Homeट्रैवलओबेरॉय राजगढ़ पैलेस विश्व के सबसे खूबसूरत होटलों में शुमार, मस्तानी से...

ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस विश्व के सबसे खूबसूरत होटलों में शुमार, मस्तानी से जुड़ा है इतिहास


Last Updated:

Oberoi Rajgarh Palace: पन्ना के घने जंगलों में पहाड़ियों के उपर शानदार ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस को इस साल विश्व के सबसे खूबसूरत होटलों में शुमार किया गया है. यह भव्य होटल बाजीराव की दूसरी पत्नी मस्तानी के इतिहास से जुड़ा हुआ है. देश का यह आलीशान होटल है जिसे फ्रांस की संस्था ने प्रिक्स वर्साय कार्यक्रम में इस पैलेस को चुना है. पैलेस में बारीक नक्काशीदार पत्थर, ऊंचे मेहराब और विशाल आंगन बुंदेली राजाओं के ठाट-बाठ को जीवंत करते हैं. इसके सबसे महंगे सूट का एक दिन का किराया 11 लाख से ज्यादा है.

Zoom

ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस. Photo-instagrame page of Obertheoberoirajgarhpalace

Oberoi Rajgarh Palace : पन्ना के घने जंगलों में सबसे ऊंची मुनियागढ़ पहाड़ियों पर अडिगता के साथ खड़ा ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस अपनी भव्यता, आर्किटेक्चर और इतिहास के लिए जाना जाता है. कभी यह बुंदेला राजाओं की शान हुआ करता था. आज इसकी विरासत के साथ ओबेरॉय होटल ने इसके अस्तित्व को कायम किया हुआ है. 76 एकड़ में फैली इस विशाल संपत्ति में 65 कमरे और सुइट्स हैं. इसमें सबसे महंगे सुइट्स का किराया एक दिन का 11 लाख से ज्यादा है. खजुराहो के पास होने के कारण यह दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण के केंद्र में रहता है. अब इस होटल को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है. फ्रांस के प्रतिष्ठित पुरस्कार कार्यक्रम प्रिक्स वर्साय ने खजुराहो स्थित ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस को वर्ष 2026 के विश्व के सबसे खूबसूरत होटलों की सूची में शामिल किया है. इस सूची में दुनिया भर से केवल 16 होटल चुने गए हैं. भारत ने इस प्रतिष्ठित सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. यह सम्मान न केवल होटल की भव्य वास्तुकला और शानदार डिजाइन का प्रमाण है, बल्कि उसके समृद्ध इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और अद्वितीय आतिथ्य का भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है.

फोटो-ओबेरॉय होटल की वेबसाइट से साभार

राजगढ़ पैलेस का खासियत
राजगढ़ पैलेस खजुराहो के पास पन्ना की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित है. घने जंगल और झील के कारण इसकी कुदरती सुदंरता अपने आप में भव्य है. यहां से पन्ना के प्राकृतिक परिदृश्य का बेहद खूबसूरत नजारा दिखता है. 350 साल पुराने इस पैलेस को अब ओबेरॉय होटल एंड रिजॉर्ट बना दिया गया है. इस पैलेस की एक-एक दीवार को इस तरह से नक्काशीदार और भव्य बनाया गया है कि हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है. इसके मूल ढांचे और वास्तुकला को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस किया गया है. इसमें बुंदेली राजशाही के वैभव का छाप दिखता है. इसलिए प्रिक्स वर्साय में इसे राजसी भव्यता का प्रमाण माना गया है. यह पूरा परिसर 76 एकड़ में फैला है. इसमें 65 बड़े-बड़े कमरे और सुइट्स हैं. इसकी सादगीपूर्ण लेकिन सुरुचिपूर्ण सजावट, राखी-धूसर रंग के चंदेरी पर्दे और ओबेरॉय परिवार के निजी संग्रह से चुनी गई लिथोग्राफ कलाकृतियां इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती है. यह परिसर दो भागों में बंटा हुआ है. निचले हिस्से के बगीचों में साल और पलाश के पेड़ों की छांव के बीच गार्डन रूम स्थित हैं. वहीं पहाड़ी की ऊंचाई पर बने मुख्य महल में 17 कमरे और सुइट्स हैं, जिन्हें कभी चंदेला शासकों के निजी कक्षों के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. महल के चार पैलेस रूम आकार में अपेक्षाकृत छोटे हैं लेकिन उनकी खूबसूरती और सुविधाएं उन्हें बेहद खास बनाती हैं. इनमें खुले आसमान के नीचे बने बाथटब, निजी टैरेस और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के शानदार नजारे शामिल हैं. सबसे ऊपर स्थित कोहिनूर सुइट इस शाही अनुभव का शिखर है, जिसमें दो बेडरूम, निजी स्विमिंग पूल, बगीचा, टैरेस और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य मौजूद हैं. इसमें ठहरने के लिए एक दिन का किराया 11 लाख से ज्यादा है.

