सेमीकॉन 2.0: अब फोकस सिर्फ फैब पर नहीं
सरकार ने 15 जुलाई 2026 को सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी। इसका कुल बजटीय परिव्यय ₹1,27,500 करोड़ है। इस चरण में केवल फैब लगाने के बजाय चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस पैकेजिंग, मशीन, गैस, सामग्री, उपकरण, रिसर्च और टैलेंट को एक साथ विकसित करने पर जोर दिया गया है।
सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ क्या हैं?
1. चिप डिजाइन: भारतीय डिजाइन वाली चिप, सेमीकंडक्टर आईपी, सिस्टम ऑन चिप और दूसरी डिजाइन क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा।
2. मशीन और सामग्री: फैब के लिए जरूरी मशीनरी, विशेष गैस, रसायन और दूसरी सामग्री की घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर होगा।
3. ज्यादा फैब: सिलिकॉन के साथ कंपाउंड सेमीकंडक्टर, फोटोनिक्स, सेंसर, एमईएमएस, डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।
4. एटीएमपी और ओएसएटी: चिप बनने के बाद उसकी असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग होती है। सेमीकॉन 2.0 में एडवांस पैकेजिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर है।
5. रिसर्च एंड डेवलपमेंट: नई सेमीकंडक्टर तकनीक, चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।
6. टैलेंट डेवलपमेंट: विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योग के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किया जाएगा।



