नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी मिल गई है। यह आईपीओ करीब 30,000 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है। इस मंजूरी से भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक का रास्ता साफ हो गया है। सेबी ने 4 सितंबर को एनएसई को अपनी अंतिम टिप्पणियां दीं।
एनएसई ने जून में प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम के लिए अपने मसौदा दस्तावेज नियामक के पास दाखिल किए थे। सेबी से मंजूरी प्राप्त करना आईपीओ प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके बाद कंपनी लागू नियामक आवश्यकताओं के अधीन सार्वजनिक निर्गम के लिए आगे की तैयारी कर सकती है। यह मंजूरी एनएसई के लिए एक बड़ा कदम है।
एनएसई की लिस्टिंग योजनाएं लगभग एक दशक से नियामकीय बाधाओं के कारण रुकी हुई थीं। इन बाधाओं में को-लोकेशन विवाद भी शामिल था। एनएसई का प्रस्तावित सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से बिक्री प्रस्ताव (ओएफएस) होगा। इसमें 14.89 करोड़ शेयरों की पेशकश की जाएगी। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) के अनुसार, मौजूदा शेयरधारक एक्सचेंज की लगभग छह फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे।
कौन से शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे?
इस बिक्री प्रस्ताव में कई प्रमुख शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी कम करेंगे। सबसे बड़े विक्रेता शेयरधारकों में भारतीय स्टेट बैंक शामिल है। भारतीय स्टेट बैंक 2.48 करोड़ शेयरों तक की बिक्री करेगा। इसके बाद एसएस स्ट्रैटेजिक मॉरिशस लिमिटेड का नंबर आता है। यह 1.60 करोड़ शेयर बेचेगा। यह बिक्री एक्सचेंज के स्वामित्व संरचना में बदलाव लाएगी।
कितना बड़ा होगा यह आईपीओ?
मामले से परिचित लोगों के अनुसार, इस आईपीओ का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। यह अनुमानित आकार एनएसई के बाजार पूंजीकरण को 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्शाता है। यह लंबे समय से प्रतीक्षित सार्वजनिक पेशकश एक नया रिकॉर्ड बनाएगी। यह अक्तूबर 2024 में लॉन्च हुए हुंडई मोटर्स इंडिया के पिछले रिकॉर्ड को पार कर जाएगी। हुंडई मोटर इंडिया का निर्गम 27,870 करोड़ रुपये का था।
एनएसई के लिए यह मंजूरी क्यों महत्वपूर्ण है?
एनएसई के लिए यह मंजूरी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। एक्सचेंज की लिस्टिंग योजनाएं लगभग दस साल से अटकी थीं। को-लोकेशन विवाद जैसी नियामक चुनौतियां इसकी एक बड़ी वजह थीं। सेबी की हरी झंडी मिलने से अब एनएसई को बाजार में सूचीबद्ध होने का मौका मिलेगा। यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। यह पारदर्शिता और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाएगा।



