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एक्सप्लेनर: त्योहारी सीजन में ऑनलाइन ठगी से कैसे बचाएं अपना पैसा, एक क्लिक से खाली हो सकता है बैंक खाता


त्योहारों के मौसम में जहां एक तरफ ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट में भारी उछाल आता है, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराधी भी फर्जी कैशबैक, डुप्लीकेट वेबसाइट और एआई-संचालित फिशिंग के जरिये लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आइए समझते हैं कि साइबर अपराधी कैसे काम करते हैं और उनके जाल में फंसने से कैसे बचा जा सकता है।

साइबर ठगी के लिए कौन-से तरीके अपनाते हैं अपराधी?

साइबर अपराधी व्हाट्सएप या अन्य ऐप पर कैशबैक, दिवाली बोनस या गिफ्ट हैम्पर का लालच देकर क्यूआर कोड भेजते हैं। वे यूजर्स से पैसे प्राप्त करने के नाम पर यूपीआई पिन दर्ज करने को कहते हैं, जबकि ऐसा करने से उनके खाते से पैसे कट जाते हैं। मर्चेंट दुकानों पर असली क्यूआर कोड के ऊपर फर्जी कोड चिपका दिए जाते हैं, जिससे ग्राहक का भुगतान दुकानदार के बजाय ठगों के खाते में चला जाता है। बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों और ब्रांड्स के नाम से डुप्लीकेट वेबसाइट बनाई जाती हैं। इनके जरिये भारी डिस्काउंट के फर्जी मैसेज भेजकर लोगों को खरीदारी के लिए आकर्षित किया जाता है।

पेमेंट के दौरान क्या सावधानियां रखें?

यूपीआई पिन का इस्तेमाल केवल पैसे भेजने के लिए किया जाता है। पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए कैशबैक या रिफंड पाने के नाम पर पिन मांगने वालों से सतर्क रहें। किसी भी यूपीआई भुगतान को अधिकृत करने से पहले प्राप्तकर्ता का नाम और भुगतान की राशि अवश्य जांच लें। यह सुनिश्चित करें कि पैसा सही व्यक्ति या मर्चेंट के खाते में ही जा रहा है। त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले ऑफर्स, डिलीवरी अपडेट और प्रमोशनल मैसेज में से असली और फर्जी संदेशों की सावधानीपूर्वक पहचान करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।

फ्रॉड रोकने में बैंकों और कंपनियों की क्या भूमिका है?

बैंकों को केवल धोखाधड़ी होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, पैसे ट्रांसफर होने से पहले ही संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करना चाहिए। इससे समय रहते धोखाधड़ी वाले लेन-देन को रोका जा सकता है।

वित्तीय संस्थानों को एआई आधारित सिस्टम अपनाने चाहिए, ताकि सर्वर ट्रैफिक में अचानक आए उछाल के दौरान भी संदिग्ध लेन-देन और वॉइस या डॉक्यूमेंट क्लोनिंग की पहचान की जा सके। कंपनियों को थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर अपने ब्रांड के नाम और पहचान का दुरुपयोग करके बनाई गई फर्जी लिस्टिंग और वेबसाइटों पर नजर रखनी चाहिए। ऐसी वेबसाइटों और अकाउंट्स के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करना भी जरूरी है।

ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?


  • कैशबैक, रिफंड या गिफ्ट पाने के लिए कभी भी यूपीआई पिन दर्ज न करें।

  • एसएमएस, ईमेल या व्हाट्सएप पर आए अप्रत्याशित डिलीवरी, रिफंड या डिस्काउंट लिंक से बचें।

  • बहुत अधिक छूट देने वाले विज्ञापनों पर भरोसा करने से पहले वेबसाइट के यूआरएल और विक्रेता की विश्वसनीयता जांच लें।

  • अकाउंट ब्लॉक होने की चेतावनी देने वाले मैसेज पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें। ऐसे संदेशों की पुष्टि बैंक के आधिकारिक माध्यमों से करें।

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ठगी का शिकार होने पर तुरंत क्या कदम उठाएं?

यदि आप ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाते हैं तो सबसे पहले अपने बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को घटना की तुरंत सूचना दें। इसके बाद 1930 पर कॉल करके या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जल्द से जल्द शिकायत दर्ज कराएं, ताकि धोखाधड़ी से संबंधित राशि को रोकने या फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा सके। संदिग्ध कॉल और मैसेज की रिपोर्ट संचार साथी पोर्टल के चक्षु फीचर के जरिये भी दर्ज कराई जा सकती है।



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