लावारिस होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा।



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