मस्तानी से क्या है संबंध
मस्तानी महाराजा छत्रशाल की बटी और बाजीराव पेशवा की दूसरी पत्नी थीं. महाराजा छत्रसाल ने 18वीं सदी में मुगलों की बची-खुची सेना को हराकर यह अपना स्वतंत्र राज किया और बुंदेलखंड में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की. महाराजा छत्रसाल के शासन काल में पन्ना और खजुराहो का पूरा इलाका बुंदेलखंड में स्थित था. 17वीं शताब्दी के आखिर में महाराजा छत्रसाल का परपोता बुंदेला राजा हिंदूपत सिंह ने पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों और दुर्गम मनियागढ़ पहाड़ियों के बीच राजगढ़ को एक अभेद्य किले के रूप में स्थापित किया था. घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच होने के कारण यह किला दुश्मनों की नजरों से छिपा रहता था और पन्ना रियासत के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच का काम करता था. इसे बाद में धीरे-धीरे एक भव्य पैलेस के रूप में विकसित किया. राजगढ़ के इस वैभवशाली ढांचे में चंदेल और बुंदेला स्थापत्य कला का अनूठा मिश्रण दिखता है. हिंदूपत सिंह ने इस पैलेस के एक मुख्य द्वार का नाम मस्तानी के नाम पर कर दिया जो आज भी उस महल के वैभव का प्रतीक माना जाता है. होटल रिजॉर्ट बनने के बाद यह ऐतिहासिक विरासत आज भी कायम है.

पैलेस का शाही वैभव आज भी कायम
आज ओबेरॉय समूह ने उस ऐतिहासिक दौर की विरासत को बेहद सावधानी और सम्मान के साथ संरक्षित किया है. महल में प्रवेश कचहरी के रास्ते से होता है जो कभी प्रशासनिक कार्यालय हुआ करता था. अब यह ऐतिहासिक खंडहर गुलाबी बोगनवेलिया के फूलों से सजा हुआ है और विरासत तथा प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है. इसे भारत के सबसे आकर्षक चेक-इन स्थलों में से एक माना जाता है. आगे बढ़ने पर दरबार हॉल आता है जो आठ खूबसूरत और भव्य स्तंभों पर टिका हुआ है. सदियों बाद भी इन स्तंभों की शान और गरिमा वैसी ही बनी हुई है, मानो वे आज भी अपने गौरवशाली इतिहास की कहानी सुना रहे हों. वहीं महल के आंगन में फव्वारे की मधुर ध्वनि के बीच स्थित अमरवा बार शाम की चाय (हाई टी) के लिए एक बेहतरीन जगह है. सूर्यास्त के समय यहां कभी-कभी कथक नृत्य की प्रस्तुति भी होती है, जो पूरे अनुभव को और अधिक यादगार बना देती है. झील किनारे स्थित नीरांगना कॉरिडोर कुदरत का अनमोल वरदान है.

कपूरथला से लेकर त्रावणकोर तक के स्वाद का संगम
यहां का विशेष रेस्तरां मान्या प्रसिद्ध खाद्य इतिहासकार पुष्पेश पंत और शेफ विजय साही के सहयोग से तैयार किया गया है. इन मेन्यू के माध्यम से भारतीय राजघरानों के वास्तविक खानपान और उनकी मेहमाननवाजी की परंपराओं को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है. प्रिंसली स्टेट्स नामक मेन्यू मेहमानों को भारत की विभिन्न रियासतों की शाही रसोइयों की यात्रा पर ले जाता है. इसमें कपूरथला से लेकर त्रावणकोर तक के राजघरानों के व्यंजनों का स्वाद और इतिहास एक साथ परोसा जाता है. हल्के नाश्ते के शौकीनों के लिए झील किनारे स्थित नीरांगना एक खास अनुभव प्रदान करता है.

फोटो-ओबेरॉय होटल की वेबसाइट से साभार

ठहरने का किराया कितना
राजगढ़ पैलेस में एक रात ठहरने की शुरुआती कीमत लगभग 40,000 रुपये है. वहीं सबसे आलीशान कोहिनूर सुइट का किराया 11 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है. प्रिक्स वर्साय ने जिस बात को सम्मानित किया है उसे यहां आने वाला हर व्यक्ति जल्दी ही महसूस कर सकता है. राजगढ़ केवल एक आलीशान पैलेस नहीं है बल्कि यह एक ऐसी जगह है जहां वास्तुकला, प्राकृतिक परिवेश, इतिहास और आतिथ्य को बेहद समझदारी, संवेदनशीलता और सावधानी के साथ एक-दूसरे में पिरोया गया है. यही कारण है कि ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस भारत की शाही विरासत, सांस्कृतिक समृद्धि और आधुनिक विलासिता का अद्वितीय संगम महसूस कराता है.

About the Author

authorimg

Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments