भुवनेश्वर31 मिनट पहले
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यह परिसर नवी मुंबई स्थित आरबीआई के मुख्य डेटा सेंटर के डिजास्टर रिकवरी बैकअप के रूप में काम करेगा।
देश की बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय प्रणाली को आपदाओं, तकनीकी खराबियों और साइबर खतरों से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने ओडिशा के खुर्दा जिले में नया अत्याधुनिक डेटा सेंटर तैयार किया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के पूरे बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम (यूपीआई, आरटीजीएस, एनईएफटी) को बिना रुकावट जारी रखना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को इसका उद्घाटन करेंगे। भुवनेश्वर के पास इन्फो वैली-II में 18.55 एकड़ में बना यह परिसर नवी मुंबई स्थित आरबीआई के मुख्य डेटा सेंटर के डिजास्टर रिकवरी बैकअप के रूप में काम करेगा।
सर्वर को लगातार चालू रखने के लिए जनरेटर, कूलिंग और कनेक्टिविटी की खास व्यवस्था की गई है।
170 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ
करीब 170 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह डेटा सेंटर नवी मुंबई स्थित आरबीआई की मुख्य डेटा सुविधा के बैकअप के रूप में काम करेगा। इससे देश के महत्वपूर्ण वित्तीय आंकड़ों की सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था मजबूत होगी।
अर्थशास्त्री राजीव साहू के मुताबिक, अगर किसी आपातकालीन स्थिति में आरबीआई का मुंबई का सेंटर प्रभावित होता है तो यह डेटा सेंटर अहम बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को बहाल कर देगा। यहां मुद्रा प्रबंधन, केंद्रीय बैंक के कंप्यूटिंग सिस्टम और वित्तीय डेटा की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
डेटा सेंटर को डेटा मैनेजमेंट, डिजास्टर रिकवरी, साइबर सिक्योरिटी, और करेंसी मैनेजमेंट, पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम, और रेगुलेटरी ऑपरेशन जैसे कामों के लिए डिजाइन किया गया है।
पानी नहीं, गैस से आग बुझाने का सिस्टम
भारी सर्वर और बड़े सुपरकंप्यूटर का वजन सहने के लिए इमारत का फर्श मजबूत रीइन्फोर्स कंक्रीट से बना है। सुरक्षा के लिए बम-प्रूफ दीवारें, एडवांस्ड फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम (जो बिना पानी के गैस से आग बुझाता है ताकि कंप्यूटर खराब न हों) लगाया गया है। यह देश की ‘डिजिटल तिजोरी’ है। एक हिस्सा या कोई बड़ी मशीन खराब हो जाए, तो भी दूसरा हिस्सा बिना एक सेकंड रुके काम संभाल लेता है।
डेटा सेंटर में हर जरूरी चीज के दो बैकअप
सेंटर को दुनिया के सबसे ऊंचे मानकों (टियर-IV) पर बनाया गया है। बिजली, इंटरनेट और कूलिंग का बैकअप 2एन+1 फॉर्मेट में है। यानी हर जरूरी चीज के दो बैकअप हमेशा तैयार रहेंगे। सर्वर को लगातार चालू रखने के लिए बिजली आपूर्ति, जनरेटर, कूलिंग और कनेक्टिविटी की अतिरिक्त व्यवस्था रखी गई है। मुंबई-चेन्नई जैसे महानगरों के मुकाबले ओडिशा में इंटरनेट और डेटा ट्रैफिक का दबाव कम है।

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डेटा सेंटर के लिए ओडिशा ही क्यों चुना गया
इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास 22 मार्च, 2023 को तत्कालीन RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने किया था। डेटा सेंटर के लिए इस जगह को इसलिए चुना गया है, क्योंकि यह क्षेत्र हिमालय के उच्च भूकंपीय जोखिम वाले इलाकों से दूर है।
साथ ही मुंबई-चेन्नई जैसे समुद्री सब-सी केबल वाले ट्रैफिक जाम से दूर होने से यह भू-राजनीतिक खतरों और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहेगा। यह इलाका भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से काफी अंदरूनी हिस्से में है। इससे विदेशी मिसाइल या ड्रोन हमलों का खतरा नहीं है। —————- ये खबर भी पढ़ें…
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